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पिछली सरकार से विरासत में मिले मामले सुलझाए : जेटली
भाषा / सिडनी 03 29, 2016

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार धीरे-धीरे कॉरपोरेट कर को कम कर 25 प्रतिशत के वैश्विक स्तर पर ला रही है जो फिलहाल है 30 प्रतिशत
उन्‍होंने भरोसा जताया कि लंबे समय से अटके जीएसटी विधेयक को संसद में जल्द ही मिल जाएगी मंजूरी
जेटली ने कहा कि भ्रष्टाचार के लिए लोग निवेश से बचते हैं और इससे निवेश की लागत बढ़ती है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली आज कहा कि भारत सरकार ने पिछली सरकार से विरासत में मिले कराधान से जुड़े कई मामले सुलझा लिए हैं और वह धीरे-धीरे कॉरपोरेट कर को कम कर 25 प्रतिशत के वैश्विक स्तर पर ला रही है जो फिलहाल 30 प्रतिशत है। यहां एसपी जैन इंस्टीच्यूट ऑफ ग्लोबल मैनेजमेंट में आयोजित एक व्याख्यान में जेटली ने भरोसा जताया कि लंबे समय से अटके वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक को संसद में जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी। मंत्री ने कहा कि भारत ने वैश्विक स्तर पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और सरकार की कोशिश होगी कि कारोबार सुगमता और बढ़ाए, और अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करे और घरेलू निवेशकों को विदेश जाने से रोके।

उन्होंने कहा, 'एक और महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है भारत की कराधान प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना। इसलिए हम अब प्रत्यक्ष कर प्रणाली पर काम कर रहे हैं जिसके तहत हम विवाद खत्म करना चाहते हैं।' जेटली ने कहा, 'हम चाहते हैं कि लोग अपने कर विवाद निपटाएं। इसलिए इस बजट में मैंने लंबित मामलों को निपटाने के लिए विभिन्न किस्म की व्यवस्थाओं का भी प्रस्ताव किया है।'

जेटली ने कहा कि सरकार भारत में कॉरपोरेट कर की दर धीरे-धीरे उचित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाने की दिशा में काम कर रही है जिसके तहत कोई विशेषाधिकार नहीं होगा और न किसी तरह की अतिरिक्त छूट। धीरे-धीरे इन सबको खत्म कर 25 प्रतिशत के कॉरपोरेट कर के स्तर पर लाना है। बजट 2016-17 ने विवाद निपटान व्यवस्था प्रदान की है जिसके तहत कर मांग का सामना कर रही कंपनियां जो विभिन्न चरणों में अटकी हुई हैं, वे मूल तथा ब्याज या जुर्माना अदा कर इन्हें विराम दे सकती हैं। जहां तक पिछली तारीख से संशोधन के आधार पर कर मांग का सामना कर रही कंपनियों का सवाल है तो बजट में एक योजना का प्रावधान किया गया है जिसके तहत ब्याज और जुर्माने को माफ किया जा सकता है और कंपनियां सिर्फ मूल कर मांग अदा कर विवाद निपटा सकती हैं।

वस्तु एवं सेवा कर पर जेटली ने कहा कि भारत के लिए यह समान कर व्यवस्था संसद में लंबित है जिसके तहत देश को एक बड़े बाजार में परिणत किया जा सकता है और वस्तु एवं सेवाओं का हस्तांतरण इस पूरे विशाल बाजार में किया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'मुझे पक्का भरोसा है कि हम धीरे-धीरे ऐसी स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं जिसमें हम जल्द से जल्द इसे संसद में पारित कर सकें।' अप्रत्यक्ष कर सुधार से जुड़ा जीएसटी विधेयक राज्य सभा में अटका है जहां सत्ताधारी राजग का बहुमत नहीं है। कांग्रेस विधेयक में तीन बदलाव की मांग कर रही है जिनमें जीएसटी दर पर संवैधानिक सीमा तय करना शामिल है।

भारत के सामने चुनौतियों के संदर्भ में जेटली ने निजी क्षेत्र की कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बैलेंस शीट की समस्या का उल्लेख किया और कहा, 'हम बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के जरिए इसका समाधान कर रहे हैं .. उन क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है जिनसे संकट पैदा हुआ है।' उन्होंने कहा, 'वैश्विक नरमी के बावजूद हम 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर बरकरार रखने में कामयाब रहे। हमारे सभी मानक .. मसलन, चालू खाते का घाटा .. बेहद स्वीकार्य आंकड़े हैं।' जेटली ने कहा, 'मुझे भरोसा है कि यदि अर्थव्यवस्था को वैश्विक समर्थन मिलता है, मानसून बेहतर है तो ये आंकड़े आने वाले दिनों में और बेहतर होते दिखते हैं।'
उन्होंने कहा कि सरकार ने बीमा और रेलवे समेत विभिन्न क्षेत्रों को खोला है और बेकार शर्तें भी खत्म कर दी गई हैं जिनसे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश धीमा पड़ रहा था। जेटली ने कहा कि भारत परियोजना तथा पर्यावरण और एफआईपीबी मंजूरी से जुड़ी निर्णय प्रक्रिया से भ्रष्टाचार खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, 'भ्रष्टाचार के लिए लोग निवेश से बचते हैं और इससे निवेश की लागत बढ़ती है। मेरा मानना है कि यह महत्त्वपूर्ण मुद्दा (भ्रष्टाचार खत्म करना) है जिसमें भारत आगे बढ़ रहा है।'

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