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सागरमाला के तहत 150 से ज्यादा परियोजनाएं चिह्नित
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली March 04, 2016

राष्ट्रीय दृष्टिकोण योजना (एनपीपी) के तहत 150 से ज्यादा परियोजनाओं की पहचान की गई है। इनका विकास सागरमाला परियोजना के तहत किया जाना है। उम्मीद है कि इन परियोजनाओं में अगले 10 साल के दौरान 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश आकर्षित होगा। इन परियोजनाओं को बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, नए बंदरगाहों के विकास, बंदरगाहों तक संपर्क बढ़ाने और बंदरगाहों से जुड़ी औद्योगिक विकास गतिविधियों, तटों पर रहने वाले समुदायों के विकास के उद्देश्य से चिह्नित किया गया है। भारत का तटीय क्षेत्र करीब 7500 किलोमीटर है, जो महत्त्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर पड़ता है।
 
आधुनिकीकरण और बंदरगाहों का विकास
 
मालवाहक बेड़ों की संख्या बढ़ाने व भविष्य में विकास की जरूरतों के लिहाज से 50 परियोजनाएं छाटी गई हैं। मकसद 2025 तक बंदरगाहों की क्षमता मौजूदा सालाना 1400 टन से बढ़ाकर 2500 टन करना है। इस पर 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा। इन परियोजनाओं में मौजूदा बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाना और 5-6 नए बंदरगाह विकसित किया जाना शामिल है। इसमें ट्रांस शिपमेंट हब भी शामिल है। बड़े बंदरगाहों की क्षमता सुधारने के लिए 104 पहल भी तय की गई हैं।
 
बंदरगाहों तक संपर्क बहाल करना
 
देश के उत्पादन और खपत केंद्रों से बंदरगाहों के संपर्क को दुरुस्त करने के लिए 65 परियोजनाओं का प्रस्ताव है। इनमें 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश होगा। इस निवेश से बंरगाह संपर्क के लिए 10,000 किलोमीटर लंबा ढांचा, 12 नए माल ढुलाई एक्सप्रेसवे, कोयले की ढुलाई के लिए रेल गलियारा, कच्चे तेल व पेट्रोलियम के लिए नई पाइपलाइन बिछाना, जलमार्ग विकसित करना और नए मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स केंद्र की स्थापना शामिल है। 
 
बंदरगाहों के पास औद्योगिक विकास
 
बंदरगाहों से जुड़े औद्योगिक विकास के लिए 14 तटीय आर्थिक क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव है, जो तटवर्ती राज्यों में होंगे।  इसमें 13 बंदरगाह आधारित विनिर्माण क्षेत्र होंगे, जिसमें श्रम से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक, परिधान, चर्म उत्पाद, फर्नीचर और खाद्य प्रसंस्करण शामिल हैं। साथ ही 14 बड़े तटीय क्लस्टर बुनियादी सुविधाओं के लिए होंगे, जिनमें बिजली, रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल्स, स्टील व इस तरह के अन्य उद्योग (शिप बिल्डिंग, ऑटोमोटिव) और सीमेंट शामिल होंगे। इन क्लस्टरों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने में 1 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा और करीब 7 लाख करोड़ रुपये का औद्योगिक निवेश आकर्षित होगा। इन क्लस्टरों के बनने के बाद भारत का वाणिज्यिक निर्यात 2025 तक 110 अमेरिकी डालर तक पहुंचने की उम्मीद है। 
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