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ओला ने थामा छोटे टैक्सी ऑपरेटरों का हाथ
अलनूर पीरमोहम्मद / बेंगलूरु June 03, 2016

मोबाइल ऐप आधारित कैब सेवा देने वाली कंपनी ओला ने अब छोटे टैक्सी ऑपरेटरों को अपने पाले में लाने के लिए एक ऐसा ऐप लॉन्च किया है जिसके जरिये ऑपरेटर अपनी हरेक टैक्सी की लोकेशन और उसके फेरों पर नजर रख सकेंगे। ओला के वरिष्ठ निदेशक (उत्पाद) सुमित टुटेजा ने आज यहां जारी बयान में नए ऐप की लॉन्चिंग की जानकारी दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस ऐप से टैक्सी ऑपरेटरों को अपना कारोबार संभालने में सहूलियत होगी। टुटेजा ने कहा, 'कई हजार टैक्सी ऑपरेटरों ने जब हमारे साथ काम शुरु किया था तो उनके पास केवल एक कार ही थी, लेकिन अब ïउनका कारोबार बड़ा हो चुका है। ऐसी स्थिति में उन्हें कारोबार को बढ़ाने के लिए नई तकनीक की मदद की दरकार है।'

 
ओला ने फिलहाल यह सेवा मुंबई के टैक्सी ऑपरेटरों के लिए शुरु की है। कंपनी का दावा है कि इस ऐप की मदद से ऑपरेटर यह जान सकेंगे कि उनके बेड़े में शामिल टैक्सियां दिन भर में कहां-कहां जा रही हैं और उनके ड्राइवर कितने समय तक सक्रिय रहते हैं? इससे ऑपरेटरों को दिन भर की कमाई का ब्योरा रखने में भी आसानी होगी। ओला ने उम्मीद जताई है कि नई सेवा शुरू होने से उसके साथ कई हजार नए ऑपरेटर भी जुड़ जाएंगे। फिलहाल ओला के बेड़े में करीब 3.5 लाख कारें शामिल हैं। 
 
दरअसल अमेरिकी कैब कंपनी उबर की तरफ से मिल रही कड़ी टक्कर से पार पाने के लिए ओला ने छोटे टैक्सी ऑपरेटरों को अपने साथ जोडऩे की योजना बनाई है। यह अलग बात है कि वर्ष 2008 में ओला ने जब भारत में अपना कारोबार शुरु किया था तो सबसे ज्यादा इन्हीं ऑपरेटरों को उठाना पड़ा था। ओला के सुविधाजनक और किफायती बिजनेस मॉडल से टैक्सी ऑपरेटरों के धंधे को काफी नुकसान पहुंचा था।लेकिन मौजूदा दौर में हालात बदल चुके हैं। ओला का भले ही ऐप आधारित कैब सेवा का कारोबार के 60 फीसदी से अधिक हिस्से पर कब्जा बना हुआ है लेकिन उसे उबर की तरफ से लगातार चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। उबर ने वर्ष 2013 में भारत में अपनी कैब सेवा शुरु की थी और तीन साल में ही 35 से लेकर 40 फीसदी बाजार पर अपना कब्जा जमा लिया है। 
 
उबर ने तो सऊदी अरब में जुटाए गए 3.5 अरब डॉलर के भारी भरकम फंड के एक बड़े हिस्से का इस्तेमाल भारतीय बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए भी करने का ऐलान किया है। वैसे कंसल्टेंसी फर्म रेडसीअर के मुताबिक बुकिंग कीमतों के आधार पर ओला का बाजार मूल्य भी 1.2 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। उबर की तरफ से पेश क ी जा रही कारोबारी चुनौतियों के मद्देनजर ओला भी खुद का चुस्त-दुरुस्त करने में लगी है। कारों के काफिले में बढ़ोतरी के जरिये वह अपने प्रतिद्वंद्वी पर बढ़त हासिल करना चाहती है। दरअसल ज्यादा कारों की मौजूदगी से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच बनाई जा सकती है।  
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