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पोकेमॉन गो की बढ़ती दीवानगी के बीच फंसी कारोबारी जिंदगी
इंसानी पहलू
श्यामल मजूमदार /  August 04, 2016

हालांकि पोकेमॉन गो का भारत में अभी तक आधिकारिक रूप से आगाज भी नहीं हुआ है लेकिन बेसब्र भारतीय प्रशंसक पहले से ही 'पोकेस्टॉप्स' बना चुके हैं और कई शहरों (इस सूची में कोलकाता अव्वल नजर आ रहा है) में तो 'पोकेवॉक्स' भी आयोजित हो रही हैं। हालांकि अभी यह गेम औपचारिक तौर पर भारत में जारी नहीं हुआ है मगर कई शहरों में इसे लेकर लोगों में आवेग का अतिरेक है। बड़े शहरों के युवा इसे लेकर उत्साहित हैं। लिहाजा, कुछ भारतीय कंपनियों के मानव संसाधन विभाग कोई जोखिम नहीं ले रहे हैं और कार्यस्थल को प्रभावित करने वाले इस लोकप्रिय रियलिटी गेम के प्रभाव को लेकर पहले से ही तमाम तरह के बौद्घिक सत्र आयोजित कर रहे हैं। उनकी चिंता की वजह यह है कि दफ्तरों में पोके-ट्रबल का खुमार कुछ ज्यादा ही चढ़ रहा है और अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में कई कंपनियों के सामने यह चुनौती हो गई है कि वे पोकेमॉन की धुन में रमे कर्मचारियों से कैसे निपटें?

 
इस तरह की खबरें आ रही हैं कि कई कर्मचारियों को पोकेमॉन गो की वजह से अपनी नौकरी तक गंवानी पड़ी या वे नौकरी गंवाने के कगार पर पहुंच गए क्योंकि वे काम के समय इस खेल में खोए हुए थे। बोइंग ने तो काम के दौरान इसे खेलने पर पूरी तरह पाबंदी लगाने के लिए कर्मचारियों को एक तरह का औपचारिक सर्कुलर तक भेज दिया कि 'इसे खेलने से आपके आसपास किसी को चोट भी लग सकती है।' वॉलमार्ट में प्रबंधक होने का दावा करने वाले एक रेडिट उपभोक्ता का कहना है कि इसके कारण वॉलमार्ट में एक पर्यवेक्षक को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी क्योंकि वह काम के दौरान पोकेमॉन को पकडऩे में मसरूफ था। मगर इसे लेकर केवल बड़े खिलाड़ी ही चिंतित नहीं हैं बल्कि इसने मोबाइल ऐप में लोकप्रियता के पैमाने पर ट्विटर को भी पीछे छोड़ दिया है। 
 
इस महीने की शुरुआत में एक उपभोक्ता रिचर्ड कोरी ने इमगर (इमेजयोर) मानक साइट पर  अपनी कंपनी का एक नोटिस पोस्ट किया, जिसमें कर्मचारियों को चेतावनी दी गई कि अगर वे काम के दौरान गेम खेलते पाए गए तो उसके खतरनाक परिणाम होंगे। नोटिस का मजमून कुछ यूं था, 'हम आपको दिन भर अपने मोबाइल फोन पर एक फंतासी किरदार को पकडऩे की नहीं बल्कि काम करने की तनख्वाह देते हैं। अगर आपको गेम खेलना ही है तो अपने ब्रेक टाइम या लंच टाइम से समय निकालिए। अन्यथा बेरोजगार होने के बाद आपके पास उसे पकडऩे के लिए 'काफी वक्त' होगा।' एक अन्य पोस्ट के मुताबिक, 'यह 21वीं सदी के बॉस लोगों के लिए बेहतरीन जवाब है, जो चाहते हैं कि आप उनके लिए गधे की तरह काम करें।' कर्मचारियों की चिंता से जुड़े ट्वीट की भी भरमार है। उनमें से एक का कहना है कि अमूमन उसे सुबह जल्दी उठना पसंद नहीं है लेकिन ऐसा करना पड़ता है ताकि पोकेमॉन गो खेलने के लिए पर्याप्त समय मिल जाए, वहीं दूसरे ने अपने एक साक्षात्कार का हवाला दिया कि कैसे उसके इंटरव्यू के दौरान नियोक्ता सन्न रह गया। उस साक्षात्कार का संक्षिप्त ब्योरा कुछ इस प्रकार है।
 
साक्षात्कारकर्ता: आप हमारे साथ क्यों काम करना चाहते हैं? 
जवाब: क्योंकि आपके यहां ब्लास्टॉइज है। 
ब्लॉस्टाइज इस लोकप्रिय गेम्स में एक राक्षस होता है।
 
यह सिलसिला यहीं खत्म नहीं होता। एक 23 वर्षीय कर्मचारी की पोस्ट के मुताबिक कंपनी अधिकारियों ने जब उसे आईफोन कैमरे का इस्तेमाल गेम खेलने के लिए करते देखा तो उन्होंने उसका आईफोन ही जब्त कर लिया। एक अन्य नियोक्ता का कहना है कि अपनी रहस्यमीय, फंतासी और दूसरे पहलुओं के चलते यह ध्यान भटकाने का अहम जरिया बन गया है। ट्विटर से एक और संदेश मिला कि एक युवती बहुत खुश है क्योंकि उसका दफ्तर पोकेस्टॉप पर स्थित है और कैसे यह खेल अब उसकी जिंदगी बन गया है। 
 
यहां तक कि सोसाइटी फॉर ह्यïूमन रिसोर्स मैनेजमेंट (एसएचआरएम) ने नियोक्ताओं को चेताया है कि इसकी वजह से किसी कर्मचारी को चोट भी लग सकती है और ऐसा हुआ तो इसके लिए कंपनी जिम्मेदार ठहराई जाएगी। यह उन नियोक्ताओं की असली चिंता है, जिनके लिए अभी तक स्मार्टफोन पर कर्मचारियों के संदेशों का आदान-प्रदान ही खटकता था और उसमें कामकाज से इतर इंटरनेट इस्तेमाल और गपबाजी भी शामिल है। उनके लिए तो उत्पादकता घटाने के लिहाज से पोकेमॉन गो एक गंभीर मंडराता खतरा है।
 
मगर मानव संसाधन प्रबंधक कुछ राहत भी ले सकते हैं कि इसके साथ सब कुछ गड़बड़ भी नहीं। उनमें से तमाम का कहना है कि इसमें कई सकारात्मक पहलू हैं, जिससे खाली समय के दौरान नियोक्ता और कर्मचारी के बीच रिश्ता मजबूत हो सकता है क्योंकि इससे लोगों में एक साथ संवाद और कामकाज होने के साथ ही साझेदारी का रिश्ता न केवल खोजी बल्कि प्रतिस्पर्धी भी होगा। किसी भी सूरत में यह अनुमान लगाना बेमानी होगा कि सिर्फ इस खेल की वजह से लोग अपने काम से कन्नी काटेंगे। आखिरकार यह एक खेल ही है और एक तरह से इससे सहकर्मियों के बीच सामाजिक संवाद को प्रोत्साहन मिलेगा। बस इसके लिए जरूरी है कि एक उचित रूप से तैयार रणनीति को आकार दिया जाए, जिसमें यह समायोजित कर सुनिश्चित किया जाए कि इसके साथ भी उत्पादकता का एक उचित स्तर बरकरार रखा जा सकता है। इस पर हड़बड़ाने के बजाय नियोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे कामकाज के दौरान मोबाइल जैसे साधन के उपयोग को लेकर नियमों के बारे में कर्मचारियों के साथ सार्थक संवाद स्थापित करें ताकि कर्मचारियों के लिए एक सीमा निर्धारित हो सके, जिससे वे अपने लिए लक्ष्मण रेखा खींच पाएं। कुछ मामलों में जरा से सलाह-मशविरे में कोई बुराई नहीं। 
Keyword: pokemon go, game, mobile,,
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