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नाम-ग्राम राजनीति का अंजाम
वीनू संधू /  April 15, 2016

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टïर ने गुडग़ांव जिले के एक गांव में 10 अप्रैल को एक रैली को संबोधित करते हुए यह घोषणा की कि वह गुडग़ांव को एक 'सुपर स्मार्ट सिटी' बनाएंगे। दो दिन बाद उन्होंने जिले का नाम गुडग़ांव से गुरुग्राम कर दिया। उन्होंने महाभारत का संदर्भ देते हुए यह तर्क दिया कि गुडग़ांव दरअसल द्रोणाचार्य का गांव है जो पांडव और कौरवों के गुरु थे और इसी वजह से यह नाम महाकाव्य के साथ अपने जुड़ाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। अगर गुरुग्राम का अर्थ 'गुरु के गांव' से जुड़ा है तो गुडग़ांव भी लगभग इसी अर्थ को दर्शाता है। कई लोगों का कहना है कि अगर नाम बदलना जरूरी ही था तो गुरुगांव एक बेहतर विकल्प हो सकता था। हालांकि नाम के इस तार्किक खेल के साथ खट्टïर ने द्रोणाचार्य को फिर से चर्चा में ला दिया और रातोरात गुडग़ांव के कॉस्मोपॉलिटन चरित्र में हिंदुत्व की भावना को जोडऩे की कवायद की गई।

 
करनाल से पहली बार बने विधायक और हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पहले मुख्यमंत्री खट्टïर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पुराने सिपहसालार हैं। इत्तफाक से गुडग़ांव के सेक्टर 12-ए में मौजूद संघ कार्यालय 'माधव भवन' के पते में लंबे समय से 'गुरुग्राम' ही लिखा जाता रहा है। इस कार्यालय में लगे नीले रंग के बोर्ड में भी 'गुरुग्राम' ही लिखा गया है।
 
1 जनवरी 1954 को जन्मे खट्टïर 24 साल की उम्र में वर्ष 1977 में संघ से जुड़े। वह 1994 में भाजपा में आए। जो लोग उन्हें जानते हैं उनका कहना है कि उन्हें भले ही प्रशासनिक अनुभव कम हो लेकिन संघ की प्रकृति के लिए वह पूरी तरह से उपयुक्त हैं। संघ में उनकी आस्था इतनी गहरी है कि उन्होंने संघ प्रचारक के रूप में काम करने के लिए अविवाहित रहने का फैसला किया। संघ के पूर्व प्रचारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी निकटता अब कोई रहस्य की बात नहीं है। मोदी ने ही उन्हें हरियाणा में भाजपा की पहली सरकार का नेतृत्व करने के लिए चुना था। उनके नेतृत्व में महाराष्ट्र के बाद हरियाणा ऐसा पहला राज्य बन गया जहां गोमांस की बिक्री को गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया और इसके लिए पांच साल तक जेल की सजा का प्रावधान भी किया गया। 
 
हालांकि राज्य के पहले पंजाबी मुख्यमंत्री के लिए यह सबकुछ आसान नहीं रहा जहां जाटों का दबदबा रहा है। जाट आरक्षण को लेकर हुए हिंसक आंदोलन के प्रति जाहिर की गई प्रतिक्रिया पर मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी सबसे ज्यादा आलोचना हुई। कई लोगों को ऐसा महसूस हुआ कि राज्य में इतने बड़े संकट की स्थिति पैदा होने के बावजूद खट्टïर की प्रतिक्रिया बेहद नरम और अनिश्चित रही और वह जाट समुदाय को अपने भरोसे में लेने के लिए सामने तक नहीं आए। आखिरकार वह झुक गए और हरियाणा विधानसभा ने जाट आरक्षण विधेयक पारित कर दिया।
 
अगर उनकी इस प्रतिक्रिया को संकोची और अनिश्चित भी मानें तो कई ऐसे मौके आए जब उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए बेहद सक्रियता दिखाई। मसलन पंचायत और शहरी निकायों के चुनावों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता को अनिवार्य करते वक्त वह बेहद सख्त थे। हाल ही में वह गुडग़ांव में रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक की विभिन्न आवासीय परियोजनाओं में घर की बुकिंग कराने वालों के साथ खड़े दिखे। कंपनी आवासीय परियोजनाओं को वादे के मुताबिक समय पर देने से पीछे हट रही है, ऐसे आरोपों के बीच पहली बार खट्टïर ने गुडग़ांव शिकायत समिति की मासिक बैठक का संचालन किया और एक पैनल नियुक्त किया जो यूनिटेक की भारत और विदेश में मौजूद संपत्ति का पता लगाए। पार्टी की तरह ही खट्टïर ने भी अपने जीवन के रास्ते खुद तैयार किए। उनके पिता हरबंस लाल खट्टïर और दादा विभाजन के वक्त पाकिस्तान से रोहतक आए थे। कुछ वक्त तक उन्होंने श्रमिकों की तरह काम किया और बाद में रोहतक में अपनी एक दुकान खरीद ली। इसके बाद उन्होंने खेती लायक जमीन भी खरीदी। खट्टïर का जन्म रोहतक में ही हुआ।  एक वक्त ऐसा भी था जब खट्टïर एक डॉक्टर बनना चाहते थे और वह प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने दिल्ली आए। हालांकि बाद में उन्होंने यह विचार त्याग दिया और दिल्ली के सदर बाजार में एक कपड़े की दुकान शुरू कर दी। साथ ही साथ उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक किया और फिर आरएसएस के बारे में जाना और फिर वह संघ से जुड़ गए। बाकी तो सब इतिहास है। गुडग़ांव का नाम बदलकर गुरुग्राम करना तो उनका ताजा अध्याय है।
Keyword: haryana, manohar lal, gurgaon,,
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