बिजनेस स्टैंडर्ड - आयातकों को राहत की तैयारी
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आयातकों को राहत की तैयारी
दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 05 22, 2016

 

एकल खिड़की मंजूरी में आयातकों को भी शामिल करने पर विचार कर रहा केंद्र

डिजिटल की ओर बढ़े कदम
► 1 अप्रैल को सरकार ने एकल प्रणाली व्यवस्था शुरू की है इसमें रोजाना आते हैं 17,000 बिल
लाइसेंस की भौतिक प्रतियों को पेश करने की जरूरत को खत्म करने पर काम कर रही है सरकार
इससे आयातकों के खर्च और समय में अच्छी-खासी कमी आने की है संभावना

बिजनेस स्टैंडर्ड आयातकों को राहत की तैयारी केंद्र सरकार एकल खिड़की मंजूरी व्यवस्था में आयातकोंं को भी शामिल करने पर विचार कर रही है। यह योजना 1 अप्रैल को शुरू की गई थी। ऐसा करने पर आयातकों के खर्च और समय में अच्छी खासी कमी आ सकती है, जो कारोबार की राह आसान करने में मददगार होगी। भारत आने वाले आयातित माल के लिए प्रक्रिया आसान बनाने के मकसद से सरकार अब आयातकों को सुविधा देने जा रही है कि वह अपने आयात के कागजात वाले लाइसेंस अपने डिजिटल हस्ताक्षर के साथ ऑनलाइन प्रस्तुत कर दें। इससे आयातकों को बार बार अधिकारियों को मूल दस्तावेज के नियम या आयात लाइसेंस की भौतिक प्रति दिखाने का झंझट खत्म हो जाएगा।

एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि अगला कदम मौजूदा लाइसेंस की भौतिक प्रतियों की जरूरत कम करने का होगा। अभी आयातकों को हर बार ऐसा करना पड़ता है। लेकिन अगले 2 महीने में इसे भी ऑनलाइन कर दिया जाएगा। आयात की सुविधा के लिए उठाए गए इस कदम से बड़ी मात्रा में होने वाले आयात को मदद मिलेगी जिससे आयात से जुड़े आर्थिक विकास और विनिर्माण को फायदा होगा।

इस समय एक बिल की एन्ट्री के लिए औसतन 3 दस्तावेज की जरूरत होती है। एक आयातक को अधिकारियों से मंजूरी के लिए अपने कागजात की भौतिक प्रति देनी होती है। नई व्यवस्था के तहत आयातक अपने दस्तावेज डिजिटल हस्ताक्षर के साथ अपलोड कर सके गा। एक अधिकारी ने कहा, 'एक बार अपलोड करने के बाद बार बार कागजात देने की जरूरत नहीं होगी। इससे दखल भी न्यूनतम हो जाएगा।'

जिन दस्तावेजों की जरूरत होती है, उनमें सामान के विवरण के साथ कैटलॉग और उनके वैज्ञानिक ब्योरे आदि शामिल होते हैं। सरकार अपने सर्वर और प्रॉसेस करने की क्षमता में भी इजाफा कर रही है जिससे कि बड़ी संख्या में दस्तावेज को आसानी से अपलोड किया जा सके। विश्व बैंक की कारोबार की राह आसान करने की रिपोर्ट में भारत अभी 133वें स्थान पर है। भारत में आयातकों को दस्तावेजी जरूरत पूरी करने पर औसतन 695 डॉलर की लागत आती है जबकि ओईसीडी देशों में यह लागत 148 डॉलर है।

सरकार ने 1 अप्रैल को एकल प्रणाली व्यवस्था शुरू की है, इसमें रोजाना 17,000 बिल आते हैं। अधिकारी ने कहा कि अब आयातकों को अपनी खेप के बारे में घोषणा करते समय दूसरी विभिन्न एजेंसियों के पास जाने की जरूरत नहीं है। ये ऑटोमेटिक तरीके से विभिन्न एजेंसियों के पास जाते हैं। इसकी शुरुआत से लेकर अब तक 3 लाख से ज्यादा बिलों की एन्ट्री आ चुकी है।

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