बिजनेस स?टैंडर?ड - अभी राज्य तय करेंगे कर की दर
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अभी राज्य तय करेंगे कर की दर
अभिषेक रक्षित / कोलकाता December 27, 2015

कांग्रेस की मांग के दबाव में केंद्र ने पेट्रोलियम उत्पादों को प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में रखा है, लेकिन अभी 'कुछ अवधि तक' मौजूदा कर व्यवस्था लागू करेगी। इसके बारे में जीएसटी परिषद अंतिम फैसला करेगी। पेट्रोलियम के मौजूदा कर ढांचे के मुताबिक इस काले सोने पर केंद्र सरकार जहां 32 प्रतिशत कर लगाती है, वहीं राज्य सरकारें करीब 20 प्रतिशत कर लगाती हैं। कुल मिलाकर पेट्रोलियम पर 52 प्रतिशत कर लगता है।

रविवार को भारतीय सांख्यिकी संस्थान की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में आए मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने कहा, 'संवैधानिक रूप से यह (पेट्रोलियम उत्पाद) जीएसटी का हिस्सा होगा, लेकिन कुछ निश्चित अवधि के लिए राज्यों को पेट्रोलियम उत्पादों पर कर की दरें तय करने का अधिकार होगा।' इसके पहले जीएसटी के ढांचे में कर दरोंं की खबरों के मुताबिक पेट्रोलियम और शराब को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया था। राज्यों को शराब और पेट्रोलियम से सबसे ज्यादा कर मिलता है, जिसकी वजह से राज्य सरकारें इन पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहती थीं। बहरहाल बाद में सरकार ने पेट्रोलियम को जीएसटी मॉडल के तहत लाने और शराब को इसके दायरे से बाहर रखने का फैसला किया।  उन्होंने कहा, 'जीएसटी के कई फायदे हैं, जिसमें विकास प्रमुख है। यह मेक इन इंडिया में मददगार होगा। इससे अनुपालन में सुधार होगा और यह भविष्य में कर का आधार तैयार करेगा।' यह भी माना जा रहा है कि जीएसटी लागू होने से पूंजीगत वस्तुओं की बेहतर खरीद होगी, जिससे निवेश का माहौल बनेगा। जीएसटी विधेयक को संसद के उच्च सदन से मंजूरी नहीं मिल सकी है। अब केंद्र सरकार आगामी बजट सत्र में इसे राज्य सभा में पारित कराने की कवायद में जुट गई है।

तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है भारत

एक ताजा अध्ययन के मुताबिक 2030 तक भारत, दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थवव्यवस्था बन सकता है और जी8 देशों में से फ्रांस व इटली की जगह भारत और ब्राजील ले सकते हैं। ब्रिटेन के थिंक टैंक सेंटर फार इकोनॉमिक बिजनेस ऐंड रिसर्च  की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2029 तक अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है और अमेरिका सरककर दूसरे स्थान पर और तीसरे स्थान पर भारत पहुंच सकता है। 2030 तक भारत का अनुमानित जीडीपी 10,133 अरब डॉलर, अमेरिका का 32,996 अरब डॉलर और चीन का 34,338 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। बहरहाल 2019 तक भारत राष्ट्रमंडल देशों में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, जब वह ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ देगा।  

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