बिजनेस स्टैंडर्ड - पोकेमॉन गो से भारत में डाटा सुरक्षा पर सवाल
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, April 03, 2020 11:04 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम खबर

पोकेमॉन गो से भारत में डाटा सुरक्षा पर सवाल
सुदीप्त दे /  July 24, 2016

रियलिटी मोबाइल गेम पोकेमॉन गो दुनिया के कई देशों में बेहद लोकप्रिय हो रहा है लेकिन भारत में अभी यह औपचारिक रूप से रिलीज नहीं हुआ है। ऐसे में इस मोबाइल गेम को भारत में डाउनलोड करना और खेलना कितना जायज है? इस सवाल को लेकर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस गेम से जुड़े नियमों में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि अभी तक लॉन्च न करने वाले देशों में इसे डाउनलोड करने और खेलने पर किस तरह की कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा। हालांकि अधिकांश ऐप-आधारित मोबाइल गेम को डाउनलोड करते समय उपभोक्ता को भौगोलिक सीमाओं में लागू होने वाली शर्तों को लेकर सहमति देनी जरूरी होती है। कानूनी फर्म जे सागर एसोसिएट्स के साझेदार सजय सिंह का मानना है कि भारत में पोकेमॉन गो को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किए बगैर डाउनलोड करना गैर-कानूनी होगा। सजय सिंह का कहना है कि 'इस तरह का काम कॉपीराइट अधिनियम 1957 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के प्रावधानों का उल्लंघन माना जा सकता है। बिना लाइसेंस के सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करना और इस्तेमाल करना कॉपीराइट अधिनियम के दायरे में आएगा जबकि लाइसेंसधारक की अनुमति के बगैर डाउनलोड करने पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कार्यवाही हो सकती है।'  

 
अद्वैत लीगल फर्म के कॉर्पोरेट विलय एवं अधिग्रहण प्रमुख सत्यजित गुप्ता कहते हैं कि इस गेम के इस्तेमाल की शर्तों में यह जिक्र है कि 'आभासी सेवाओं' और 'आभासी वस्तुओं' को अनुमति प्राप्त देशों के नागरिक खरीद सकते हैं और उसका प्रयोग भी कर सकते हैं। वह कहते हैं कि इसका यही अर्थ निकाला जा सकता है कि आधिकारिक तौर पर लॉन्च हो चुके देशों में ही इस गेम को खेलने की इजाजत है। 
 
हालांकि कुछ कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय कानून के तहत इस गेम को डाउनलोड करने अथवा खेलने को गैर-कानूनी घोषित करने वाला कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि किसी संवर्धित रियलिटी गेम और मोबाइल ऐप के इस्तेमाल से संबंधित प्रमुख कानूनी मुद्दे क्या हैं?  जानकारों का कहना है कि संवर्धित रियलिटी गेम और ऐप में भौगोलिक स्थानों को आभासी चरित्रों के साथ समायोजित किया जाता है। इस गेम और ऐप का इस्तेमाल कर रहा व्यक्ति असली जिंदगी के परिवेश में मौजूद होता है और वह अपने आसपास के लोगों और दूसरे उपयोगकर्ताओं के संपर्क में भी आता है। सजय सिंह का कहना है कि 'ऐसी स्थिति में गेम खेलने व्यक्ति अपनी निजता के संरक्षण की उम्मीद नहीं कर सकता है क्योंकि वह उपयोगकर्ता लाइसेंस समझौते पर सहमति व्यक्त करने के साथ ही अपनी निजी जानकारियों को लाइसेंसधारक के साथ साझा करने पर सहमति जता चुका होता है।' इससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि लाइसेंसधारक के  पास उपभोक्ताओं की सभी व्यक्तिगत सूचनाओं के संग्रह, संरक्षण और स्थानांतरण का भी अधिकार होता है। 
 
प्रमुख कानूनी मसले निजता, उल्लंघन और डाटा संरक्षण से जुड़े हुए हैं। गुप्ता को लग रहा है कि गेम के उपयोग से संबंधित नियमों से अनुचित अनुबंध शर्तों का मामला भी उठ सकता है। इसका मतलब है कि विवाद होने पर उसके समाधान को सीमित और व्यक्तिगत सूचनाओं का कारोबारी सम्पत्ति के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।   टेकलेगिस के साझेदार सलमान वारिस का कहना है कि अगर भू-स्थानिक सूचना नियमन विधेयक 2016 संसद में पारित कर दिया जाता है तो भारत में संवर्धित रियलिटी गेम और सेवाओं पर आने वाले समय में कई तरह की पाबंदियां लग सकती हैं। हालांकि अभी इस विधेयक के प्रारूप को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है लेकिन इसमें यह प्रस्ताव रखा गया है कि देश की भू-स्थानिक सूचना को जारी करने, वितरित करने या प्रसारित करने करने के पहले सरकार की मंजूरी हासिल करना अनिवार्य होगा। वारिस कहते हैं कि 'इस विधेयक के कानून बन जाने पर जीपीएस और ऐप आधारित सेवा प्रदाताओं की तरह पोकेमॉन गो के  लिए भी अपनी जीपीएस आधारित सेवाएं देने के पहले सरकार की मंजूरी लेनी जरूरी हो जाएगी।'
 
इस मामले से जुड़ा एक और पहलू यह है कि संवर्धित यथार्थ की दुनिया में विज्ञापन का अधिकार किसके पास होगा? ट्राइलीगल के साझेदार राहुल मैथन कहते हैं कि 'अगर इस तरह के रियलिटी गेम में कोई ऐसी सामग्री या लोगो दिखाया जाता है जो कॉपीराइट के अधीन है तो फिर कॉपीराइट विवाद भी पैदा हो सकते हैं।' भारत में डाटा संरक्षण का कोई समेकित कानून न होने से इस मामले के  ज्यादा उलझन भरा होने की आशंका जताई जा रही है। पोकेमॉन गो के निर्माताओं ने अमेरिका और यूरोप के अपने ग्राहकों के लिए ई-मेल और डाटा को साझा करने से संबंधित अलग-अलग नीतियां बनाई हैं। अमेरिका में अगर कोई उपभोक्ता गेम से बाहर जाने का फैसला नहीं करता है तो उसका ई-मेल खुद-ब-खुद पंजीकृत हो जाता है। इसी तरह इन उपभोक्ताओं को अपने डाटा स्थानांतरण से हटने का विकल्प भी मिलता है। इसके उलट यूरोपीय देशों के पोकेमॉन-प्रेमियों के लिए अपने ई-मेल और डाटा से संबंधित जानकारियों के बारे में अधिक सख्त सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं।
 
गुप्ता का कहना है कि भारत में डाटा की सुरक्षा से संबंधित कानूनों की जरूरत इससे पहले कभी महसूस नहीं की गई थी। इसी का नतीजा है कि पोकेमॉन गो पर जिस तरह की सूचनाएं साझा की जा रही हैं, उनका गलत हाथों में पडऩे पर दुरुपयोग भी किया जा सकता है। वारिस भी इस राय से सहमति व्यक्त करते हुए कहते हैं कि 'भारत में इस गेम के विधिवत लॉन्च होते ही उपभोक्ताओं को अपने डाटा की सुरक्षा के बहुत कम विकल्प ही मिलेंगे क्योंकि भारत में इसके लिए जरूरी कानून ही नहीं हैं।'पोकेमॉन गो जैसे रियलिटी गेम में जिस तरह से असली और आभासी दुनिया का मेल किया जा रहा है उससे कानूनी पेचीदगियां और भी उलझती हुई नजर आ रही हैं। 
Keyword: pokemon go, game, mobile,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सरकार की पहल से दाल मिलों की घटेगी मुश्किल?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.