बिजनेस स?टैंडर?ड - सूखा भारी, मगर खेत तालाब की कम तैयारी
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सूखा भारी, मगर खेत तालाब की कम तैयारी
संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली 05 11, 2016

बिजनेस स?टैंडर?ड सूखा भारी, मगर खेत तालाब की कम तैयारीलगातार दो साल मॉनसूनी बारिश कम होने के कारण सूखे से सबसे ज्यादा जूझ रहे दो प्रमुख राज्यों, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ने तालाब खोदने का बहुत कम लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष 2016-17 में दोनों राज्यों का कुल लक्ष्य सिर्फ 6,700 खेत तालाब बनाने का है, जो अन्य राज्यों के लक्ष्य से बहुत ही कम है। खेत तालाब मनरेगा के तहत बनाए जाने हैं। खेत तालाबों से पानी संचय में बहुत मदद मिलेगी और यह जल संरक्षण की दिशा में महत्त्वपूर्ण होगा, जिससे इन राज्यों में पानी के  संकट का दीर्घकालीन समाधान हो सकता है।

लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक पानी के भीषण संकट से जूझ रहे महाराष्ट्र ने महज 1,000 खेत तालाब बनाने का लक्ष्य रखा है। वहीं बुंदेलखंड में सूखे से जूझ रहे उत्तर प्रदेश ने 5,705 तालाब बनाने का लक्ष्य रखा है। यह संभव है कि इन राज्यों में पहले से तालाब होने की वजह से खेत तालाबों का लक्ष्य कम रखा गया हो, लेकिन राज्यों के आकार को देखते हुए यह संख्या बेहद मामूली नजर आती है।

बिजनेस स?टैंडर?ड सूखा भारी, मगर खेत तालाब की कम तैयारीकुल मिलाकर केंद्र सरकार ने मनरेगा के तहत 2016-17 में देश में कुल 8,82,326 खेत तालाब बनाने का लक्ष्य रखा है। इसमें सबसे ज्यादा आंध्र प्रदेश में बनने हैं। राज्य ने 2016-17 में 2,50,00 खेत तालाब बनाने का लक्ष्य रखा है। कर्नाटक ने 1,11,340 और झारखंड ने 1,28,132 खेत तालाब बनाने का लक्ष्य रखा है। खेत तालाबोंं का निर्माण, परंपरागत जल स्रोतों का नवीकरण और सिंचाई टैंक आदि को मनरेगा के तहत लंबे समय से अनुमति है, लेकिन तमाम इलाकों में जल संकट होने की वजह से इस काम को प्राथमिकता पर रखा गया है।

महाराष्ट्र के साथ 10 अन्य राज्य भयानक सूखे की चपेट में हैं, केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 33 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। सरकार के अनुमान के मुताबिक इसका अनाज उत्पादन पर बहुत मामूली असर पड़ेगा। 2016-17 में गेहूं का उत्पादन करीब 940.4 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के उत्पादन की तुलना में 75.1 लाख टन ज्यादा होगा। बहरहाल उद्योग संगठन एसोचैम ने कहा है कि देश के 10 से ज्यादा राज्यों में सूखे का अर्थव्यवस्था पर कम से कम 6,50,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पडऩे का अनुमान है। देश के 256 जिलों के करीब 33 करोड़ लोग इस गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं, उनको राहत देने देने में यह अतिरिक्त बोझ अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

आपदा राहत कोष बनाए केंद्र : उच्चतम न्यायालय

उच्चतम न्यायालय ने सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए आज केंद्र को आपदा राहत कोष बनाने के लिए कहा और कृषि मंत्रालय को आदेश दिया कि स्थिति का आकलन करने के लिए वह बिहार, गुजरात और हरियाणा जैसे प्रभावित राज्यों के साथ एक सप्ताह के अंदर एक बैठक करे। न्यायमूर्ति एमबी लोकुर की अगुआई वाले पीठ ने केंद्र को आदेश दिया कि वह आपदा प्रबंधन कानून के प्रावधानों का कार्यान्वयन करे और वैज्ञानिक आधारों पर सूखे की घोषणा करने के लिए एक समय सीमा तय करे। साथ ही न्यायालय ने आपदा से प्रभावित किसानों को कारगर राहत देने के लिए केंद्र को सूखा प्रबंधन नियमावली की समीक्षा करने और संकट से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय योजना बनाने के लिए भी कहा।

पीठ में न्यायमूर्ति एनवी रामना शामिल हैं। पीठ ने कहा, 'कृषि मंत्रालय को स्थिति का आकलन करने के लिए सूखा प्रभावित बिहार, गुजरात और हरियाणा के मुख्य सचिवों के साथ एक सप्ताह के अंदर एक बैठक करने का आदेश दिया जाता है।' इसके अलावा न्यायालय ने आदेश दिया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल को सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए तथा उपकरण दिए जाने चाहिए। गैर सरकारी संगठन द्वारा दाखिल जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि 12 राज्यों- उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, झारखंड, बिहार, हरियाणा और छत्तीसगढ़ के कई हिस्से सूखे से प्रभावित हैं और प्राधिकारी पर्याप्त राहत नहीं मुहैया करा रहे हैं।

Keyword: water crises, drought,,
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