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फूड ई-टेलरों, निर्माताओं को मिलेगी मदद
अर्णव दत्ता और विवेट सुजन पिंटो / नई दिल्ली June 20, 2016

स्थानीय तौर पर निर्मित खाद्य उत्पादों के कारोबार और बिक्री में शत प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दिए जाने से ब्रांडेड रिटेलरों, खाद्य निर्माताओं ई-कॉमर्स कंपनियों को देश में अपनी कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने देश में निर्मित खाद्य उत्पादों के ऑफलाइन और ऑनलाइन कारोबार में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति प्रदान की है। इससे पहले इस सेक्टर में 51 फीसदी के विदेशी निवेश की अनुमति थी। पीएमओ की अधिसूचना में कहा गया है, 'कारोबार (ई-कॉमर्स भी शामिल) के लिए सरकार-स्वीकृत व्यवस्था के तहत अब 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है, बशर्ते कि खाद्य उत्पाद भारत में निर्मित हों।'
खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों के साथ साथ नए मानक वालमार्ट जैसी रिटेल कंपनियों के लिए देश में अपनी स्वयं की शॉप खोलने के लिए रास्ता साफ कर सकते हैं।
डाबर इंडिया के मुख्य वित्तीय अधिकारी ललित मलिक ने कहा, '100 प्रतिशत एफडीआई स्वागतयोग्य कदम है और यह उद्योग के लिए फायदेमंद होगा। इससे भारत में ई-कॉमर्स नेटवर्क में भी मदद मिलेगी।'
वर्ष 2000 और 2015 के बीच भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को एफडीआई विकल्प के तहत 45,627 करोड़ रुपये का निवेश हासिल हुआ था।
ग्रांट थॉर्नटन में पार्टनर हैरिश एचवी ने कहा, 'हालांकि खाद्य उत्पाद ई-कॉमर्स में एफडीआई की सबसे बड़ी लाभार्थी बिग बास्केट जैसी फूड ई-टेलर होंगी, लेकिन फूड कंपनियों को अब अपने स्वयं के बूते प्लेटफॅार्म तैयार करने का भरोसा पैदा हुआ है। इससे उनके प्रयासों को ताकत मिली है।'
केपीएमजी इंडिया में पार्टनर (ई-कॉमर्स) श्रीधर प्रसाद ने कहा, 'यह पहल भारत में फूड इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश के लिए विदेशी कंपनियों को आकर्षित कर सकती है और उन्हें भारत में निर्मित उत्पादों की बिक्री के लिए मंच प्रदान कर सकती है जिससे भारतीय खाद्य बाजार को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा इस कदम से मौजूदा ई-कॉमर्स कंपनियां भी उस खाद्य श्रेणी में एफडीआई आकर्षित करने में सक्षम हो सकती हैं जिसमें वे सिर्फ भारत में निर्मित उत्पाद बेच रही हों।'
बीएमआर एंड एसोसिएट्ïस में पार्टनर कल्पेश मारू ने कहा, 'यह कदम खुदरा व्यापार (मल्टी ब्रांड रिटेल के साथ साथ सिंगल ब्रांड रिटेल के लिए भी) में एफडीआई के संदर्भ में अहम है। इसके अलावा इस सेगमेंट में रिटेलिंग को पारंपरिक कारोबार के साथ साथ ई-कॉमर्स फॉर्मेट के लिए भी स्वीकार्य बनाया गया है।'
उदाहरण के लिए, हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी कंपनियां ई-कॉमर्स क्षेत्र में पहले ही कदम रख चुकी हैं और कंपनी ने पिछले साल हमाराशॉप डॉटकॉम नाम से प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इस प्लेटफॉर्म के जरिये एचयूएल ने मुंबई में कई किराना स्टोरों के साथ समझौता किया है और अपने उत्पाद सीधे तौर पर उपभोक्ताओं को मुहैया कराने के लिए परीक्षण के तौर पर इसे शुरू किया है।

Keyword: FDI, food products, walmart,
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