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ईपीएफ पर बजट चर्चा में रुख होगा साफ
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली March 02, 2016

कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएएफ) पर आयकर लगाने के बजट प्रस्ताव को लेकर सरकार पर बढ़ते दबाव के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि उन्होंने इस मसले को संज्ञान में लिया है। उन्होंने कहा कि संसद में बजट पर चर्चा के दौरान इस संबंध में सरकार के निर्णय का खुलासा किया जाएगा। जेटली ने लोकसभा में कहा, 'हम इस समस्या से वाकिफ हैं। बजट पर बहस के दौरान इस पर निर्णय लिया जाएगा।' इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने इस मसले पर तत्काल घोषणा किए जाने की मांग की। तृणमूल नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि बजट में ईपीएफ पर कर प्रस्ताव से देश भर में चिंता है। जेटली ने कहा, 'इस पर अब तक कुछ प्रतिक्रिया आई है। संसद में बहस के समय मैं सरकार की ओर से इसका जवाब दूंगा कि इस पर अंतिम निर्णय क्या होगा।'
 
उद्योग संघों के साथ बजट बाद संवाद में वित्त मंत्री ने कहा कि संसद को यह जानने का पहला अधिकार है कि सरकार बजट और वित्त विधेयक पर सुझावों को कैसे लेती है। कल सरकार की ओर से एक बयान आया था कि वित्त मंत्री ईपीएफ निकासी पर कुल ब्याज के 60 फीसदी पर कर को सीमित करने की मांग पर विचार करेंगे और मूलधन को इससे अलग रखा जाएगा। बजट में कहा गया है कि ईपीएफ की कुल रकम में से 40 फीसदी की निकासी पर कोई कर नहीं लगेगा। हालांकि शेष 60 फीसदी की निकासी पर कर वसूला जाएगा। लेकिन शेष 60 फीसदी को अगर एन्युटी में लगा दिया जाए और संबंधित अंशधारक को नियमित पेंशन मिले तब भी रकम की निकासी पर कोई कर नहीं लगेगा। जेटली ने कहा, 'इस पहल की मंशा राजस्व अर्जित करना नहीं है। यह इसका मुख्य मकसद नहीं है।'
 
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार इस कदम के पीछे मंशा अधिक बीमित और पेंशन वाले समाज का सृजन है। उन्होंने कहा कि ईपीएफओ के अंशधारकों की संख्या 3.7 करोड़ है। इनमें से 3 करोड़ सदस्य ऐसे हैं, जिनकी आय 15,000 रुपये या उससे कम है लेकिन इन पर कोई कर देनदारी नहीं होगी। उन्होंने कहा, 'इसका असर केवल निजी क्षेत्र के कर्मचारियों पर होगा। और इसका लक्ष्य यह है कि अगर विभिन्न प्रतिबद्घताओं को पूरा करना हो तो आप 40 फीसदी रकम निकाल सकते हैं, जिस पर कोई कर नहीं लगेगा। शेष को एन्युटी में डाल सकते हैं, जिससे नियमित तौर पर पेंशन मिल सके और ऐसा करने पर आपको कर नहीं देना होगा।' हालांकि श्रमिक संगठन वित्त मंत्री के इस रुख से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि ईपीएफ पहले से ही अपनी सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत पेंशन मुहैया करा रहा है। अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के सचिव और ईपीएफओ के ट्रस्टी डी एल सचदेव ने कहा, 'ईपीएफ से धन की निकासी पर कर प्रस्ताव को लेकर व्यापक विरोध को देखते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली अब अपने शब्दों को बदल रहे हैं। ईपीएफओ एक ऐसी योजना चला रहा है, जिसमें सभी तरह की सुविधाएं- भविष्य निधि, पेंशन और बीमा पहले से ही शामिल हैं।' राष्टï्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थित भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष बी एन राय ने भी सरकार के इस कदम का विरोध किया है।
 
ईपीएफ  कर पर भाजपा भी नहीं सहमत!
 
कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) की निकासी पर कर लगाए जाने के फैसले की वजह से आलोचनाओं से घिरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता अब सरकार से यह गुजारिश कर रहे हैं कि 2016-17 के बजट में पेश किए गए इस प्रस्ताव में संशोधन किया जाए। वित्त क्षेत्र के एक पेशेवर वैभव अग्रवाल ने महज दो दिनों में ही एक लाख हस्ताक्षर के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली से इस प्रस्ताव को वापस लेने का अनुरोध किया है। 
Keyword: EPF, economy, NPS, budget,,
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