बिजनेस स?टैंडर?ड - ऐसे बनेगी सूरत की स्मार्ट सूरत
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ऐसे बनेगी सूरत की स्मार्ट सूरत
विनय उमरजी / सूरत 06 12, 2016

स्मार्ट सूरत में होंगी यह सुविधाएं

पैदल चलने के लिए स्काईवॉक


मिलेगी चौबीसों घंटे जलापूर्ति
स्वचालित एलईडी स्ट्रीटलाइट
मौसम के हिसाब से जलेंगी लाइट

बिजनेस स?टैंडर?ड ऐसे बनेगी सूरत की स्मार्ट सूरतअगर आप सूरत शहर में हैं और दोपहर के वक्त मौसम पलटी मार जाए और आसमान में बदरा छा जाएं तो अपने आप चमकने वाली एलईडी स्ट्रीट लाइटें अपनी चमक से आपको हैरान कर देंगी। फिर अगर आप अपनी गति को कुछ ज्यादा ही बढ़ा दें तो आपको मालूम पडऩे से पहले ही आपके स्मार्टफोन पर संदेश आ जाएगा कि आप जरूरत से ज्यादा गति सीमा से चल रहे हैं। स्पीड डिटेक्टर्स ट्रैफिक पुलिस को भी सही जगह मुस्तैद कर देगी।

बात यहीं खत्म नहीं हो जाती, एस-कनेक्ट स्मार्ट कार्ड से हर्जाना अपने आप आपके कार्ड से भर दिया जाएगा और आपको बटुआ निकालने के लिए जेब भी हाथ नहीं डालना होगा। असल में हीरों के लिए मशहूर शहर की यह अनुमानित झलक मात्र है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की महत्त्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी परियोजना के आकार लेने के बाद यह शहर किस तरह नजर आएगा। शहर से वाकिफ लोग पहले ही नो-व्हीकल जोन की ओर मुखातिब होते जा रहे हैं, जो व्यस्त रिंग रोड के एक किनारे पर मौजूद है जो सहारा गेट और मिलेनियम मार्केट पट्टी को जोड़ती है। इसके दूसरी तरफ पैदल चलने वालों के लिए स्काई-वॉक बनाया जाएगा। वह तस्वीर मौजूदा माहौल से एकदम अलग नजर आएगी। दूसरे राज्यों और शहरों से यहां कपड़ा और हीरे खरीदने वाले कारोबारियों को अक्सर भीड़-भाड़ वाली सड़कों और व्यस्त बाजारों में सामान के चढ़ाने और उतारने की वजह से होने वाली परेशानी झेलनी पड़ती है।

शहर के मशहूर कपड़ा व्यापारियों में से एक देवकिशन मंघानी कहते हैं, 'स्मार्ट सिटी प्रस्तावों से न केवल पैदल चलने वालों को बहुत फायदा होगा बल्कि कारोबारी तबके को भी सामान को चढ़ाने और उतारने की सहूलियत मिलेगी।'

हालांकि इस परियोजना पर काम शुरू होना अभी बाकी है लेकिन सूरत पहले ही काफी पहल शुरू कर चुका है। इनमें शहर के कचरा परिशोधन संयंत्र भी शामिल हैं, जिनकी रोजाना क्षमता 4 करोड़ लीटर की है, जो आंकड़ा किसी भी भारतीय शहर के लिहाज से सबसे ऊंचा है। साथ ही 60 लाख की अपनी आबादी के 95 फीसदी आबादी हिस्से को पेयजल पहुंचाने के मामले में दूसरों से यह शहर काफी आगे है।

स्मार्ट सिटी प्रपोजल (एससीपी) के तहत 31 मार्च, 2016 को सूरत स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट लिमिटेड (एसएससीडीएल) के तौर विशेष उद्देश्य निकाय (एसपीवी) गठित किया गया। इसके लिए 51 करोड़ रुपये की शुरुआती राशि जारी की गई, जिससे शहर को स्मार्ट बनाया जाना है। इसमें वर्ष 2020 तक शहर के 326 वर्ग किलोमीटर के समूचे क्षेत्र में 24 घंटे पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य भी शामिल है, जो सुविधा फिलहाल 19 वर्ग किलोमीटर तक ही सीमित है।

शहर पहले ही सभी भारतीय शहरों में 6.5 लाख रुपये प्रति व्यक्ति आय के मामले में पूरे देश में शीर्ष पर है, यह उल्लेख करते हुए तोरावणे बताते हैं, 'सूरत के लिए स्मार्ट सिटी परियोजना का दृष्टिïकोण बेहतरीन तकनीक का उपयोग करते हुए सभी नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार के लिए बेहतरीन भौतिक अवसंरचना, सामाजिक अवसंरचना और मोबिलटी तक सभी की बराबर पहुंच सुनिश्चित कराने की संभावनाओं को भुनाना है।'

अपने प्रस्ताव के आधार पर स्मार्ट सिटी मिशन के तहत सूरत को चौथा स्थान मिला है। मिशन नियमावली के तहत इसने प्रस्ताव को दो भागों में विभाजित किया है-इसमें पहला तो समूचे शहर का विकास है और दूसरा क्षेत्र आधारित विकास। जहां समूचे शहर के विकास पर तकरीबन 795 करोड़ रुपये का खर्च आना है, वहीं क्षेत्र आधारित पुन:संयोजन विकास पर 1,802 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। इससे स्मार्ट सिटी परियोजना की कुल लागत 2,597 करोड़ रुपये आएगी।

समूचे शहर के विकास से जुड़ी सुविधाओं के तहत परिवहन, आवागमन और कनेक्टिविटी जैसी सेवाओं में सुधार लाना है। इनमें सूरत एकीकृत परिवहन-आवागमन प्रशासन केंद्र (आईटी-मैक), स्वचालित किराया संग्रह तंत्र, जीआईएस प्लेटफॉर्म के साथ ईआरपी का विकास, एस कनेक्ट कार्ड प्रबंधन तंत्र, फाइबर टू होम वाईफाई कनेक्टिविटी और एसमैक सेंटर जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।

क्षेत्र आधारित विकास परियोजनाओं में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति, स्मार्ट मीटरिंग और गुणवत्ता, एलईडी स्ट्रीट लाइट और उनमें मौसमी टाइमर, अक्षय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग, लॉजिस्टिक पार्क, इनक्युबेशन सेंटर, स्काईवॉक, स्मार्ट पार्किंग, गंदे पानी का शोधन कर पुन: उपयोग, किफायती आवास जैसी परियोजनाओं के लिए पुन: संयोजन स्मार्ट तरीके अपनाने होंगे।

एसएससीडीएल ने क्षेत्र आधारित पुन: संयोजन विकास योजनाओं के लिए सात शहर नियोजन योजनाओं (टीपी) को चिह्नित किया है। इनमें अंजना, उमरवाडा, डुंभाल, मैगब-डुंभाल, पर्वत-मैगब और डुंभाल-मैगब का नाम शामिल है। सूरत नगर निगम के शहर अभियंता जे एस शाह बताते हैं कि क्षेत्र आधारित पुन: संयोजन विकास में पुन: संयोजन शामिल होगा।

शहरी विकास मंत्रालय ने पुन: संयोजन आधारित शहरी विकास के लिए न्यूनतम 500 एकड़ क्षेत्र के लिए नियमावली तय की है। शाह ने बताया, 'इन सात टीपी योजनाओं का कुल दायरा 2,167 एकड़ का है, जिसमें सूरत की 8 फीसदी आबादी रहती है लेकिन यह शहर के जीडीपी में 18 फीसदी का योगदान करता है।'

एसएससीडीएल 25 जून को स्मार्ट सिटी सेंटर (एसएमएसी सेंटर) के नमूने को पेश करने जा रहा है। इसमें इंटेलिजेंट ट्रांजिट मैनेजमेंट सिस्टम और झुग्गी पुनर्विकास परियोजना शामिल होगी। पीपीपी आधार पर विकसित होने वाली इस परियोजना में 4,350 किफायती घर होंगे। तोरावणे ने बताया, 'हम ट्रैफिक पर नजर, स्ट्रीट लाइट तंत्र को नियंत्रित करने और एसएमएसी केंद्र से पूरे शहर की निगरानी करने में सक्षम होंगे। स्ट्रीट लाइट के लिए मौसमी टाइमर लगाए जाएंगे। स्मार्ट अपशिष्ट जल प्रबंधन तंत्र में कलेक्शन टैंक ऐसे सेंसर से लैस होंगे, जो यह बताएंगे कि इस पानी को कितना शोधित करने की जरूरत है।'

इस बीच एससीपी के तहत अक्षय ऊर्जा के उपयोग पर काम शुरू हो चुका है। तोरावणे ने बताया, 'नगर निगम की कुल 80 मेगावॉट बिजली की जरूरत का 25 फीसदी अपने संसाधनों के जरिये ही उत्पादित होता है, जिसमें सौर और पवन ऊर्जा जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों का योगदान है।' वित्तीय रूप से यह परियोजना स्मार्ट सिटी वित्तीयन के तहत केंद्र सरकार द्वारा जारी 194 करोड़ रुपये के साथ पहले से ही परवान चढ़ चुकी है और राज्य सरकार ने भी इसके लिए 101.75 करोड़ रुपये दिए हैं। हालात का हवाला देते हुए एक अधिकारी ने बताया कि इसके लिए सलाहकार नियुक्त किए जा रहे हैं और जुलाई के अंत तक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भी तैयार हो जाएंगी। जहां आईसीटी आधारित समाधानों और स्मार्ट सिटी के बुनियादी ढांचे से जुड़े पहलुओं पर गुजरात सरकार ने प्राइसवॉटरहाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) और टाटा कंसल्टेंसी इंजीनियरिंग (टीसीई) के नाम सुझाए हैं।

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