बिजनेस स्टैंडर्ड - इलाहाबाद कुंभ से हर किसी को मिला प्रबंधन का सबक
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इलाहाबाद कुंभ से हर किसी को मिला प्रबंधन का सबक
साहिल मक्कड़ और अर्चिस मोहन /  06 14, 2016

बिजनेस स्टैंडर्ड इलाहाबाद कुंभ से हर किसी को मिला प्रबंधन का सबक

दुनिया भर में धार्मिक जमावड़े हादसों, अव्यवस्था के लिए कुख्यात होते हैं। पर उज्जैन, इलाहाबाद और पुरी जैसे भारतीय शहरों ने बड़े धार्मिक आयोजनों को सफलतापूर्वक अंजाम देकर कायम की मिसाल

कुंभ मेला, इलाहाबाद

 

बिजनेस स्टैंडर्ड इलाहाबाद कुंभ से हर किसी को मिला प्रबंधन का सबकवर्ष 2013 के शुरुआती महीनों में इलाहाबाद का संगम क्षेत्र कुंभ मेले के विशाल आयोजन के लिए बड़े पैमाने पर तैयार किया गया था। जनवरी-फरवरी की सर्दियों में लगे विशाल महाकुंभ में करीब 90 लाख श्रद्धालु पहुंचे हुए थे जिनमें  विदेशी सैलानियों की बड़ी तादाद भी शामिल थी। इतने बड़े पैमाने पर किसी धार्मिक आयोजन का यह पूरी दुनिया में बेहद खास मौका था।  अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने अपने एक अध्ययन में तो इलाहाबाद महाकुंभ के आयोजन को ब्राजील में हुए फुटबाल विश्व कप से भी बड़ा आयोजन करार दिया है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता इस बात को लेकर अचंभे में थे कि 'कुछ महीनों के भीतर अचानक इतना बड़ा शहर कैसे जन्म ले लेता है और फिर कुछ ही दिनों में वह गायब हो जाता है।'

बिजनेस स्टैंडर्ड इलाहाबाद कुंभ से हर किसी को मिला प्रबंधन का सबककुंभ मेले के आयोजन पर रिपोर्ट को तैयार करने में 50 शोधकर्ताओं की टीम लगी थी जिसमें प्रोफेसर, छात्र और डॉक्टर भी शामिल थे। इस रिपोर्ट के मुताबिक इलाहाबाद संगम तट पर महाकुंभ मेले के सफल आयोजन से व्यवसाय प्रबंधन, सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल और शहरी नियोजन के बारे में कई सबक मिल सकते हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए भी यह एक बड़ी कामयाबी थी। कुंभ को दुर्घटना-मुक्त बनाने के लिए सरकार ने एक हजार करोड़ रुपये से भी कुछ अधिक राशि खर्च की थी। कुंभ मेले के आयोजन के लिए बनाई गई समिति की कमान अखिलेश यादव ने अपने वरिष्ठ मंत्री आजम खान को सौंपी थी।

पूरे महाकुंभ के दौरान केवल एक अप्रिय घटना हुई थी। इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में 26 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद आजम खान ने आयोजन समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था लेकिन मुख्यमंत्री ने उसे नामंजूर कर दिया। दरअसल आजम खान ने मेला तैयारी पर नजर रखने के लिए की दिनों तक इलाहाबाद में ही डेरा डाले रखा था। उनकी कोशिशों के ही चलते इंतजाम से जुड़े आठ विभागों को एक साथ जोड़ा जा सका था।

वर्ष 2013 का महाकुंभ इसके पहले 2001 और 2007 में हो चुके आयोजनों से भी बड़ा आयोजन साबित हुआ। इसमें पहले की तुलना में ज्यादा लोगों के शामिल होने के साथ ही अधिक तरह के इंतजाम भी करने पड़े थे। जैसे कि वर्ष 2001 में हुए कुंभ के लिए बनाए गए मेला क्षेत्र की तुलना में वर्ष 2013 में 500 हेक्टेयर अधिक इलाके यानी कुल 2000 हेक्टेयर इलाके में मेले के इंतजाम किए गए। गाडिय़ों की पार्किंग के लिए ज्यादा जगहों पर व्यवस्था की गई थी। पुलिस के जवानों की तैनाती में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई थी।

वर्ष 2013 का महाकुंभ अपने सफल आयोजन के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अखिलेश सरकार के लिए तारीफें बटोरने का माध्यम बना है। लेकिन इसमें कई तरह की वित्तीय गड़बडिय़ों के भी आरोप लगे। वर्ष 2014 में विधानसभा में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में इन गड़बडिय़ों की तरफ इशारा किया गया था। इसके साथ ही विभिन्न मंत्रालयों में तालमेल की कमी का आरोप भी इस रिपोर्ट में लगाया गया था।

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