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आ रहा है जीएसटी जब तो राजस्व कर्मी बढऩे का सबब
दिल्ली डायरी
ए के भट्टाचार्य /  August 10, 2016

जरा अंदाजा लगाइए कि बीते एक साल के दौरान केंद्र सरकार के किस विभाग के कर्मचारियों की संख्या में सबसे अधिक इजाफा हुआ है? न तो यह पुलिस विभाग है, न ही डाक विभाग और न ही रेलवे। यह है राजस्व विभाग। बीते मार्च के आखिर तक राजस्व विभाग के कर्मचारियों की संख्या ठीक एक साल पहले के मुकाबले 84 फीसदी बढ़ी। मार्च 2015 के आखिर में जहां विभाग में करीब 96,000 कर्मचारी थे (इनमें से अधिकांश कर संग्रहण में लगे थे) वहीं मार्च 2016 में इनकी संख्या बढ़कर 177,500 हो गई। अन्य बड़े सरकारी विभागों की बात करें तो केवल रक्षा विभाग के कर्मचारियों की संख्या में ही दो अंकों में बढ़ोतरी हुई। यहां के कर्मचारी 25 प्रतिशत बढ़कर 40,000 से 50,000 हो गए। 

 
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन पुलिस विभाग के कर्मचारियों की संख्या इस अवधि में महज तीन फीसदी बढ़ी वहीं 13 लाख कर्मचारियों वाले रेल विभाग के कर्मचारियों की संख्या बढ़ी ही नहीं जबकि यह विभाग सरकार के कुल कर्मचारियों के एकतिहाई के लिए जिम्मेदार है। ऐसे में अगर सरकार के कुल कर्मचारियों की संख्या में गत वर्ष 6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई तो जाहिर है इसमें सबसे बड़ा योगदान राजस्व विभाग ने दिया।
 
अब जबकि कर सुधार जोर पकड़ रहे हैं तो इस बढ़ोतरी की भी जांच होनी चाहिए। यह याद रखिए कि राजस्व विभाग के कर्मचारियों की दक्षता और उनकी प्रभावशीलता उनके मूल काम में निहित है और यह मूल काम है कर संग्रह करना। यह काम सरकार के राजकोषीय प्रबंधन के लिहाज से अहम है। ऐसे में अगर राजस्व विभाग के कर्मचारियों की संख्या महज एक साल में 84 फीसदी तक बढ़ती है तो यह सवाल जायज है कि इससे सरकार को क्या लाभ हुए? क्या इससे कर संग्रह बढ़ा या फिर कर प्रशासन में कोई सुधार हुआ? 
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में कहा कि कर विभाग के प्रयासों और पहल की बदौलत कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह का बमुश्किल छह फीसदी ही आता है। इस कर का शेष हिस्सा स्रोत पर कर कटौती अथवा अन्य तरीकों से आता है? ऐसे में राजस्व विभाग की बढ़ी हुई श्रमशक्ति को देखते हुए उसके किफायती होने पर सवाल उठने लाजिमी हैं। अब जबकि वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी का अगले वर्ष लागू होना लगभग तय हो गया है तो इस बात की महत्ता और अधिक बढ़ गई है। 
 
प्रत्यक्ष कर के सकलीकरण के कारण पहले ही तकनीक का प्रयोग काफी बढ़ चुका है। इसकी बदौलत कर्मचारियों के उपयोग में कमी आनी चाहिए थी। अगर कर्मचारियों की संख्या कम करना संभव नहीं था तो कम से कम मौजूदा कर्मचारियों को नए तरह के कर आकलन और जांच आदि की प्रक्रियाओं के काम में लगाने के लिए उनका पुन:प्रशिक्षण और उनकी पुनर्नियुक्ति की जानी चाहिए थी। यह स्पष्टï नहीं है कि ऐसी कोई योजना शुरू की गई या नहीं लेकिन इसका कोई उदाहरण तो नजर नहीं आता। कर संग्रह के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का असर भी नजर नहीं आता। राजस्व विभाग के कर्मचारियों की संख्या में कमी के बजाय कुल कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी ही हुई है। 
 
अब जबकि देश अगले वित्त वर्ष से जीएसटी की शुरुआत की तैयारी में लगा हुआ है तो यह बात काफी अहम हो जाती है कि ऐसे प्रशिक्षणों और पुनर्नियुक्तियों को सरकार की कार्ययोजना में प्राथमिकता दी जाए। करीब 60,000 अप्रत्यक्ष कर अधिकारियों को अब जीएसटी की शुरुआत के लिए नए सिरे से प्रशिक्षण दिया जाएगा। आश्चर्य की बात है कि सरकार में अभी कोई इस विषय में बात करता नजर नहीं आ रहा है कि अप्रत्यक्ष कर के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों की वास्तविक श्रमशक्ति का आकलन किया जाए।
 
जीएसटी की सबसे बड़ी सकारात्मक बातों में से एक यह है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद विवेकाधीन फैसलों और नौकरशाही के हस्तक्षेप की संभावन सीमित हो जाएगी। विविध करों का होना अतीत की बात हो जाएगा जबकि कर दरों की संख्या में भी नई व्यवस्था के तहत काफी कमी आएगी। इतना ही नहीं, जीएसटी नेटवर्क के तकनीक आधारित होने के कारण उत्पादन या आपूर्ति शृंखला के विभिन्न स्तरों पर करों के भुगतान या निपटान के लिए कम लोगों की जरूरत पड़ेगी। इससे कम कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। 
 
सरकार का यह मानना अहम है कि जीएसटी की सफल शुरुआत काफी हद तक प्रशिक्षित राजस्व कर्मचारियों पर निर्भर करेगी। इन अधिकारियों के मन में जीएसटी व्यवस्था में अपनी बदली हुई भूमिका को लेकर कोई चिंता नहीं होनी चाहिए। अगर राजस्व विभाग के अधिकारियों को अपने पुराने अधिकारों और भूमिकाओं को बचाने का अवसर प्रदान किया गया तो जीएसटी के जरिए साझा राष्ट्रीय बाजार तैयार करना एक मुश्किल काम होगा। जीएसटी को सहज सुगम तरीके से लागू करने के लिए राजस्व कर्मचारियों को नए सिरे से प्रशिक्षित करना अनिवार्य होगा। लेकिन इससे भी अहम बात यह है कि राजस्व विभाग के कर्मचारियों की संख्या में कमी की जाए क्योंकि नई कर व्यवस्था में कम कर अधिकारियों की मदद से भी काम चल सकता है।
Keyword: central govt, department,,
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