बिजनेस स्टैंडर्ड - महिला हक के लिए आक्रामक अभियान
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महिला हक के लिए आक्रामक अभियान
साहिल मक्कड़ /  05 15, 2016

धार्मिक परंपराओं और पुराने रीति-रिवाजों की कट्टरता से टक्‍कर

भूमाता ब्रिगेड
► धार्मिक स्थानों में
महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध और इसे अपवित्र मानने पर उठा रही हैं सवाल
इस मुहिम की वजह से इन पर कई बार हो चुके हैं हमले 
देसाई के दल में हैं तकरीबन 6,500 सदस्य हैं जिसमें से 1,200 हैं सक्रिय सदस्य

बिजनेस स्टैंडर्ड महिला हक के लिए आक्रामक अभियानवर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं और पुराने रीति रिवाजों को आज एक महिला चुनौती दे रही है। पिछले कुछ समय से यह महिला ऐसे रीति-रिवाजों पर लगातार सवाल उठा रही है जो महिलाओं के धार्मिक स्थानों में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाते हैं और इसे अपवित्र मानते हैं। हालांकि अपनी इस मुहिम के चलते कई बार 31 वर्षीय तृप्ति देसाई पर हमले भी हुए हैं लेकिन किसी भी चुनौती ने उनका हौसला कमजोर नहीं किया।

देसाई की ईश्वर में पूर्ण आस्था है और वह कहती हैं कि उनकी लड़ाई किसी धर्म-विशेष के खिलाफ नहीं है बल्कि उनका सारा विरोध उन चंद लोगों से है जो मंदिर-मस्जिद में औरतों को पूजा-इबादत के लिए बराबरी के अधिकार देने के विरोध में हैं। महाराष्ट्र की तृप्ति अपने मराठी लहजे में कहती हैं 'लड़ाई उनसे है जो यह मानते हैं कि महिलाएं अगर भगवान को छू लेंगी तो भगवान अपवित्र हो जाएंगे। ऐसा मानते वक्त वे यह भूल जाते हैं कि उनके भगवानों को भी महिलाओं ने ही जन्म दिया है'। भारत में स्त्री-पुरुष समानता हमेशा से ही एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। हालांकि राजनीतिक दल इस मुद्दे भुनाने की कोशिश भी करते रहे हैं, लेकिन धार्मिक भावनाओं के चलते राजनीतिक दल इससे कन्नी काटते नजर आते हैं। तृप्ति के पति एक कारोबारी हैं और उनका एक सात वर्षीय बेटा भी है।

सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय काम करने से पहले तृप्ति अपनी किस्मत राजनीति में भी आजमा चुकी हैं। वर्ष 2012 मे कांग्रेस के टिकट से देसाई ने नगरपालिका चुनाव लड़ा था लेकिन इसमें वह असफल रही थी। वह कहती हैं 'आज चुनावों में लोगों की नजर सिर्फ पैसे पर होती है वे किसी का अच्छा काम नहीं देखते।'

हालांकि इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता कि तृप्ति आज एक ऐसे मुद्दे को उठाने में सफल रही है जिससे राजनेता और धार्मिक नेताओं ने किनारा कर लिया है। हालांकि उनकी कोशिशों की सराहना भी की जानी चाहिए जिसके चलते अब महिलाएं शनि शिंगनापुर और त्र्यंबकेश्वर मंदिर के गृभगृह में प्रवेश कर सकती हैं। अब तृप्ति का अगला लक्ष्य मुंबई स्थित हाजी अली की दरगाह के 'पवित्र स्थान' में प्रवेश पाना है। हालांकि गुरुवार को भूमाता ब्रिगेड के सदस्यों ने मजिस्द ट्रस्टीज को एक चेतावनी जारी कर इसे 15 दिनों के भीतर खोलने का कहा है। भूमाता ब्रिगेड की स्थापना वर्ष 2010 में तृप्ति द्वारा की गई थी।

मस्जिद के भीतर स्थित पवित्र स्थान में महिलाओं का प्रवेश वर्ष 2011 से प्रतिबंधित किया गया था। देसाई कहती है, 'मैं किसी धर्म-विशेष के खिलाफ नहीं हूं, अगर हाजी अली ट्रस्टीज, भीतर स्थित पवित्र स्थान को नहीं खोलते हैं तो हम इस अभियान को आक्रामक अंदाज से शुरू करेंगे। देसाई के इस दल में तकरीबन 6,500 सदस्य हैं जिसमें से 1,200 सक्रिय सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि किसी भी धार्मिक या राजनीतिक दल से किसी भी तरह की फंडिंग नहीं ली गई है। अब सदस्यों द्वारा भ्रष्टाचार और किसान आत्महत्या सरीखे मुद्दों को भी उठाया जाएगा।

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