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विभिन्न विचारधाराओं के समर्थकों में गांधी की विरासत अपनाने की होड़
अर्चिस मोहन /  January 29, 2016

शनिवार को महात्मा गांधी की 68वीं पुण्यतिथि है और यह दिन प्रतिस्पद्र्धी विचारधाराओं के लिए एक अखाड़े का केंद्र बन गया है जो राष्ट्रपिता की विरासत को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के पीएचडी छात्र रोहित वेमुला का 27वां जन्मदिन भी है जिन्होंने हाल में आत्महत्या कर ली थी। लेकिन इन कोशिशों के बीच एक अलग तरह की विरोधाभासी स्थिति खुद ब खुद उजागर हो रही है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने स्वयंसेवकों से सुबह 11 बजे महात्मा गांधी और अन्य शहीदों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखने के लिए कहा है जब पूरे देश में लोग ऐसा करेंगे। आरएसएस के प्रवक्ता ने कहा, 'हमारे स्वयंसेवक पूरे देश में साथ ही दो मिनट का मौन रखेंगे।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वरिष्ठ मंत्री भी गांधी को श्रद्धांजलि देंगे जिनकी हत्या 30 जनवरी 1948 को हिंदू महासभा के एक कार्यकर्ता नाथूराम गोडसे ने कर दी थी। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की गोवा इकाई ने मडगांव में एक सरकारी स्वामित्व वाले कन्वेंशन सेंटर में गोडसे पर आधारित एक पुस्तक 'दि स्टोरी ऑफ ऐन असैसिन' का अनावरण करने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया है। इस किताब का विमोचन सात्यकि अशोक सावरकर करेंगे जिन्हें इस कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र में नाथूराम गोडसे और स्वतंत्रता सेनानी वी डी सावरकर का प्रपौत्र बताया गया है। हालांकि भाजपा की मुख्य इकाई ने इस कार्यक्रम से दूरी बना रखी है लेकिन गोवा प्रमुख विनय दिनू तेंडुलकर ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि उन्हें इस कार्यक्रम की कोई जानकारी नहीं है। हालांकि तेंडुलकर ने कहा, 'अगर ऐसा आयोजन होता भी है तो इसमें क्या समस्या है।'
करीब 67 सिविल सोसायटी समूहों (गैर भाजपा-गैर आरएसएस) ने नई दिल्ली में 'गणतंत्र की रक्षा के लिए एक मार्च' का आयोजन करने की योजना बनाई है। इन सिविल सोसायटी समूहों में विभिन्न वर्ग के लोग मसलन वामपंथी कार्यकर्ता, एलजीबीटी समूह, ईसाई और मुस्लिम संगठन भी शामिल हैं।  'आइडिया ऑफ इंडिया कलेक्टिव' के लिए समन्वय करने वाली कार्यकर्ता शबनम हाशमी का कहना है, 'हम सभी भारत की जनता गणराज्य पर गंभीर प्रहार करने की बात को लेकर काफी चिंतित हैं।'
आयोजक चाहते हैं कि राजनीतिक दलों या नेताओं की कोई सीधी भागीदारी न हो लेकिन उन्होंने राजनीतिक दलों से संबंद्ध इकाइयों का स्वागत किया है जिसमें छात्र संगठन से लेकर श्रम संगठन शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक माकपा से संबंद्ध इकाई भी इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले सकती है लेकिन बाद में यह सूचना दी गई कि अगर कांग्रेस से संबद्ध संगठन इसमें हिस्सा लेंगे तो वे उनके साथ साझेदारी नहीं करेगी। इस मार्च में खासतौर पर वेमुला के आत्महत्या के प्रकरण को देखते हुए दलितों के खिलाफ होने वाले हमले का विरोध भी किया जाएगा।
सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल और केरल के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए माकपा ने ऐसा फैसला किया है जहां वाम दल और कांग्रेस प्रतिद्वंद्वी हैं। हालांकि भाकपा से संबंद्ध संगठन इस मार्च को समर्थन दे सकते हैं। दूसरे आयोजनों सामाजिक कार्यकर्ताओं और शैक्षिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने गुजरात के दांडी में एक पदयात्रा की योजना बनाई है ताकि भारत में 'सांस्कृतिक विविधता पर हो रहे हमले का विरोध' किया जा सके। दिल्ली में शिक्षाविद् मृदुला मुखर्जी गांधी शांति प्रतिष्ठान में 'रिकवरिंग गांधी' पर एक भाषण देंगी।
नई दिल्ली में सरकार नरेंद्र मोदी के पसंदीदा कार्यक्रम 'नमामि गंगे' पर विभिन्न साझेदारों से परामर्श के लिए एक कार्यक्रम आयोजित होगा जिसमें गंगा नदी तट के किनारे पर बसे गांवों के 1600 ग्राम प्रधान हिस्सा लेंगे। इसमें कई मुख्यमंत्री भी शिरकत करेंगे। मोदी का स्वच्छ भारत अभियान गांधीवादी दर्शन से ही प्रेरित है। योग गुरु रामदेव के करीबी सहयोगी आचार्य बालकृष्ण गंगा नदी के ऊपरी भाग में औषधीय पौधे और आजीविका पर आधारित एक सत्र को संबोधित करेंगे।
    (साथ में संजीव मुखर्जी )

Keyword: Mahatma Gandhi, rohith vemula,
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