बिजनेस स्टैंडर्ड - हरियाणा: गुडग़ांव-मानेसर से आगे सपनीला सफर
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हरियाणा: गुडग़ांव-मानेसर से आगे सपनीला सफर
ज्योति मुकुल /  July 06, 2016

राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-8 पर दिल्ली की सीमा खत्म होने और मिलेनियम सिटी गुडगांव शुरू होने पर दोनों तरफ बड़ी-बड़ी व्यावसायिक अट्टïालिकाएं दिखती हैं लेकिन सड़क पर आगे बढऩे पर वे गायब हो जाती हैं। इस राजमार्ग पर राजीव चौक से हीरो होंडा चौक तक भारी जाम रहता है लेकिन इसके बाद स्थिति सामान्य हो जाती है और सड़क के बायीं तरफ विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के नाम साफ देखे जा सकते हैं।

 
सड़क पर औद्योगिक शहर मानेसर की दिशा बताने वाले साइनबोर्ड नजर आते हैं और थोड़ा आगे बढऩे पर बायीं ओर कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे यानी पश्चिमी पेरिफेरल रोड का नवनिर्मित मानेसर-पलवल खंड दिखता है। 136 किमी के इस एक्सप्रेसवे उन विकास परियोजनाओं का हिस्सा है जिनके लिए निवेश जुटाने के लिए हरियाणा सरकार जीतोड़ कोशिश कर रही है। राज्य सरकार गुडगांव-मानेसर पट्टïी और राष्टï्रीय राजमार्ग संख्या-1 के इतर अन्य इलाकों में औद्योगिक विकास को बढ़ाने का प्रयास कर रही है। 
 
उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रधान सचिव देवेन्दर सिंह का कहना है कि इसका मकसद राज्य के हर हिस्से में उद्योगों की स्थापना कर विकास का संतुलन कायम करना है। भाजपा सरकार द्वारा पिछले साल लाई गई हरियाणा उद्यम संवद्र्घन नीति के तहत राज्य को चार श्रेणियों विकसित, अद्र्घविकसित, पिछड़े और अति पिछड़े में बांटा गया है। पिछली कांग्रेस सरकार की औद्योगिक नीति में इसे तीन श्रेणियों में बांटा गया था। गुडगांव जिले का कोई भी ब्लॉक पिछड़ी श्रेणी में नहीं है जबकि पड़ोसी रेवाड़ी जिले के पांच में से तीन ब्लॉक खोल, जाटूसाना और नाहर अति पिछड़ी श्रेणी में हैं। भिवानी, सिरसा और जींद का कोई भी ब्लॉक औद्योगिक और आर्थिक दृष्टिï से विकसित श्रेणी में नहीं है। राज्य में कुल 83 ब्लॉक पिछड़ी और अति पिछड़ी श्रेणी में हैं। सरकार इन इलाकों में औद्योगिक इकाइयां लगाने पर प्रोत्साहन दे रही है। 
 
हालांकि औद्योगिक विभाग के एक जिला स्तरीय अधिकारी ने कहा कि इसका अभी तक कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। अधिकारी ने कहा, 'चल रहा है धक्के से। हवा सी नहीं बन रही।' राजमार्ग से दूर होने और पानी की कमी के कारण उद्योग पिछड़े इलाकों में जाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। साथ ही किसान अब अपनी जमीन का ज्यादा मुआवजा मांग रहे हैं जिससे हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम को भूमि अधिग्रहण पर पुनर्विचार करना पड़ रहा है। सिंह ने कहा कि सरकार ने आईएमटी बावल के विस्तार और रेवाड़ी में इंटिग्रेटेड मल्टी मोडल लॉजिस्टिक्स हब बनाने के लिए 3,600 एकड़ जमीन अधिग्रहीत करने की योजना छोड़ दी है। पिछली सरकार ने रेवाड़ी हब को प्रस्तावित दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारे पर स्थापित करने की योजना बनाई थी लेकिन अब इसे कहीं और विकसित किया जाएगा। 
 
औद्योगिक विकास के ऊंचे स्तर, ग्रामीणों में जागरूकता और बेहतर जीवन स्तर के कारण उद्योग जगत को अन्य राज्यों की तुलना में हरियाणा महंगा लग रहा है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय 2015-16 में अग्रिम अनुमानों के लिहाज से 1,65,204 रुपये है जो राष्टï्रीय और से 68 प्रतिशत ज्यादा है। राज्य में 6.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक के 550 प्रस्ताव हैं। निवेशकों का कहना है कि बेहतरीन सड़क संपर्क, मंजूरी के लिए एकल खिड़की व्यवस्था और मानव संसाधन की उपलब्धता हरियाणा को निवेश के लिए आकर्षक जगह बनाती हैं। लेकिन मारुति सहित कई कंपनियों में हड़ताल के कारण निवेशक आशंकित हैं। राज्य में उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी के कारण उद्योगों को प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं मिल पा रहे हैं। सिंह कहते हैं कि जाट आंदोलन और निवेशकों की आशंकाओं के बावजूद हरियाणा सरकार कारोबार को आसान बनाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, 'हम निवेशकों की सभी समस्याओं और आशंकाओं को दूर करने के लिए कृतसंकल्प हैं। हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट को मिली शानदार प्रतिक्रिया इस बात का प्रमाण है कि निवेशक राज्य में उद्योग लगाने को बेकरार हैं।'
Keyword: haryana, road transport, development,,
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