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विदेशी निवेश की रफ्तार घटी, एफपीआई मात्र तीन अरब डॉलर
भाषा / नई दिल्ली December 14, 2015

प्रतिभूति बाजारों में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों के लिए कई वर्षों से से आकर्षक रहे भारतीय शेयर बाजारों के प्रति उनका आकर्षण इस बार फीका रहा। साथ ही वर्ष 2015 में देश में शुद्ध विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) का स्तर घटकर तीन अरब डॉलर से नीचे रहा। इससे पिछले तीन साल शेयर बाजारों में औसतन हर साल 20-20 अरब डॉलर का शुरू विदेशी पोर्टफोलियो निवेश प्राप्त हुआ था। इसके उलट ऋण प्रतिभूतियों में विदेशी निवेशकों का आकर्षण बना रहा। उनमें अपेक्षाकृत ज्यादा मुनाफे के वादे किए गया और इस साल ऋण प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलिया निवेश 50,000 करोड़ रुपये (आठ अरब डॉलर से अधिक) रहा।
भारतीय शेयरों में विदेशी निवेश के लिहाज से 2011 के बाद यह साल सबसे फीका रहा। वर्ष 2011 में विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयरों से शुद्ध रूप से 2,714 करोड़ रुपये की निकासी की थी। पर इस बार वे अब तक कुल मिला कर श्ुाद्ध लिवाल बने हुए है, भले ही इसका स्तर कम हुआ है। साल खत्म होने में अभी कुछ दिन बाकी हैं पर मौजूदा रुझान से लगता है कि एफपीआई प्रवाह लगातार चौथे साल सकारात्मक बना रहे है। विश्लेषकों ने कहा कि वैश्विक नरमी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में बढ़ोतरी की आशंका से विदेशी निवेशकों ने भारत की जोखिमपूर्ण परिसंपत्तियों से निवश निकाला जबकि प्रमुख आर्थिक सुधार कार्यक्रमों में देरी से भी भारतीय बाजार का आकर्षण कुछ कम हुआ।  एक निवेश योजना परामर्श इकाई मंच 5नांस डॉट कॉम के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी दिनेश रोहिरा ने कहा 'एफपीआई दोहरी वजहों से 2015 में निकासी करते रहे हैं, इसमें एक तो बाजारों में ठहराव का दौर और दूसरे अमेरिकी डालर में तेजी के कारण विवेश का घटना।Ó इसी तरह की बात जियोजित बीएनपी पारिबा रिसर्च के प्रमुख एलेक्स मैथ्यू ने कहा 'एफपीआई निवेश में नरमी मुख्य तौर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने और कंपनियों के तिमाही नतीजे नरम रहने जैसी आशंकाओं के कारण हुआ।'
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