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'बजट 2016 में सुधार प्रक्रिया पर रहेगा जोर'
राजेश भयानी /  January 22, 2016

देश के प्रमुख निवेश बैंक ऐक्सिस कैपिटल के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी धर्मेश ए मेहता ने राजेश भयानी के साथ बातचीत में कहा कि वैश्विक बाजारों के लिए चीन कुछ समय तक चुनौतीपूर्ण बना रहेगा, क्योंकि उसकी समस्याएं संरचनात्मक हैं, लेकिन यदि सुधारों पर सही तरह से अमल होता है तो भारत को मदद मिलेगी। उनका यह भी मानना है कि 2016-17 में कई अच्छे आईपीओ देखने को मिलेंगे। पेश हैं मुख्य अंश:

 
नए साल की शुरुआत कमजोर धारणा के साथ हुई है और ऐसे में कोष उगाही के लिए क्या संभावनाएं हैं?
 
बीमा, दूरसंचार और इन्फ्रास्ट्रक्चर वर्टिकलों से कई बड़े सौदों के होने से आप बड़ी तादाद में इक्विटी कोष उगाही दर्ज करेंगे। परिदृश्य बेहद सकारात्मक है, हालांकि इनमें से कई अप्रैल में वित्त वर्ष की शुरुआत के बाद आएंगे। 
 
वैश्विक बाजारों पर चीन का असर कब तक बना रहेगा?
 
चीन की समस्याएं संरचनात्मक हैं और इनके समाधान में लंबा समय लगेगा। इसलिए अभी इसे लेकर समस्याएं बनी रहेंगी। हालांकि भारत के लिए यह अच्छा समय है क्योंकि हम चीन को प्रभावित करने वाले कारकों से बचे हुए हैं। जिंस और तेल कीमतों में नरमी भारत के दोहरे घाटे और मुद्रास्फीति नियंत्रण के संदर्भ में अच्छी है। चीन, ब्राजील और अन्य देश कम वैश्विक मांग और जिंस कीमतों में नरमी की वजह से संकट में हैं लेकिन भारत लाभार्थी होगा। 
 
चीन की समस्याओं से धातु कंपनियों जैसे इंडेक्स दिग्गजों पर दबाव पड़ा है। बैंकों ने भी अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। आपकी टिप्पणी?
 
मेरा कहना है कि सिर्फ भारत के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए ही सूचकांकों का न देखें। इसके अलावा भी अवसर मौजूद हैं। मूल्यांकन के नजरिये से बैंकिंग पसंदीदा होना चाहिए। गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) आदि जैसी चिंताएं दूर होने की संभावना है। रिजर्व बैंक और सरकार एनपीए समस्या को दूर करने के संबंध में बढ़त हासिल की है। बैंकिंग में रिस्क टु रिवार्ड (अनुपात) काफी बेहतर है। सेंसेक्स में दिग्गज शेयर रिलायंस अन्य बड़ा लाभार्थी है। जहां फार्मा और कंज्यूमर शेयर पसंदीदा बने हुए हैं वहीं मेरा मानना है कि यह वर्ष रिलायंस, बैंकों और इन्फ्रा कंपनियों के लिए अहम होगा क्योंकि सरकार सुधार एजेंडे को बढ़ावा दे रही है। 
 
अल्पावधि में नकारात्मक धारणा को देखते हुए यह कहा जा रहा है कि निफ्टी गिरकर 7000 के स्तर पर आएगा। इस बारे में आपका क्या कहना है?
 
अल्पावधि दृष्टिïकोण व्यापारियों का नजरिया है जबकि निवेशकों को इस पर ध्यान नहीं देना चाहिए। बाजार में अल्पावधि समस्याएं लगातार बदलती रही हैं। पिछले साल बाजार अमेरिकी दरों में वृद्घि को लेकर आशंकित बना रहा, लेकिन एक बार की वृद्घि के बाद किसी ने भी इस चिंता के बारे में जिक्र नहीं किया। इसलिए अल्पावधि समस्याएं और अवसर बदल रहे हैं। भारत में भी हर कोई चाहता है कि ब्याज दरों में कटौती हो और आरबीआई द्वारा 125 आधार अंक की दर कटौती के बावजूद बाजार गिरा है। अब ध्यान सुधार और प्रशासन पर होगा जिसके परिणामस्वरूप मांग पैदा हो। सरकार को सुधार की दिशा में बढ़त बनाने की जरूरत है और हम कुछ क्षेत्रों में ऐसा देख रहे हैं।
 
क्या मूल्यांकन के नजरिये से बाजार सस्ता हो रहा है?
 
मैं कहूंगा कि भारतीय बाजार महंगा नहीं है और मौजूदा समय में यह वित्त वर्ष 2016 की आय के 16 गुना पर कारोबार कर रहा है। हालांकि यदि आप अगले साल के मूल्यांकन के नजरिये से देखते हैं और यह सोचते हैं कि सुधार प्रक्रिया आगे बढ़ेगी तो मूल्यांकन वित्त वर्ष 2017 की आय के 13.5 गुना पर सस्ता दिख रहा है। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि आय में सुधार के लिए अच्छा प्रदर्शन किए जाने की जरूरत होगी और बाजार में अच्छी कमाई की जा सकती है।
 
भारतीय शेयर बाजार की दिशा बदलने वाला अगला घटनाक्रम क्या होगा? क्या आय से इसमें बदलाव आएगा?
 
हम संकट की स्थिति में काम काम करने के लिहाज से उपयुक्त स्थिति में हैं। यह वैश्विक संकट है और विश्वास स्थानीय रूप से कम हुआ है। इसलिए सरकार वैश्विक और अन्य कारकों की वजह से पैदा हुई मंदी से मुकाबला करने के लिए कदम उठाएगी। नहीं, आय से बाजार की चाल अधिक प्रभावित नहीं होगी, लेकिन बजट इसमें अहम भूमिका निभा सकता है। दिसंबर तिमाही की आय से अधिक उम्मीदें नहीं हैं। बजट में उन संकेतों पर नजर रखे जाने की जरूरत होगी कि किस तरह से सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा और इसकी गति कैसी होगी।  
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