बिजनेस स्टैंडर्ड - मारुति से आगे टाटा मोटर्स
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मारुति से आगे टाटा मोटर्स
अजय मोदी / नई दिल्ली April 04, 2016

आठ महीने से ज्यादा के अंतराल के बाद टाटा मोटर्स ने मारुति सुजूकी को पछाड़कर देश की सबसे मूल्यवान वाहन कंपनी का तमगा दोबारा हासिल कर लिया है। टाटा मोटर्स का बाजार पूंजीकरण सोमवार को बाजार बंद होने के बाद 1,11,546 करोड़ रुपये रहा, जबकि मारुति सुजूकी का 1,11,204 करोड़ रुपये। नवंबर 2015 में मारुति सुजूकी का मूल्यांकन टाटा मोटर्स के मुकाबले 28,000 करोड़ रुपये ज्यादा था। टाटा मोटर्स डीवीआर कंपनी के मूल्यांकन में 14,675 करोड़ रुपये और जोड़ सकती है। टाटा मोटर्स ने साल 2008 में अलग मताधिकार वाले शेयर जारी कर जगुआर लैंड रोवर की फंडिंग की थी, लेकिन इन शेयरों का मताधिकार सीमित है।
टाटा मोटर्स ने फरवरी 2016 में 52 हफ्ते के निचले स्तर को छुआ था और इस तरह से अपनी आधी कीमत गंवा दी थी। कंपनी का शेयर तब से 46 फीसदी उछला है। वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में इजाफा, रक्षा कारोबार पर ध्यान केंद्रित किए जाने, जगुआर लैंड रोवर का स्थिर परिचालन और दो साल के अंतराल के बाद नए सीईओ की नियुक्ति टाटा मोटर्स के लिए सकारात्मक रही है। वाहन कंपनी को ज्यादातर जेएलआर कंपनी के तौर पर देखा जा रहा है, न कि इसके भारतीय परिचालन के लिहाज से और चीन की चिंताएं कम होने के साथ बाजार का नजरिया एक बार फिर सकारात्मक हो गया है। दूसरी ओर मारुति चुनौती की सामना कर रहा है और इसे क्षमता में अवरोध, मुद्रा की विपरीत चाल आदि का सामना करना पड़ रहा है, ऐसे में विश्लेषक वित्त वर्ष 2017 में इसकी आय पर असर पडऩे का अनुमान जता रहे हैं। पिछले छह महीने में मारुति का शेयर 20 फीसदी टूटा है। विश्लेषकों ने मारुति की आय में वित्त वर्ष 2017 के दौरान 6-9 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया है। दूसरी ओर टाटा मोटर्स देसी कारोबार पर आक्रामकता के साथ ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी ने देसी व विदेशी बाजार में कंपनी के परिचालन का नेतृत्व करने के लिए फरवरी में नया सीईओ व प्रबंध निदेशक नियुक्त किया है। टाटा में शामिल होने से पहले यह एयरबस के  मुख्य परिचालन अधिकारी थे।
कंपनी के मध्यम व भारी वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री पिछले वित्त वर्ष में 23 फीसदी बढ़ी। वित्त वर्ष 2016 के पहले 11 महीने में जेएलआर की बिक्री 15 फीसदी बढ़कर 4,79,506 वाहन रही जबकि इसका देसी यात्री वाहन कारोबार दबाव में रहा। लक्जरी वाहन कारोबार मेंं जेएलआर की हिस्सेदारी एकीकृत राजस्व में 83 फीसदी है। चीन में जेएलआर की बिक्री पर चिंता इसके शेयर कीमतों पर मुख्य रूप से असर डाल रहा था। पिछले साल मारुति के शेयरों की रफ्तार तेज रही थी, जिसे मजबूत बिक्री व उच्च लाभप्रदता से मदद मिली। नवंबर में कंपनी का शेयर 4789 रुपये के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था।

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