बिजनेस स्टैंडर्ड - नौकरशाह देने में राजस्थान ने बिहार को पछाड़ा
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, July 01, 2022 04:21 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिरह खबर

नौकरशाह देने में राजस्थान ने बिहार को पछाड़ा
साहिल मक्कड़ /  06 07, 2016

बिजनेस स्टैंडर्ड नौकरशाह देने में राजस्थान ने बिहार को पछाड़ापहले ऐसी आम धारणा थी कि भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में आने वाले ज्यादातर नौकरशाह या तो उत्तर प्रदेश से होते हैं या बिहार से। लेकिन अब यह पारंपरिक धारणा बदलती नजर आ रही है। वर्ष 2015 के सिविल सेवा परिणामों में दिल्ली की टीना डाबी ने पहला और जम्मू कश्मीर के अतर आमिर उल शफी खान ने दूसरा स्थान हासिल किया है। वहीं वर्ष 2014 के परिणामों में भी चार में से तीन आईएएस अधिकारी दिल्ली से चुने गए थे। पिछले वर्ष भी टॉपर इरा सिंघल दिल्ली की हैं। वहीं दूसरा स्थान भी दिल्ली के ही एक उम्मीदवार को मिला था। वर्ष 2013 में भी दूसरे स्थान पर दिल्ली का ही कब्जा रहा था।

हर वर्ष भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और समूह ए और समूह बी की भर्तियों के लिए सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन किया जाता है। इस पूरी नौकरशाही ढांचे में आईएएस उच्च पद होता है। सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन भी दो चरणों में किया जाता है। पहले चरण में प्रारंभिक परीक्षा होती है और दूसरे चरण में मुख्य परीक्षा के बाद साक्षात्कार होता है। इस परीक्षा में जो भी उम्मीदवार सफल होते हैं उन्हें अगले वर्ष में बैच आवंटित किया जाता है। मसलन अगर कोई परीक्षार्थी 2015 में सफल होता है तो उसको वर्ष 2016 में बैच का आवंटन किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में इस परीक्षा में रिकॉर्ड 10 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। भारत का सर्वाधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश अब भी आईएएस पूल में योगदान देने वाला सबसे बड़ा राज्य है। पिछले पांच वर्षों में तकरीबन 118 सफल परीक्षार्थी उत्तर प्रदेश से हैं। हालांकि तमिलनाडु ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा है और राज्य से हर वर्ष औसतन 18 आईएएस अधिकारी निकलते हैं। वर्ष 2011 से 2015 के बीच राज्य से तकरीबन 90 अधिकारी निकले हैं।

वहीं राजस्थान ने बिहार को पीछे छोड़ दिया है और अब देश को आईएएस अधिकारी देने वाला दूसरा बड़ा राज्य बन गया है। राजस्थान का इस तरह से उभरना निश्चित ही चकित करने वाला है। 97 आईएएस पेश कर राजस्थान का स्थान उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे पायदान पर है। साक्षरता के मुद्दे पर राजस्थान बहुत पीछे है और यह देश के तीन सबसे पिछड़े राज्यों में से एक है। हालांकि राजस्थान इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं को लेकर चलाए जा रहे निजी कोचिंग संस्थानों के लिए जाना जाता रहा है। बिहार और आंध्र प्रदेश ने पिछले पांच वर्षों में क्रमश: 68 और 61 आईएएस अधिकारियों का योगदान किया है। बिहार के लिए यह कोई खास पैटर्न नहीं है लेकिन आंध्र प्रदेश से आने वाले आईएएस अधिकारियों की संख्या वर्ष 2011 के बाद से आधी हो गई है।

इस मसले पर बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा जिन आंकड़ों का अध्ययन किया गया है उनसे साफ है कि पिछले पांच वर्षों में खासकर वर्ष 2011 के बाद से ऐसे सफल उम्मीदवारों की संख्या में इजाफा हुआ है जो दिल्ली के निवासी हैं या जिनका गृहनगर दिल्ली रहा है। वर्ष 2011 के बैच में दिल्ली के 3 आईएएस अधिकारी थे, वर्ष 2012 में 4 और वर्ष 2013 में यह संंख्या 7 तक पहुंच गई।

सिविल सेवा परीक्षा के नतीजों में दो नए रुझान नजर आ रहे हैं। पहला, हर वर्ष सफल होने वाली महिला उम्मीदवारों की संख्या में बढ़ोतरी जो अब किसी बैच का एक-तिहाई हिस्सा होने लगी हैं। वहीं दूसरा, इंजीनियरिंग और मेडिकल स्नातकों की सफलता दर में आ रही गिरावट।

वर्ष 2014 और 2015 के दौरान यह संख्या क्रमश : 16 और 19 रही है। 2016 के बैच के आंकड़े फिलहाल उपलब्ध नहीं हो सके हैं। सिविल सेवा परीक्षा के लिए कोचिंग चलाने वाले चाणक्य आईएएस एकेडमी के प्रबंध निदेशक ए के मिश्रा के मुताबिक, दिल्ली के तमाम छात्र अब सिविल सेवा परीक्षा का रुख करने लगे हैं क्योंकि इनके बीच अब जागरूकता बढ़ी है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में दिल्ली के छात्रों का सफलता प्रतिशत इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि अब दिल्ली से भाग लेने वाले उम्मीदवारों की संख्या में इजाफा हुआ है, साथ ही उनके संस्थान में भी छात्रों के पंजीकरण में 20 फीसदी की वृद्धि हुई है। आज इस कोचिंग संस्थान में 10 बैच लिए जाते हैं और हर एक बैच में तकरीबन 100 छात्र होते हैं। अन्य राज्यों के मुकाबले मसलन मध्य प्रदेश, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल की तुलना में कम आबादी वाली दिल्ली की सफलता का यह आंकड़ा काफी अहमियत रखता है। अगर दिल्ली ने पिछले पांच सालों में 49 आईएएस अधिकारी दिए हैं तो वहीं यह आंकड़ा इन राज्यों के लिए क्रमश: 17, 37 और 7 रहा है। वहीं इसी अवधि में महाराष्‍ट्र ने 58, केरल ने 54 और हरियाणा ने 51 अधिकारियों का योगदान दिया है।

इस बीच सिविल सेवा परीक्षा के नतीजों में दो नए रुझान नजर आ रहे हैं। पहला, हर वर्ष सफल होने वाली महिला उम्मीदवारों की संख्या में बढ़ोतरी जो अब किसी बैच का एक-तिहाई हिस्सा होने लगी हैं। वहीं दूसरा, इंजीनियरिंग और मेडिकल स्नातकों की सफलता दर में आ रही गिरावट। वर्ष 2015 बैच के कुल 180 अधिकारियों में से 159 स्नातक थे और 15 के पास इंजीनियरिंग डिग्री थी। वहीं चार स्नातकोत्तर थे। लेकिन यह आंकड़ा वर्ष 2011 बैच के नतीजों से बिल्कुल उलट है। वर्ष 2011 में 148 आईएएस अधिकारी थे, जिनमें से 45 स्नातक थे और बाकी इंजीनियर (43), स्नातकोत्तर (44) और डॉक्टर और सीए जैसे तमाम पेशेवर (16) थे।

Keyword: rajsthan, bihar, IAS,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या मुद्रास्फीति को देखते हुए लघु बचत पर ब्याज बढ़ाना चाहिए?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.