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नक्शों पर पाबंदी के खिलाफ इसरो
अलनूर पीरमोहम्मद और रघु कृष्णन / बेंगलूरु June 09, 2016

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बिना अनुमति देश के नक्शे को प्रचारित-प्रकाशित करने पर पाबंदी लगाने के प्रावधान वाले जियोस्पेशल इनफॉरमेशन रेग्युलेशन बिल पर आपत्ति जताई है। इसरो उपग्रह से तस्वीरें हासिल करता है जिसका इस्तेमाल नक्शे बनाने में होता है। इसरो के अध्यक्ष ए एस किरण कुमार ने एक साक्षात्कार में कहा, 'सूचना देने के लिए डेटा के इस्तेमाल पर रोक नहीं लगनी चाहिए। अगर आप किसी तरह की पाबंदी चाहते हैं तो आप संबंधित लोगों से बात कीजिए और पूरी जांच पड़ताल की व्यवस्था बनाइए। अन्यथा आप जो पाबंदी लगाना चाहते हैं यह सामान्य नहीं हो सकती।'
 
इसरो ने अपनी भावना से गृह मंत्रालय को अवगत करा दिया है। मंत्रालय ने जियोस्पेशल इनफॉरमेशन रेग्युलेशन बिल के मसौदे को अपनी वेबसाइट पर डाला है और जनता से इस बारे में सुझाव मांगे है। देश की अंतरिक्ष गतिविधियों पर नजर रखने वाली सर्वोच्च संस्था अंतरिक्ष आयोग के भी अध्यक्ष कुमार ने कहा कि कृषि, विरासत स्थलों के संरक्षण, शहरी योजना और सड़क निर्माण के लिए एप्लिकेशंस बनाने के वास्ते स्थानीय मैपिंग डेटा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए इसरो सरकारी विभागों और कॉलेजों के मिलकर काम कर रहा है। बिल के मसौदे पर साइबर कानून से जुड़े विशेषज्ञों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि इसमें कई खामियां हैं। इसमें यह बात साफ नहीं है कि किन परिस्थितियों में जियोस्पेशल डेटा लेने के लिए सुरक्षा एजेंसियों की अनुमति की जरूरत पड़ेगी। इस मसौदे के मुताबिक जगह की पहचान करने वाले स्मार्टफोन से तस्वीरें लेना गैरकानूनी होगा।
 
विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक देश का गलत नक्शा प्रकाशित करने पर 100 करोड़ रुपये का जुर्माना और सात साल की जेल हो सकती है। हालांकि इसमें यह बात साफ नहीं है कि अगर किसी तीसरे पक्ष से डेटा हासिल किया जाता है और कोई और इसे प्रकाशित करता है तो ऐसी स्थिति में कौन दोषी माना जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के संरक्षण का हवाला देकर ऐसा कानून बनाना चाहती है जिसका दायरा बहुत व्यापक है। अगर यह विधेयक को संसद की मंजूरी मिलती है तो गूगल, ऐपल, उबर, एयरबीएनबी और जियोस्पेशल डेटा पर निर्भर अन्य कंपनियों पर इसका असर होगा। 
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