बिजनेस स्टैंडर्ड - क्यूआईपी की रकम 19 माह के निचले स्तर पर
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, October 30, 2020 08:14 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम बाजार खबर

क्यूआईपी की रकम 19 माह के निचले स्तर पर
दीपक कोरगांवकर और पुनीत वाधवा / नई दिल्ली/मुंबई November 26, 2015

बाजार के इस साल उच्च स्तर से खिसक कर नीचे आ जाने और सीमित दायरे में गति करने से न सिर्फ निवेशकों पर असर पड़ा है बल्कि इसकी वजह से क्वालिफाइड इंस्टीटï्यूश्नल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) मार्ग से धन जुटाने की कंपनियों की क्षमता पर भी सीधा असर पड़ा है और नवंबर में यह 19 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गया। यही वजह है कि चालू तिमाही में (अक्टूबर-दिसंबर) सिर्फ जे कुमार इन्फ्राप्रोजेक्ट्स ने क्यूआईपी मार्ग से 409 करोड़ रुपये जुटाए हैं जबकि पिछले साल की समान अवधि में 12 कंपनियों ने 3,400 करोड़ रुपये जुटाए थे। नवंबर में अब तक किसी कंपनी ने क्यूआईपी के जरिये किसी भी कंपनी ने फरवरी, 2014 से अप्रैल, 2014 की तरह ही कोई राशि नहीं जुटाई है।

इसलिए 2015 में अब तक कुल 28 फर्मों ने 17,694 करोड़ रुपये जुटाए हैं जो पिछले कैलेंडर वर्ष 2014 के मुकाबले 44 फीसदी कम है, उस वक्त 29 कंपनियों ने 31,025 करोड़ रुपये जुटाए थे। पिछले कैलेंडर वर्ष में कुल 33 कंपनियों ने 31,684 करोड़ रुपये जुटाए थे। विश्लेषकों ने इसकी वजह बाजार की अस्थिरता को बताया है जिसकी वजह से कंपनियां इस मार्ग से धन जुटाने में नाकाम रही।

मोतीलाल ओसवाल एएमसी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी आशीष सोमैय्या ने कहा, 'पिछले कुछ महीनों में बाजार की दशाएं बहुत ही बिगड़ी हैं और कई कंपनियां कम मूल्यांकन पर नकदी जुटाने से बच रही हैं। पिछले कुछ सालों के दौरान कई क्यूआईपी की मदद से कंपनियों ने अपने ऋण का बोझ कम करने की कोशिश की है। हालांकि ऐसा उचित मूल्यांकन पर किया गया है और निवेशकों ने सुधार की उम्मीद में निवेश किया लेकिन उनकी उम्मीदें पूरी नहीं हुईं।'

नकारात्मक प्रतिफल

पिछले डेढ़ महीनों में एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स में 1 फीसदी की गिरावट आई है और मार्च, 2015 में यह उच्च स्तर से करीब 12 फीसदी लुढ़क चुका है। परिणामस्वरूप वर्ष 2015 में किए गए ज्यादातर क्यूआईपी का प्रतिफल नकारात्मक रहा है, 28 क्यूआईपी में से 16 अपने ऑफर मूल्य से निचले स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम बताते हैं, 'मार्च, 2015 के अपने उच्च स्तरों से द्वितीयक बाजारों में काफी गिरावट आई है। इसके अलावा ढेरों निवेशकों को क्यूआईपी में धन गंवाना पड़ा है। इस साल क्यूआईपी असफल रहे, इसकी दो प्रमुख वजहें हैं। आगे का प्रदर्शन द्वितीयक बाजारों के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। हमें यहां से कंपनियों के लिए कम से कम 10-15 फीसदी तेजी की जरूरत है और तभी निवेशक क्यूआईपी की ओर आकर्षित होंगे औैर निवेश होगा।'

Keyword: share, market, sensex, QIP,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:

स्मार्ट इंवेस्टर

सेबी के नए आईसीए दिशा-निर्देशों की राह में क्रियान्वयन की चुनौतियां

Investmentsसूचीबद्घ डिबेंचर के धारकों को अंतर-लेनदार समझौते (आईसीए) में सक्षम बनाने

बाजार हलचल

मूल्य निर्धारण परिदृश्य में नंबर दो पर बरकरार भारती एयरटेल

रैलिस के विकास परिदृश्य पर आशान्वित हैं विश्लेषक

डॉ. रेड्डीज की तेजी बरकरार रहने के आसार

आगे पढ़े
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.