बिजनेस स?टैंडर?ड - नुकसान का था अनुमान
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नुकसान का था अनुमान
शुभायन चक्रवर्ती /  March 23, 2016

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और आर्ट ऑफ लिविंग (एओएल) फाउंडेशन के बीच हुए पत्राचार से यह पता चलता है कि कानूनी और पर्यावरणीय नतीजों की जानकारी के बावजूद एओएल ने यमुना बाढ़ क्षेत्र में विश्व संस्कृति महोत्सव कराने का फैसला किया। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सामने पेश किए गए इस मामले के दौरान, पर्यावरण क्षेत्र में काम करने वाला एक गैर सरकारी संगठन 'यमुना जिए अभियान' को मिले पत्र यह दर्शाते हैं कि डीडीए ने दो बार इस इवेंट के आयोजन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। बिजनेस स्टैंडर्ड को मिले पत्र यह दर्शाते हैं कि एक पंजीकृत ट्रस्ट व्यक्ति विकास केंद्र (जिसके तहत एओएल फाउंडेशन काम करता है) और डीडीए के पूर्वी प्रशासनिक क्षेत्र के प्रभारी मुख्य इंजीनियर के कार्यालय के बीच लगातार संवाद हुआ है। इस पत्राचार के बाबत एओएल को कुछ सवाल भेजे गए थे लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला।
इन पत्रों को डीडीए की तरफ से आधिकारिक रूप से एनजीटी को दिया गया है जिसमें यह स्पष्ट है कि फाउंडेशन और डीडीए के बीच पिछले साल ही इवेंट के आयोजन की अनुमति न दिए जाने को लेकर विवाद की स्थिति बनी थी। इससे यह भी अंदाजा मिलता है कि डीडीए बार-बार इस मसले में अपनी आधिकारिक पोजीशन को बदल रहा था।
डीडीए ने पिछले साल 18 मई को लिखे अपने पत्र में लिखा था कि यह क्षेत्र यमुना के बाढ़क्षेत्र के सक्रिय दायरे में आता है और एनजीटी ने यहां सभी तरह की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि 11 जून के एक पत्र में कुछ शर्तें लगाकर इसकी इजाजत दे दी गई। ऐसा तब हुआ जब एओएल ने डीडीए से कहा कि सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध नहीं लगा है और यह ऐसा कोई निर्माण कार्य नहीं करेगा जिससे नदी में किसी भी तरह का प्रदूषण फैले।
यमुना जिए अभियान के संस्थापक मनोज मिश्रा कहते हैं कि यह एनजीटी के सामने एओएल के आधिकारिक उद्देश्य का ही विरोध करता है जहां इसने एनजीटी के सामने यह दावा किया था कि यह एक वैकल्पिक जगह चुन सकता है अगर कोई इस जगह में पारिस्थितिकी से जुड़ी चिंताओं को उठाएगा। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि पर्यावरण नुकसान और नियमों के उल्लंघन के सबूतों के बावजूद इस इवेंट को मंजूरी दी गई क्योंकि इस मसले को काफी देर से अदालत में लाया गया था।
डीडीए ने 30 नवंबर को भी एक पत्र लिखकर एओएल को ताकीद दी थी कि बाढ़क्षेत्र में इवेंट के आयोजन को मंजूरी नहीं दी जाएगी और इसने उचित शुल्क चुकाकर किसी दूसरी जगह पर आयोजन करने का सुझाव भी दिया था। आखिरकार 15 दिसंबर को एओएल को अंतिम मंजूरी मिली जब डीडीए ने कहा कि इस इवेंट के लिए उपयुक्त संस्था (इस मामले में दिल्ली के उपराज्यपाल) ने अनुमति दे दी है। यही पत्र शहरी विकास मंत्री के निजी सचिव के कार्यालय भी भेजी गई थी। इन पत्रों से यह भी अंदाजा मिलता है कि एओएल ने बार बार जमीन का इस्तेमाल करने के लिए लगाए जाने वाले शुल्क को माफ करने की गुजारिश की क्योंकि यह महोत्सव सांस्कृतिक था।
यह आयोजन 11 से 13 मार्च के बीच हुआ जिसकी पर्यावरणविदो ने आलोचना की। एनजीटी ने बाढ़ क्षेत्र की जैवविविधता को नुकसान पहुंचाने के लिए मुआवजे के तौर पर 5 करोड़ रुपये का दंडशुल्क लगाया था जिसे बाद में कम करके 25 लाख रुपये कर दिया गया और बाकी 95 फीसदी मुआवजे की रकम को तीन हफ्ते में भुगतान करने का वक्त दिया गया।

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Keyword: Delhi, world cultural festival, garbage,
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