बिजनेस स्टैंडर्ड - 'स्वर्ण मुद्रीकरण' चमकाने की तैयारी
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'स्वर्ण मुद्रीकरण' चमकाने की तैयारी
राजेश भयानी / मुंबई January 12, 2016

इंडियन बुलियन ऐंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) दीवाली से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित स्वर्ण मुद्रीकरण योजना को बढ़ावा देने की योजना बना रही है। हालांकि इस योजना की शुरुआत अभी होनी है क्योंकि ज्यादातर बैंक, हॉलमार्किंग सेंटर और रिफाइनरी अब भी त्रिपक्षीय समझौता करने की प्रक्रिया में जुटे हुए हैं जो इस स्वर्ण जमा योजना को संचालित करने के लिए अहम होगा। उपभोक्ताओं को ऐसा महसूस हो रहा है कि सोना जमा करने की प्रक्रिया बेहद उलझाऊ है क्योंकि उन्हें पहले हॉलमार्किंग सेंटर जाना होगा जो आसानी से हर जगह उपलब्ध नहीं हैं और इसके नेटवर्क का प्रसार भी अभी देश में होना बाकी है। इसके अलावा उपभोक्ताओं के विचार से वे अपरिचित संस्थाएं हैं। 
 
आईबीजेए के अध्यक्ष मोहित कंबोज कहते हैं, 'हम चुनिंदा सदस्य ज्वैलरों के नेटवर्क का इस्तेमाल कर स्वर्ण मुद्रीकरण योजना के प्रचार-प्रसार के लिए 1,000 केंद्रों को स्थापित करने का प्रस्ताव कर रहे हैं। ये केंद्र उस सोने की शुद्धता का आकलन तुरंत करेंगे जिन्हें उपभोक्ता जीएमएस के जरिये जमा करना चाहता है। ये केंद्र ग्राहकों की स्वीकार्यता के स्तर को लेकर भी बातचीत करेंगे।' उन्होंने यह संकेत दिया कि इस प्रस्ताव पर सरकार की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। 
 
केंद्र एक प्रमाणपत्र जारी करेगा जिसके आधार पर बैंक जमा खाता खोलेगा। पूर्व निर्धारित व्यवस्था के जरिये यह केंद्र रिफाइनरी के वॉल्ट के जरिये सोना जमा करेगा। उनका मानना है कि इससे स्वर्ण मुद्रीकरण की प्रक्रिया में तेजी आएगी क्योंकि यह केंद्र ऐसे ज्वैलर्स संचालित करेंगे जो बैंक एजेंट के तौर पर भी काम करेंगे। ग्राहक सोने के गहने के मामले में ज्वैलर्स पर ज्यादा भरोसा करते हैं। जो ग्राहक सोने को जमाओं के तौर पर रखना चाहते हैं उन्हें इस बात की चिंता भी है कि उनसे यह सवाल किया जा सकता है कि उनके गहने का स्रोत क्या है। हालांकि कंबोज का कहना है कि सराफा डीलर, ज्वैलर्स और ग्राहकों को अपने लेन-देन का रिकॉर्ड जरूर रखना चाहिए। उन्होंने बताया, 'सभी सरकारी नीतियों के तहत ऑफ मार्केट लेन-देन का भी रिकॉर्ड रखने की कोशिश की जा रही है।'
 
इसी संदर्भ में उन्होंने जनवरी से गहने की खरीदारी के लिए पैन नंबर मुहैया कराने की सीमा को घटाने का पक्ष भी लिया। जनवरी से दो लाख रुपये से ज्यादा गहने की खरीदारी पर पैन नंबर देना अनिवार्य होगा। अब तक यह सीमा 5 लाख रुपये की थी। इस संशोधित नियम का विरोध सराफा कारोबार और अन्य कारोबारी संस्थाओं मसलन जेम ऐंड ज्वैलरी ट्रेड फेडरेशन (जीजेएफ) ने किया है और उन्होंने देश भर में इसके खिलाफ हड़ताल शुरू करने की धमकी दी है।
 
हालांकि शीर्ष सराफा संस्था के प्रमुख के तौर पर मोहित कंबोज का कहना है, 'कई जरूरी सेवाएं मसलन मेडिकल सेवा के लिए भी पैन संख्या का प्रावधान लागू होता है और ग्राहकों को इसे स्वीकार करना चाहिए।' सरकार का यह कदम अहम है क्योंकि अब भी काले धन का इस्तेमाल सोने की खरीदारी में किया जाता है। जो ज्वैलर्स बैंकिंग तंत्र का इस्तेमाल कर आधिकारिक आयातित सोना खरीदते हैं उन्हें बिलों को अलग करना होगा अगर कोई ग्राहक ज्यादा रकम में गहने खरीदता है और पैन जमा नहीं करता। ज्वैलर्स का एक नेटवर्क भी है जो तस्करी वाले सोने की मदद से तरक्की करते हैं और इसकी तादाद भी ज्यादा है।
 
कंबोज कहते हैं कि भारत में सोने की मांग 10 फीसदी आयात शुल्क के बावजूद कभी कम नहीं हुआ है और पैन संख्या के संशोधित नियम के बावजूद इस पर असर नहीं पड़ेगा। कंबोज कहते हैं कि बिना काले धन के अगर अर्थव्यवस्था तरक्की करती है तो यह भविष्य की पीढ़ी के लिए अच्छा है। आईबीजेए ने वित्त मंत्री से यह सिफारिश की है कि सोने के आयात शुल्क में कटौती की जाए। 
Keyword: gold, bond, IBJA,,
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