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स्टांप शुल्क में रियायत पर चलेगी कैंची
बीएस संवाददाता / पटना July 27, 2016

बिहार सरकार की नई औद्योगिक नीति की वजह से निवेशकों पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है। दरअसल, राज्य सरकार ने निवेशकों के लिए स्टांप ड्यूटी पर छूट को खत्म करने का फैसला लिया है। इसकी जगह अब निवेशकों को इस रकम की प्रतिपूर्ति मिलेगी। वहीं, निवेशकों को नई नीति के तहत भूमि के इस्तेमाल में बदलाव पर फिर से कर चुकाना होगा। राज्य सरकार ने अपनी प्रस्तावित नई औद्योगिक नीति के तहत कई रियायतों को खत्म करने का फैसला लिया है। उद्योग विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इसकी जगह अब इस बाबत चुकाई गई रकम की प्रतिपूर्ति की जाएगी। उनके मुताबिक इस बदलाव से निवेशकों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। साथ ही, गंभीर निवेशकों की पहचान में भी राज्य सरकार को मदद होगी। राज्य सरकार ने इसके बदले में उद्यमियों के जल्दी ही सहूलियतों में इजाफा करने का भरोसा भी दिलाया।  
 
उद्योग विभाग के सूत्रों के मुताबिक नई नीति को नए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। उनके मुताबिक बीते 10 साल से राज्य सरकार ये रियायतें निवेशकों को दे रही है। इसीलिए उनके मुताबिक अब इस बारे बदलाव की जरूरत है। अधिकारी ने कहा, 'इस बारे रियायतों के मामले में सरकार बहुत उत्साहित नहीं है। इससे बीते 10 साल में कोई फायदा नहीं हुआ है। इसीलिए अब वक्त आ गया है कि हम रियायतों के बजाए सुविधाओं पर ध्यान दें। वैसे भी हम उन रियायतों को खत्म कर रहे हैं, जिसकी व्यावहारिकता नहीं रह गई है।' 
 
उनके मुताबिक नई नीति में सुविधाओं पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत पूरी व्यवस्था का कंप्यूटरीकरण होगा, ताकि निवेशकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़े।  हालांकि, निवेशकों के मुताबिक बदलाव से लालफीताशाही में इजाफा ही होगा। राज्य के एक वरिष्ठ कारोबारी ने बताया, 'इस पूरी कवायद से तो बाबूओं की पूछ ही बढ़ेगी। अब निवेशकों को मूल्य वद्र्धित कर के साथ-साथ स्टांप ड्यूटी के लिए भी विभाग के चक्कर लगाने होंगे। वैसे भी कई मामलों में हमें मायूसी मिली है।' 
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