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जलाशयों की सफाई से सरकार की होगी कमाई
सुशील मिश्र / मुंबई May 20, 2016

भीषण सूखे से जूझ रहे महाराष्ट्र में हालात अब खराब हो चुके हैं। बांधों में दो फीसदी से भी कम पानी बचा है। सूखे की चुनौती का सामना कर रही सरकार दर्जनों योजनाएं तैयार कर इन योजनाओं पर पैसों की कमी नहीं आने की बात कह रही है। लेकिन महाराष्ट्र सरकार एक ऐसी योजना लेकर आई है जिससे जल भंडारण क्षमता बढ़ेगी। इस योजना में सरकार का एक रुपये नहीं लगेगा बल्कि सरकारी खजाने में 300 करोड़ रुपये जमा भी हो जाएगा। 
 
पिछले चार वर्षों से लगातार पड़ रहे सूखे से राज्य में जलसंकट विकराल रूप ले चुका है। जलाशयों में पीने लायक पानी नाम मात्र के लिए बचा है। जो पानी बचा है वह गाद (कीचड़) में फंस हुआ है। दरअसल जिन जलाशयों में जल भंडारण किया जाता है उसकी तलहटी को साफ करना सरकार के लिए चुनौती रही है। इसलिए सरकार इन तालाबोंं की सफाई नहीं करा पाती है। इससे हर वर्ष इन तालाबों की जल भंडारण क्षमता भी कम होती जा रही है। 
 
सरकार इन तालाबों की सफाई कराने का एक अनोखा तरीका निकाला है। सरकार तालाबों के तलहटी में जमा कीचड़ (माड और रेत) को बेचने की योजना लेकर आई है। सरकार के इस योजना में ठेकेदारों ने दिलचस्पी भी दिखाई है। इसे देखते हुए सरकार पांच जलाशयों की सफाई की निविदा निकालने की तैयारी में जुट गई है। महाराष्ट्र के जल संपदा मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि जलाशयों में महज दो फीसदी पानी बचा है। आने वाले वर्षों में इस चुनौती से निपटने के लिए जल भंडारण क्षमता बढ़ानी होगी। इसके लिए नए जलाशय बनाए जाएं या पुराने जलाशयों की क्षमता बढ़ाई जाए। ऐसे में उन तालाबों को चिह्नित किया गया जिसमें निजी ठेकेदार काम करने को तैयार थे। उन्होंने कहा कि यह ऐसे तालाब हैं जिनकी तलहटी में रेत (बालू) की मात्रा अधिक है। इन तालाबों के लिए बोली लगाई जाएगी और जो ज्यादा बोली लगाएंगा तालाब सफाई के लिए उसको दिया जाएगा। 
 
जायकवाड़ी, उजनी, हतनारे, गोडनदी, चिजनी और गोसीखुर्द जलाशयों की सफाई सरकार के लिए फायदा का सौदा साबित होने वाला है। महाजन कहते हैं राज्य में रेत की मांग बहुत है इसलिए इस योजना को लपकने के लिए कारोबारी तैयार हैं। फिलहाल 5 बांधों की सफाई की बात अंतिम चरण में है। इससे सरकार को कम से कम 300 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। इनमें से करीब 500 से 1000 टन रेत निकलेगी जिसे ठेकेदार बेचकर फायदा कमाएंगे। इसके अलावा लाखों टन गाद निकलेगी जिसको भी बेचा जा सकेगा। यह गाद काफी ऊपजाऊ होती है जिसका उपयोग खेती में खाद वाली मिट्टी की तरह खेतों में की जाती है। जलसंपदा मंत्रालय की मानी जाए तो अगले महीने तक निविदा का काम हो जाएगा और बरसात के बाद इनके तलहटी से रेत और माड निकालने का काम शुरू हो जाएगा। इससे पानी खराब नहीं होगा क्योंकि नदियों से जिस तरह रेत निकाली जाती है ठीक उसी तरह इन जलाशयों से भी रेत और गाद निकाला जा सकेगा।  
Keyword: mumbai, drought, pond,,
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