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अब पहनें 3डी प्रिंटिंग से बने आकर्षक गहने
अलनूर पीरमोहम्मद /  July 24, 2016

भारत में आभूषण बनाने के परंपरागत तरीकों पर 3डी प्रिंटिंग तकनीक के चलते गहरा असर देखा जाने लगा है। ब्लूस्टोन, ऑग्रेव और कैरेटलेन जैसी नई कंपनियां इस आधुनिक तकनीक से आभूषण निर्माण को नया स्वरूप देने की कोशिश कर रही हैं। आभूषण निर्माण में 3डी प्रिंटिंग तकनीक के इस्तेमाल का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि इससे नए गहने बनाने में लगने वाला वक्त काफी कम हो जाता है। खास तौर पर ऑनलाइन बिक्री में समय एक अहम पहलू होता है। इसका एक और लाभ यह है कि 3डी प्रिंटिंग से तैयार आभूषणों में मानवीय दखल न के बराबर होता है। लिहाजा ग्राहकों को डिजाइन के बारे में सटीकता से बता पाना भी आसान होता है। 

  
ग्राहकों की पसंद के मुताबिक आभूषण बनाने वाली ऑनलाइन कंपनी ऑग्रेव की नजर शादियों में इस्तेमाल होने वाले गहनों पर टिकी हुई है। उनकी कंपनी अपने ग्राहकों को अंगूठी पर फिंगरप्रिंट अंकित करने के साथ ही सोने की चेन पर पूरे परिवार की 3डी तस्वीर अंकित कराने की सुविधा भी शुरू करने वाली है। ऑग्रेव के सह-संस्थापक विवेक कृष्ण का कहना है कि शादियों के दौरान हर कोई अपनी पसंद के मुताबिक गहना बनवाना चाहता है। उनका अनुमान है कि करीब 20 से लेकर 30 फीसदी ग्राहक सोने के गहनों में अपनी पसंद के हिसाब से छोटे-बड़े बदलाव जरूर कराना चाहते हैं। 
 
इसके बावजूद भारत में 3डी प्रिंट वाले आभूषण का बाजार काफी छोटा है। इस बाजार का आकार इतना कम है कि कोई भी बड़ी विश्लेषक फर्म इस पर निगाह नहीं रखती है। लेकिन इस कारोबार से जुड़े अधिकतर लोगों को यकीन है कि बहुत जल्द इसका बड़े पैमाने पर विस्तार होने वाला है। भारत में हर साल करीब एक हजार टन सोने की खपत होती है जिसमें से आधा सोना आभूषण बनाने में इस्तेमाल होता है। देश भर में फैले हजारों कारीगर कड़ी मेहनत कर ये आभूषण बनाते हैं। कुशल कारीगरों के  तराशे हुए रत्नों और आभूषणों को बड़े पैमाने पर निर्यात भी किया जाता है। भारतीय बाजार में अब संगठित और ब्रांडेड आभूषण कंपनियों की तरफ से गहनों की खरीद में तेजी देखी जा रही है लेकिन इन गहनों में पसंद के मुताबिक बदलाव करने का काम तो स्थानीय कारखानों और सराफा दुकानोंमें काम करने वाले कारीगर ही करते हैं।   आभूषण निर्माण क्षेत्र 3डी प्रिंटिंग तकनीक को अपनाने वाले शुरुआती उपभोक्ता कारोबारों में से एक है। उड्डïयन और ऑटोमोबाइल क्षेत्र उत्पाद की एकदम सटीक नकल बनाने के लिए 3डी प्रिंटर का इस्तेमाल कई वर्षों से कर रहे हैं। इसके अलावा कारों और विमानों में इस्तेमाल होने वाले कुछ पुर्जे भी इस तकनीक के सहारे बनाए जा रहे हैं। लेकिन 3डी प्रिंटिंग के जरिये बने किसी सामान के मालिक होने का अहसास तो हमें आभूषणों से ही मिल पाएगा।  
 
इस तकनीक के सहारे लोगों का भारी और महंगे आभूषण पहनने का सपना भी कम दाम में पूरा हो सकता है। ब्लूस्टोन के मुख्य परिचालन अधिकारी अरविंद सिंघल इसकी व्याख्या कुछ इस तरह से करते हैं, 'मान लीजिए आप कोई ऐसा आभूषण पहनना चाहते हैं जो शरीर पर हल्का अहसास कराने के साथ ही जेब पर भी भारी न पड़े। इसके लिए अगर हम 3डी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं तो हम मूल डिजाइन को बरकरार रखते हुए भी आभूषण को खोखला कर हल्का बना सकते हैं जिससे वजह और दाम दोनों में गिरावट आ जाएगी।' ब्लूस्टोन के पास इस तरह के गहनों का एक पूरा संग्रह मौजूद है। सिंघल के मुताबिक उनकी कंपनी न केवल गहनों को अंतिम तौर पर तैयार करते समय बल्कि डिजाइन, प्रोटोटाइप बनाने और प्रदर्शन में भी 3डी तकनीक का भरपूर इस्तेमाल कर रही है। यहां तक कि कंपनी की वेबसाइट पर आभूषणों की जो तस्वीरें लगी हुई हैं, वो भी गहनों के फोटोग्राफ न होकर उनकी 3डी छवियां हैं।   
 
कंप्यूटर की मदद से डिजाइन तैयार होने से आभूषण क्षेत्र में रचनाशीलता के लिए नए अवसर भी पैदा हुए हैं। लेकिन इस क्षेत्र का बड़ा हिस्सा छोटे और असंगठित खिलाडिय़ों से ही बना है जिसकी वजह से तकनीक को अपनाने की चाहत और रफ्तार दोनों ही धीमी है। इसके बावजूद एक कंप्यूटर पर गहने की डिजाइन बनाना काफी सुविधाजनक है और इसके कई फायदे भी हैं और इसी से आकर्षित होकर नई कं पनियां भी 3डी प्रिंटिंग के कारोबार में कदम रख रही हैं।
 
भविष्य में 3डी का बड़ा बाजार
 
दिल्ली की 3डी प्रिंटिंग सेवा प्रदाता कंपनी नोवाबीन्स के मुताबिक इस तकनीक की लागत इतनी कम नहीं है कि इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सके। इसके बावजूद रत्नों और आभूषणों के कुल बाजार में शादियों के गहनों की 70 फीसदी हिस्सेदारी को देखते हुए कहा जा सकता है कि 3डी प्रिंटिंग वाले आभूषणों के बाजार में विकास की अपार संभावनाएं हैं। हालांकि अक्सर खरीदारों की जानकारी के बगैर ही 3डी प्रिंटिंग का इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि उन्हें शायद ही इससे फर्क पड़ता है कि उसकी पसंद की डिजाइन किस तरह से तैयार किया गया है। दरअसल कई छोटे आभूषण विक्रेता स्थानीय स्तर पर ही 3डी प्रिंटिंग और डिजाइनिंग कंपनियों की मदद लेते हैं जिसके चलते बाजार के आकार का सही-सही अंदाजा लगा पाना मुश्किल हो जाता है।
 
जानकारों का मानना है कि दुनिया भर में 3डी प्रिंटिंग के चलते उपभोक्ताओं के खरीद के तरीके में बदलाव देखने को मिलेंगे। इनमें से कई लोग यह कल्पना भी करते हैं कि लोगों के घरों में लगे 3डी प्रिंटर से सामान निकला करेंगे जिनके लाइसेंस इंटरनेट से डाउनलोड किए जा सकेंगे। डेनमार्क की खिलौना बनाने वाली कंपनी लेगो तो पहले से ही उन मॉडल के विकास में लगी हुई है जिनके लिए ग्राहकों को 3डी प्रिंट की इजाजत दी जा सकेगी। यहां तक कि लेगो ब्लॉक्स को ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से बदलाव भी कर सकेगा। निकट भविष्य में इस तरह के उत्पादों के लिए बड़ा बाजार मौजूद होगा। लेकिन जब तक 3डी प्रिंटिंग तकनीक किफायती नहीं हो जाती है तब तक महंगे दामों पर बिकने वाले आभूषण बनाने में ही इसका इस्तेमाल हो रहा है। भारत में आभूषण क्षेत्र की स्टार्टअप इस तकनीक को तेजी से अपना रही हैं और शायद जल्द ही लोगों के हाथों में 3डी प्रिंटिंग से तैयार अंगूठी सजी हो।
Keyword: startup, company, jewelers, 3D,,
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