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'वीजा फीस का नहीं पड़ेगा आईटी उद्योग पर असर'
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली December 18, 2015

इन्फोसिस के सह-संस्थापक और पूर्व चेयरमैन एन आर नारायणमूर्ति ने शुक्रवार को कहा कि हालांकि एच-1बी और एल-1 वीजा फीस में बढ़ोतरी का आईटी उद्योग पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन ऐसे मसलों पर विचार-विमर्श होना चाहिए और इन्हें सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि उद्योग को और कड़ी और बेहतर मेहनत करनी चाहिए ताकि अमेरिकी निगमों को उद्योग द्वारा दी जा रही सेवाओं की अहमियत महसूस हो।'नारायणमूर्ति ने कहा कि वीजा शुल्क में 4,500 डॉलर तक की बढ़ोतरी का भारतीय आईटी उद्योग की वृद्धि पर असर नहीं पड़ेगा। नई दिल्ली में दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद के साथ मुलाकात के बाद मूर्ति ने संवाददाताओं को बताया, 'मुझे नहीं लगता कि यह कोई मसला है... 2,000 या 4,000 डॉलर कोई मायने नहीं रखते। अहम चीज यह है कि आप ग्राहकों को कितना उत्कृष्ट मूल्य दे पाते हैं।Ó मूर्ति ने कहा, 'मैं एक विदेशी हूं। जहां तक अमेरिकी सरकार का संबंध है, अमेरिका के हित में जो भी सर्वोत्तम हो, इस बारे में निर्णय करना उनका अधिकार है। एक विदेशी इकाई के तौर पर भारतीय आईटी कंपनियां कठिन मेहनत कर सकती हैं और अनूठी चीजें पेश कर सकती हैं जिससे अमेरिका में ग्राहक भारतीय आईटी उद्योग द्वारा किए गए मूल्यवर्धन की अहमियत स्वीकार सकें।'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कानून को लेकर भारतीय आईटी उद्योग और पेशेवरों की चिंताओं से अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को 16 दिसंबर को अवगत कराया था। उस समय यह अमेरिकी कांग्रेस के विचाराधीन था। अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के नेताओं ने 1.1 ट्रिलियन डॉलर के व्यय बिल पर सहमति जताते हुए एच-1बी की कुछ निश्चित श्रेणियों पर 4,000 डॉलर और एल-1 वीजा पर 4,500 डॉलर का विशेष शुल्क लगाने का फैसला किया था। 
 
Keyword: Narayan Murti, IT, Visa Fees,
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