बिजनेस स?टैंडर?ड - बैंकों को मिले 23 हजार करोड़ रुपये
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बैंकों को मिले 23 हजार करोड़ रुपये
दिलाशा सेठ और अनूप रॉय / नई दिल्ली/मुंबई 07 19, 2016

सरकार ने सार्वजनिक बैंकों का दबाव कम करने को किया पूंजी निवेश
बिजनेस स?टैंडर?ड बैंकों को मिले 23 हजार करोड़ रुपयेसरकार ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) सहित सार्वजनिक क्षेत्र के 13 बैंकों के लिए आज 22,915 करोड़ रुपये की पूंजी का आवंटन किया। यह रकम बजट में किए गए 25,000 करोड़ रुपये के पुनर्पूंजीकरण के प्रावधान कर करीब 92 फीसदी है। सरकार के बयान में कहा गया कि इस रकम में से सबसे ज्यादा 7,575 करोड़ रुपये एसबीआई को जारी किया गया, वहीं इंडियन ओवरसीज बैंक को 3,101 करोड़ रुपये और पंजाब नैशनल बैंक को 2,816 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। बैंकों को रकम का आवंटन पिछले पांच वर्षों में चक्रवृद्घि सालाना वृद्घि दर (सीएजीआर) के आधार पर उनकी पूंजी की जरूरतों के मुताबिक दिया गया है। देश के सरकारी बैंकों पर गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) का खासा दबाव है, वहीं बैंकों को पूंजी पर्याप्तता मानदंडों और 2018 से लागू होने वाले बेसल-3 पूंजीकरण निमयों के लिए उन्हें अतिरिक्त पूंजी की भी जरूरत है।

बेसल-3 नियमों के लिए बैंकों को 1.8 लाख करोड़ रुपये पूंजी की जरूरत है, जिनमें से सरकार इंद्रधनुष योजना के तहत चार वर्षों में 70,000 करोड़ रुपये देने का वादा किया है और शेष 1.1 लाख करोड़ रुपये बैंकों को बाजार से जुटाने को कहा गया है। उपयुक्त कवायद के तहत जुटाई गई रकम में से प्रत्येक बैंक को ऋण परिचालन और बाजार से कोष जुटाने में सक्षम बनाने के लिए बैंकों को 75 फीसदी का रकम आवंटन किया गया है। शेष रकम को बैंकों के प्रदर्शन, दक्षता और जमा एवं उधारी वृद्घि और परिचालन लागत में कमी को देखते हुए बाद में जारी की जाएगी।

हालांकि पुनर्पूंजीकरण के प्रारूप को देखें तो इसमें बैंकों के प्रदर्शन का उतना ध्यान नहीं रखा गया है। फरवरी 2015 में जब 6 बैंकों में 7,000 करोड़ रुपये डाले गए थे तब इंडियन ओवसीज बैंक को कुछ भी नहीं मिला था जबकि इस बार उसे 3100 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसी तरह यूको बैंक को भी 1,000 करोड़ रुपये जारी किए गए। वित्त वर्ष 2016 के अंत में इंडियन ओवरसीज बैंक का फंसे हुए कर्ज का सकल अनुपात 16.40 फीसदी था जबकि यूूको बैं का सकल एनपीए 15.43 फीसदी था।

श्लेषकों का कहना है कि बैंकों को बचाने के लिए पूंजी का निवेश किया जा रहा है क्योंकि सरकार बुरे समय में बैंकों के पीछे खड़े रहने की प्रतिबद्घता जता रही है। फिच रेटिंग्स की घरेलू इकाई इंडिया रेटिंग्स के निदेशक (वित्तीय संस्थान) अभिषेक भट्टाचार्य ने कहा, 'पूंजी निवेश की प्रकृति एक तरह से बैंकों को राहत पैकेज देने की तरह है, जिसे बैंकों की वृद्घि के साथ जोडऩे की कोशिश करना जरूरी नहीं है।' उन्होंने कहा, 'कमजोर बैंकों को अपने एनपीए के कुछ हिस्से को वहन करने में मदद के लिए पर्याप्त पूंजी मिली है।'

एसबीआई की चेयरमैन अरुधंती भट्टाचार्य ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि यह सही समय पर उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा, 'इस तरह के पूंजी निवेश से बैंकों को उधारी बढ़ाने, अतिरिक्त कोष जुटाने और अपने बहीखातों को दुरुस्त करने में मदद मिलेगी।' बैंक ऑफ इंडिया के गैर-कार्यकारी चेयरमैन जी पद्मनाभन ने कहा कि वित्त वर्ष के अंत के बजाय दूसरी तिमाही में पूंजी मिलने से पूरे साल के लिए बैंकों को कारोबार की योजना बनाने में सहूलियत होगी।

देना बैंक के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अश्विनी कुमार ने कहा कि पूंजी निवेश से बैंकों को चालू वित्त वर्ष में विकास की योजना बनाने में मदद मिलेगी। यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक के वेंकट राम मूर्ति ने कहा कि अब बैंक चालू वित्त वर्ष में 10 फीसदी वृद्घि की योजना बनाने के लिए अच्छी स्थिति में होंगे। हालांंकि बैंक ऑफ बड़ौदा और आईडीबीआई बैंक को इस आवंटन में कोई हिस्सा नहीं मिला।

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