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ऑनलाइन लॉन्ड्री कारोबार में आएगा बड़ा बदलाव
शिवानी शिंदे नाधे /  December 06, 2015

पिछले कुछ वर्षों के दौरान ऑनलाइन लॉन्ड्री (कपड़े धुलाई) कारोबार में पिकमाईलॉन्ड्री, लॉन्ड्रीवाला, डिर्क दा धोबी, माईवॉश और लॉन्ड्री बास्केट जैसी स्टार्ट-अप उतरी हैं। यूरोमॉनिटर इंटरनैशनल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2012 में भारत में लॉन्ड्री कारोबार 17,400 करोड़ रुपये का था और यह वर्ष 2018 तक 48,900 करोड़ रुपये का कारोबार होने जा रहा है। यह कारोबार में 7,67,00 प्रतिष्ठानों में बिखरा हुआ है, जिसमें 98 फीसदी लॉन्ड्री सूक्ष्म आकार की हैं, जिनमें 10 से कम कामगार हैं। अन्य होम डिलिवरी सेवाओं से इतर लॉन्ड्री को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पिछले दो वर्षों के दौरान भारतीय स्टार्टअप ने कम संपत्ति वाले एग्रीगेटर मॉडल और प्रोसेसिंग यूनिट या संस्थागत लॉन्ड्रीज के साथ समझौते जैसे भारी निवेश वाले मॉडल का अनुभव लिया है।
हाल में मुंबई की चमक का अधिग्रहण करने वाली वॉशअप, डिर्क दा धोबी और लॉन्ड्रीवाला ने भारी संपत्ति मॉडल अपनाया है। पिकमाईलॉन्ड्री और माईवॉश ने एग्रीगेटर का मॉडल अपनाया है। ये सभी कंपनियां धुलाई एवं तह, धुलाई एवं इस्तरी करना और ड्राईक्लीनिंग जैसी सेवाएं मुहैया कराती हैं। कंपनियों का मानना है कि लॉन्ड्री खरीदना और गुणवत्ता को नियंत्रित करना बहुत अहम है। गुणवत्ता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।
वर्ष 2009 में ज्योति लैबोरेटरीज को अपनी लॉन्ड्री सेवा शृंखला बेचने वाले श्रीनिवास राव ने कहा, 'जब बात लॉन्ड्री की होती है तो विश्व के अन्य हिस्सों की तुलना में भारतीय उपभोक्ता को खुश करना ज्यादा मुश्किल है। कुछ अपने कपड़ों की तह कराना चाहते हैं, लेकिन कुछ सिलवट पसंद नहीं करते। जब बात की स्टार्च की हो तो महिलाएं निर्देश जारी करती हैं। कुल मिलाकर लॉन्ड्री सेवा आधारित कारोबार है, जिसमें गुणवत्ता अहम है और इसलिए एग्रीगेटर मॉडल में बड़ी चुनौतियां हैं।' बेंगलूरु स्थित डिर्क दा धोबी ने एक संस्थागत लॉन्ड्री सेवा प्रदाता के साथ समझौता किया है, जिसके पास 60,000 वर्ग फुट में फैली इकाई है। विप्रो के एक पूर्व कर्मचारी डिर्क लेविस और रोमिल भाकुनी द्वारा स्थापित इस कंपनी ने पांच सोसाइटियों के साथ करार किया है, जिससे उन्हें सेवा देने के लिए 3,500 फ्लैट मिल गए हैं। 
डिर्क दा धोबी रोजाना 450 से 500 कपड़े धोती है और मार्च 2016 तक यह तादाद बढ़कर 1,500 हो सकती है। लेविस ने कहा, 'एग्रीगेटर मॉडल में आपको गुणवत्ता के साथ समझौता करना होता है। हमने एग्रीगेटर मॉडल के बारे में विचार किया था, लेकिन हम इस बात को लेकर आश्वस्त हो गए कि एक बैक-ऐंड होना जरूरी है।' नोएडा स्थित लॉन्ड्रीवाला की सह-संस्थापक दिव्या अग्रवाल ने भी इसी तरह चिंताएं जताई। इस साल जनवरी में परिचालन शुरू करने वाली यह कंपनी ब्रेक ईवन (न लाभ न हानि का स्तर) पर पहुंच गई है।  लॉन्ड्रीवाला का कारोबार नोएडा और दक्षिणी दिल्ली में है और अब पहले गुडग़ांव और उसके बाद दिल्ली में विस्तार करेगी। अग्रवाल ने कहा कि लॉन्ड्रीवाला एक हाइब्रिड मॉडल अपनाती है, जिसमें यह उन बड़े लॉन्ड्री से करार कर रही है, जो संस्थानों को सेवाएं देते हैं और जिनकी अतिरिक्त क्षमता है। उन्होंने कहा, 'हम गुणवत्ता नियंत्रण के लिए इन केंद्रों पर 2 से 3 लोगों को रखेंगे।'
अग्रवाल के मुताबिक लॉन्ड्रीवाला के ग्राहकों में पहले सेवा ले चुके और फिर आने वाले ग्राहकों की तादाद करीब 40 से 45 फीसदी होती है। लॉन्ड्रीवाला का लंबी अवधि का लक्ष्य परिधान से संबंधित सभी सेवाओं का एक केंद्र बनना है।
दिल्ली स्थित एक एग्रीगेटर पिकमाईलॉन्ड्री के सह-संस्थापक गौरव अग्रवाल ने कहा कि गुणवत्ता सुनिश्चित करने की उसकी खुद की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, 'हम यह सुनिश्चित करते हैं कि उपयोग होने वाले सभी उत्पाद मानक हों। फटे कपड़े या टूटे बटन जैसे मसले तकनीक से दूर किए जा सकते हैं।' पिकमाईलॉन्ड्री एक हब-ऐंड स्पोकमॉडल अपनाती है और इसने अपनी प्रक्रियाओं को सुधारा है। इसमें परिधानों की प्रोसेसिंग से पहले और बाद में ऑर्डरों की ऑडिट होती है। अग्रवाल ने कहा, 'हमारे पास ऐसे ग्राहक हैं, जो 50 से अधिक बार ऑर्डर दे चुके हैं।' पिकमाईलॉन्ड्री गुडग़ांव की जीएचवी एक्सेलरेटर से 1 लाख डॉलर जुटा चुकी है और यह अगले चरण की फंडिंग की तैयारी कर रही है। कंपनी हर दिन 10,000 कपड़ों की धुलाई के ऑर्डरों का लक्ष्य बना रही है, जो इस समय 2,500 से 3,000 हैं। कंपनी को औसतन प्रत्येक ऑर्डर पर 30 कपड़े मिलते हैं, जो इस श्रेणी की सभी कंपनियों में सबसे अधिक हैं।
इन कंपनियों के लक्षित ग्राहक अविवाहित और नौकरी-पेशे वाले दंपती हैं, इसलिए ज्यादातर कंपनियां प्रति किलोग्राम के हिसाब से शुल्क वसूलती हैं। बेंगलूरु स्थित माईवॉश को ग्राहकों कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है। पिछले साल दिसंबर में स्थापित यह कंपनी रोजाना 4,000 से 5,000 कपड़े धोती है।

Keyword: online laundry, start-ups, cloths,
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