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आभासी दुनिया के लिए कानूनी ढांचे में हो सुधार : दुग्गल
निकिता पुरी /  July 24, 2016

अपने लॉन्च के पहले ही हफ्ते में मोबाइल खेल पोकेमॉन गो ने सनसनी फैला दी। हालांकि भारत में यह खेल लॉन्च नहीं किया गया है लेकिन खेल प्रेमियों ने इसके अनौपचारिक संस्करण को डाउनलोड कर लिया है। इस खेल ने साइबर सुरक्षा को लेकर तमाम सवाल भी खड़े कर दिए हैं।  इस मसले पर निकिता पुरी ने साइबर कानून विशेषज्ञ पवन दुग्गल से बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश : 

 
पोकेमॉन गो इतना लोकप्रिय कैसे बन गया?
 
यह खेल तमाम उपयोगकर्ताओं के लिए एक आकर्षक प्रतिमान है, खासकर उनके लिए जिनके पास अब तक आभासी वास्तविकता का कोई अनुभव नहीं था। खेल का दायरा जितना अधिक तेजी से बढ़ रहा है और इसे लोगों द्वारा जैसे अपनाया जा रहा है उससे साफ है कि इसने लोगों को चौंकाया है। इसमें निश्चित ही एक नशा है। 
 
यह खेल आज चिंता का विषय क्यों बना हुआ है?
 
लोग आज इस खेल में इतना व्यस्त हो गए हैं कि आसपास की दुनिया से उनका संपर्क लगभग समाप्त हो गया है। लोग आभासी दुनिया और वास्तविक दुनिया के बारीक अंतर को समझ नहीं रहे हैं। अगर सड़क पर चलते समय वे पोकेमॉन में व्यस्त हैं तो उनका ध्यान सड़क पर मौजूद गड्ढïे पर नहीं जाएगा और हो सकता है कि वे संतुलन खो दें और चोट खा बैठें। यह खेल अब तक यहां औपचारिक रूप से लॉन्च नहीं हुआ है लेकिन इसके पाइरेटिड एपीजी संस्करण उपलब्ध है। इन वर्जन को डाउनलोड करते स्पायवेयर और मेलवेयर का ध्यान रखना चाहिए। न सिर्फ मेलवेयर को लेकर सतर्क रहना चाहिए बल्कि आपके फोन के डेटा का भी ध्यान रखना चाहिए।
 
क्या इस खेल में निजता को किसी तरह जोखिम है?
 
मुख्य रूप से यह किसी व्यक्ति की निजता के लिए बड़ा खतरा है क्योंकि आप जब यह गेम डाउनलोड करते हैं तो आपके निजी डेटा तक पहुंच आसान हो जाती है। बहुत लोग दिशानिर्देशों को समझ नहीं पाते हैं। इनमें आपसे साफ-साफ जीपीएस लोकेशन और गूगल खाते की विस्तृत जानकारी मांगी जाती है। यहां अगर आप हां कहते हैं तो वे आपके सभी ई-मेल, डॉक्यूमेंट आदि को पढ़ सकते हैं। आज स्थान संबंधी जानकारी सबसे अधिक संवेदनशील है। इसे प्रीमियम डाटा माना जा सकता है क्योंकि इसे बेचा और साझा किया जा सकता है। जब आप अपनी स्थान संबंधी जानकारी साझा करते हैं तब साइबर-सुरक्षा संबंधी बिंदु बहुत अहम हो जाते हैं। क्योंकि अगर आपकी पहचान और स्थान संबंधी जानकारी साझा होती है तो किसी भी अपराधी के लिए आपको लक्ष्य बनाना आसान हो जाता है। इस खेल के कई और नतीजे भी निकल आते हैं मसलन अमेरिका में एक चोर चोरी करने के बाद यह खेल खेलता पकड़ा गया। 
 
क्या ऐसे खेल राष्टï्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकते हैं?
 
निश्चित रूप से कोई गेमर सरकारी संपत्तियों में घुसपैठ कर सकता है। जब आपकी स्थान संबंधी जानकारी जाहिर हो जाती है तब इसकी संभावना बढ़ जाती है। इससे न सिर्फ राष्टï्रीय सुरक्षा को बल्कि देश की अखंडता को भी खतरा हो सकता है। क्योंकि यह खेल ऐसे सर्वर पर काम करते हैं जो अमेरिका में स्थित है, ऐसे में उपयोगकर्ताओं को ध्यान रखना चाहिए। ताकि वे कुछ भी ऐसा न कर दें जिससे देश की अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो। हम इस तरह के मुद्दे को पोकेमॉन गो के निर्माताओं के पास भी नहीं ले जा सकते क्योंकि इसका आधिकारिक वर्जन अब तक भारत में लॉन्च नहीं किया गया है। 
 
भारत को इस गेम का आधिकारिक संस्करण मिलने तक क्या किया जाना चाहिए?
 
आज इस खेल की लोकप्रियता काफी बढ़ गई है ऐसे में भारत को अपने कानूनी प्रावधानों में सुधार करना चाहिए। इस खेल ने जाहिर किया है कैसे आने वाले समय में यह वास्तविकता हमारे जीवन का हिस्सा बनना शुरू कर देगी।  वर्ष 2000 का सूचना प्रौद्योगिकी कानून इस मसले पर पूरी तरह खामोश है। आज लोग इन खेलों को खेल रहे हैं ऐसे में दुर्घटना आदि की आशंका भी बनी रहती है। अब एक उचित कानूनी ढांचा हमारी प्राथमिकता बन गया है। 
Keyword: pokemon go, game, mobile,,
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