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'भारत में आर्थिक सुधारों की दिशा सही'
भाषा/बीएस संवाददाता / दावोस January 22, 2016

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि भारत में आर्थिक सुधार सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन उन्होंने देश में अनेक पुराने बेकार के कायदे कानून बने रहने का जिक्र करते हुए कहा कि सुधार का स्तर ठीक नहीं है। राजन ने ब्लूमबर्ग टीवी को कल दिए एक साक्षात्कार में कहा, 'मैं अपनी बात को इस तरह रखता हूं कि सुधारों की दिशा सही है लेकिन उनके स्तर में गड़बड़ी है। हमारे पास गलत नियम बहुत ज्यादा है, सही नियमों की संख्या अभी बहुत कम है।' उन्होंने कहा, 'इसलिए हमें उनकी संख्या में कटौती की जरूरत है। यह एक झटके में नहीं होता, इसमें समय लगेगा। हम इसे कर रहे हैं। हम इस बात को मानते हैं कि हमारे यहां नियमन कुछ ज्यादा जरूर हंै। कारोबारियों को बेहतर माहौल की जरूरत है।'

 
राजन ने कहा, 'इसके साथ ही नए तरह का कारोबार भी आ रहा। इनसे निपटने के लिए हमें तौर तरीके तलाशने होंगे। उदाहरण के तौर पर ऑनलाइन ऋण। यदि गिरावट होती है तो हम क्या करेंगे?' राजन भारत में आर्थिक सुधारों के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे। राजन को इस बात को लेकर अफसोस है कि लोग केवल बड़े सुधारों की बात करते हैं लेकिन जिन सुधारों पर इस समय काम चल रहा है उनकी बात नहीं करते हैं।
 
राजन ने कहा, 'काफी कुछ चल रहा है, पिछले सप्ताह ही प्रधानमंत्री ने एक कार्यक्रम का उद्घाटन किया जिसका नाम 'स्टार्ट अप इंडिया' है। इसमें वास्तव में नया व्यवसाय शुरू करने के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर किया गया है। नए व्यावसाय को शुरू करने से पहले पेंशन कोष सहित उसे 10, 15, 20 विभिन्न प्राधिकरणों के पास उसे पंजीकृत कराना होता है।' रिजर्व बैंक गवर्नर ने कहा, 'आपके पास एक कर्मचारी है तो उस समय आपको पेंशन कोष की जरूरत क्यों है? इस समय विचार है कि कोई भी काम शुरू करने को आसान बनाया जाए, इसमें निरीक्षण को भी अलग किया जाए। तीन साल तक कोई भी निरीक्षक जांच नहीं करेगा। आप स्वयं ही प्रमाणित करें कि आपने क्या किया।' उन्होंने कहा, भारत में तेजी से बढ़ता निजी क्षेत्र भी है। इंटरनेट मार्केट प्लेस भी है, यह काफी बेहतर है क्योंकि भारत में सस्ती जमीन उपलब्ध नहीं है। आप जहां इच्छा हो खुदरा स्टोर कहीं भी नहीं बना सकते हैं। 
 
एक अन्य सवाल के जवाब में राजन ने कहा कि वह चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती को लेकर चिंतित नहीं हैं। 'जहां तक मात्रा में वृद्धि की बात है, चीन में डॉलर के लिहाज से काफी वृद्धि आ रही है। हालांकि, प्रतिशत में लगातार गिरावट आ रही है। ऐसी अर्थव्यवस्था जो लगातार धनी और समृद्ध हो रही है, उसकी चाल में सुस्ती आना स्वाभाविक है।' उन्होंने कहा, 'इसलिए मैं चीन की वृद्धि को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हूं।'
 
कर मुद्दों पर भारत के साथ सहयोग अच्छे स्तर पर
 
भारत के साथ मजबूत द्विपक्षीय एवं व्यापारिक रिश्तों के प्रति भरोसा जताते हुए स्विट्जरलैंड ने आज कहा कि वह कर मामलों पर भारत के साथ सहयोग कर रहा है। स्विट्जरलैंड ने कहा कि सूचनाओं के आदान प्रदान तथा संदिग्ध कालाधन मामले पर सहयोग 'एक अच्छे स्तर' पर जारी रहेगा। इसके अलावा उसने आपसी रिश्तों को और बल प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने यहां आधिकारिक यात्रा पर आमंत्रित किया है। 
 
स्विट्जरलैंड के वित्त मंत्री यूइली माउरर ने कहा, 'हम पहले ही और अधिक सहयोग करने पर सहमति बना चुके हैं। यह अच्छी तरह से चल रही है और आगे भी जारी रहना चाहिए।' माउरर ने कल रात विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की सालाना बैठक के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली से अलग से मुलाकात की। उन्होंने कहा, 'हम इस सहयोग को एक अच्छे स्तर पर जारी रखेंगे।' 
 
उन्होंने यह भी कहा कि स्विट्जरलैंड दोनों देशों के उद्योगों के बीच संबंध बढ़ाने का इच्छुक है। पिछले कुछ महीने से दोनों देश प्रशासनिक स्तर पर आपसी सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। हाल के महीनों में स्विट्जरलैंड ने एक दर्जन ऐसे भारतीयों के नामों का खुलासा किया है जिनके बारे में संदेह है कि स्विस बैंक खातों में उन्होंने बेहिसाबी धन जमा किया हुआ है। इन लोगों के बारे में भारत सरकार ने जानकारी मांगी थी। 
 
सबसे तेजी गति से वृद्घि करेगा भारत
 
संयुक्त राष्ट्र द्वारा शुक्रवार को जारी की गई विश्व आर्थिक संभावना 2016 रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2016-17 में भारत सबसे तेज गति से वृद्घि करने वाली अर्थव्यवस्था होगा। रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक भारत का औसत सकल घरेलू उत्पाद वृद्घि दर वर्ष 2016 में 7.3 फीसदी और 2017 में 7.5 फीसदी रहेगी जो वर्ष 2015 में 7.2 फीसदी रही। कैलेंडर आधार पर की गई इस गणना में दर्शाया गया चीन की वृद्घि दर इन वर्षों में 6.9 फीसदी और 6.5 फीसदी रहेगी। 
 
इस रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था की हिस्सेदारी दक्षिण एशिया की जीडीपी में करीब 70 फीसदी है। यूनाइटेड नेशंस इकनॉमिक ऐंड सोशल कमीशन फॉर एशिया ऐंड द पैसिफिक के दक्षिण एवं दक्षिण पश्चिम कार्यालय के प्रमुख नागेश कुमार ने कहा, 'बेहतर वृहद आर्थिक आधार और सुधार के साथ वैश्विक परिदृश्य में भारत एक अपवाद है।' उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक मांग में आई गिरावट, जिंसों की कीमतों में भारी कमी और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में कमजोर वृद्घि के दौर में वृद्घि दर को कायम रखने के लिहाज से महत्त्वपूर्ण प्रयास किए हैं। कुमार ने कहा कि इस वक्त देश को एक मजबूत राजकोषीय नीति की जरूरत है।
 
वैश्विक मंदी का सामना कर सकता है भारत 
 
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि भारत सुधारों को आगे बढ़ाकर और जिम्मेदारी भरी आर्थिक योजनाओं के साथ वैश्विक नरमी का सफलतापूर्वक मुकाबला कर सकता है। जेटली ने अनिश्चित वैश्विक अर्थव्यवस्था की चुनौती से निपटने के भारत के संभावित उपायों पर अपना दृष्टिïकोण रखते हुए यहां यह बात कही। उन्होंने विश्वास जताया कि चीन और अमेरिकी अर्थव्यवस्थाओं में बनी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूती को साबित करेगी। जेटली ने कहा कि वैश्विक नरमी के असर को अपने से दूर रखने के लिए भारत को ढांचागत सुधारों को मजबूती के साथ आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के सालाना बैठक में यहां पहुंचे भागीदारों तथा वैश्विक नेताओं में आर्थिक परिस्थितियों को लेकर चिंता है।  
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