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जीएसटी विधेयक पर कांग्रेस से बातचीत करेंगे : जेटली
भाषा / नई दिल्ली 03 29, 2016

►  जेटली ने कहा कि मैं उनके (कांग्रेस के) साथ सहमत हूं कि कराधान की दर तर्कसंगत होनी चाहिए
►  उन्होंने कहा कि कर की दर को नहीं लिखा जा सकता है संविधान संशोधन विधेयक में
►  वित्त मंत्री के अनुसार सभी कारोबारी संगठन चाहते हैं कि जीएसटी लागू हो क्योंकि वे चाहते हैं कि कराधान सुगम हो
लंबे समय से अटके वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक के अगले महीने शुरू हो रहे बजट सत्र के दूसरे चरण में पारित होने की उम्मीद जताते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि वह फिर से कांगे्रस से बातचीत करेंगे ताकि उसे इस विधेयक को समर्थन प्रदान करने के लिए राजी किया जा सके। उन्होंने पीटीआई-भाषा से एक बातचीत में कहा, 'यदि मुझ पर छोड़ दिया जाए तो मैं आखिरी क्षण तक कांग्रेस को मनाने का प्रयास करूंगा।' जीएसटी विधेयक पिछले साल मई में लोक सभा में पारित किया जा चुका है पर राज्य सभा में यह लंबित है जहां सत्ताधारी राजग गठबंधन का बहुमत नहीं है। कांग्रेस मौजूदा स्वरूप में इस विधेयक का विरोध रही है और चाहती है कि संविधान संशोधन विधेयक में ही जीएसटी दर की सीमा बांध दी जाए।

जेटली ने कहा, 'मैं उनके (कांग्रेस के) साथ सहमत हूं कि कराधान की दर तर्कसंगत होनी चाहिए। मैं भी इस सुझाव की भावना से सहमत हूं कि यह 18 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। मुझे इसमें कोई दिक्कत नहीं है।' उन्होंने कहा कि कर की दर को संविधान संशोधन विधेयक में नहीं लिखा जा सकता है। जेटली ने कहा, 'संविधान में कर की दर तय करने में एक ही दिक्कत है कि आपको नहीं पता कि आपात स्थिति कब आ जाए। इसलिए कांग्रेस को इस विचार की तर्कसंगतता देखनी होगी।' यह पूछने पर कि क्या सरकार फिर से कांग्रेस से बातचीत करेगी, वित्त मंत्री ने कहा, 'हम उनके साथ बार-बार चर्चा करते रहे हैं, मैं उनसे फिर से बातचीत करूंगा।' जेटली ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस और बीजद जैसे गैर राजग दलों के समर्थन को देखते हुए सरकार के पास राज्य सभा में इस विधेयक को पारित कराने के लिए आवश्यक समर्थन है। उन्होंने कहा, 'आंकड़े हमारे पक्ष में हैं लेकिन मैं इस पर आम सहमति को तरजीह दे रहा हूं क्योंकि आखिरकार राज्यों को इसे लागू करना है।'

विधेयक को बजट सत्र के पहले चरण में नहीं लाया जाना था। इसे 25 अप्रैल को शुरू हो रहे बजट सत्र के दूसरे हिस्से में लाने का विचार है। उन्होंने कहा, 'मैं जल्द से जल्द संसद में इसे पारित कराने के पक्ष में हूं।' यह पूछने पर कि कारोबारी, जो पारंपरिक रूप से भाजपा के समर्थक हैं, क्या जीएसटी के खिलाफ हैं, जेटली ने कहा कि सभी कारोबारी संगठन चाहते हैं कि जीएसटी लागू हो क्योंकि वे चाहते हैं कि कराधान सुगम हो। उन्होंने कहा, 'वे 10 अलग-अलग विभागों में नहीं भटकना चाहते और मुझे लगता है कि उनकी चिंता वाजिब है। आपके पास ऐसी कराधान प्रणाली होनी चाहिए जो सुगम हो, उसमें परेशानी न हो। किसी कारोबार को कर से बचने से कोई लाभ नहीं होता क्योंकि कर आम तौर पर ग्राहकों से वसूला जाता है। जहां तक भाजपा का सवाल है तो वह जीएसटी का एक मत से समर्थन करती है।'

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