बिजनेस स्टैंडर्ड - प्राणायाम के नए कारोबारी आयाम
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प्राणायाम के नए कारोबारी आयाम
मानवी कपूर और विवेट सुजन पिंटो /  November 18, 2015

रोजमर्रा काम आने वाले उत्पादों के बाजार में पतंजलि अपनी गहरी पैठ बना रही है। पतंजलि के उत्पादों की गंगोत्री यानी उसकी उत्पादन इकाई से लेकर बाजार में उसकी सेंधमारी तक की थाह ले रही हैं मानवी कपूर और विवेट सुजन पिंटो

तकरीबन छह महीने पुरानी बात है, जब भारत के सैम वॉल्टन कहे जाने वाले किशोर बियाणी को योग गुरु और पतंजलि आयुर्वेद के सह-संस्थापक बाबा रामदेव का फोन आया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वॉल्टन वही अमेरिकी कारोबारी थे, जिन्होंने दुनिया की दिग्गज खुदरा कंपनी वॉलमार्ट की बुनियाद रखी। खैर रामदेव और बियाणी के बीच क्या बात हुई होगी, इसका अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि बातचीत के बाद अगले कुछ हफ्तों में बियाणी ने उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित पतंजलि फूड पार्क का दो मर्तबा दौरा किया।

बेहद सफल खांटी मारवाड़ी कारोबारी बियाणी वहां एफएमसीजी उत्पादों की व्यापक शृंखला की साफ सफाई के साथ आधुनिक उत्पादन और पैकिंग तकनीक को देखकर हतप्रभ रह गए। वहां बनने वाले कुछ खाद्य उत्पादों का उन्होंने जायका चखा और उसके बाद वह उन उत्पादों के मुरीद हो गए। इस कवायद का नतीजा एक कारोबारी रिश्ते के रूप में निकला, जिसके तहत बियाणी बिस्कुट, जूस, शहद, पूरक आहार, सौंदर्य प्रसाधन और इंस्टेंट नूडल्स जैसे पतंजलि के 500 से अधिक उत्पादों की खुदरा बिक्री करेंगे।

हाल फिलहाल तक इनकी बिक्री पतंजलि के बिक्री केंद्रों और कुछ बहु ब्रांड किराना केंद्रों के जरिये ही हो रही थी लेकिन अब वे बियाणी के बिग बाजार और फूड बाजार सुपरमार्केट शृंखलाओं पर भी बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। यह पतंजलि के लिए एक ऊंची छलांग होगी, जिससे उसे उम्मीद है कि उसका सालाना कारोबार वित्त वर्ष 2014-15 के 2,020 करोड़ रुपये से बढ़कर इस साल 5,000 करोड़ रुपये हो जाएगा। कंपनी कमाई पर मुनाफा भी मोटा बनाती है, वर्ष 2014-15 में उसने 316 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया था। कंपनी के जोरदार बुनियादी पहलुओं पर किसी को भी रश्क हो सकता है। इसके मजबूत आधार को देखते हुए ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में इसको लेकर सीधे शब्दों में लिखा, 'काश कि ये कंपनी सूचीबद्घ होती।'

रामदेव-बियाणी करार में एक और खास पहलू है। अतीत में मार्जिन को लेकर एफएमसीजी कंपनियों के साथ बियाणी की काफी तल्खी रही है, अब पतंजलि को अपने पाले में कर वह नए जोश के साथ उनसे मुकाबला कर सकते हैं। बड़ी एफएमसीजी कंपनियां, खासतौर से बहुराष्टï्रीय कंपनियां पतंजलि के उभार से चिंतित हैं। निजी तौर पर उन्हें यही डरा सता रहा है कि केंद्र में हितैषी सरकार से वह उनके बौद्घिक संपदा अधिकारों पर चोट पहुंचा सकती है। साथ ही भारतीय जनता पार्टी की अगुआई वाली सरकार सैन्य बलों के कैंटीन केंद्रों जैसे बड़े संस्थागत बाजारों तक इसके उत्पादों को पहुंचाने में मददगार हो सकती है।

बहुराष्टï्रीय कंपनियों को लेकर रामदेव का नजरिया कभी छिपा नहीं रहा है, इन कंपनियों को लेकर रामदेव का नजरिया कभी दोस्ताना नहीं रहा है। बियाणी के साथ अपने करार का ऐलान करने के लिए बुलाए गए संवाददाता सम्मलेन में रामदेव यह कहने से नहीं हिचके, 'हम ऐसे हालात पैदा करना चाहते हैं कि बहुराष्टï्रीय कंपनियां लाख कोशिशों के बावजूद भारत में अपने उत्पाद बेचने में सफल न रहें। हम उनकी सरदर्दी बढ़ाना चाहते हैं।' अपनी बातों में स्वदेशी की भावनाओं को भरते हुए उन्होंने कहा, 'भारतीयों को भारतीय उत्पाद इस्तेमाल करने चाहिए। हम अपनी कीमत पर बहुराष्टï्रीय कंपनियों को मुनाफा क्यों बनाने दें?' रामदेव ने बताया कि बियाणी की स्वदेशी जड़ों के चलते ही उन्होंने उस शख्स के साथ करार करना मुनासिब समझा, जिसे अक्सर भारत का 'रिटेल किंग' कहा जाता है।

भविष्य में ये दोनों सफलता की नई इबारत लिख सकते हैं। योगी और कारोबारी की यह जुगलबंदी भविष्य में सहयोग को और व्यापक बना सकती है। बियाणी कहते हैं कि दोनों मिलकर उत्पाद विकसित कर सकते हैं। बियाणी पतंजलि के फूड पार्क में फैक्टरी लगा सकते हैं। अगर उद्योग के सूत्रों पर यकीन करें तो बियाणी पतंजलि की फैक्टरियों के दायरे को हरिद्वार से बाहर फैलाने में मदद कर सकते हैं। वह अपने फूड पार्कों में फैक्टरियां स्थापित करा सकते हैं।

पतंजलि में रामदेव की हिस्सेदारी न होने के बावजूद कहा जाता है कि वह कंपनी की जरूरत के लिहाज से कोई भी भूमिका निभाने के लिए तैयार रहते हैं। चाहे उसके उत्पादों के विपणन की बात हो या उसके विज्ञापनों में नजर आना या यहां तक कि कंपनी के लिए सौदेबाजी करनी हो, रामदेव हाजिर रहते हैं। उनकी शैली नितांत निजी और संवाद के लहजे वाली है। 
दौलत और शोहरत की रामदेव पर अच्छी खासी बारिश हो चुकी है और इस समय वह बहुत मांग में हैं और वह इस रिपोर्ट के लिए टिप्पणी देने के लिए भी नहीं उपलब्ध हो पाए। मगर उनके नायब आचार्य बालकृष्ण जरूर पतंजलि योगपीठ में बातचीत करने के लिए सहमत हो गए। पतंजलि योगपीठ हरिद्वार शहर से कुछ दूरी पर ही स्थित है।

पतंजलि योगपीठ की इमारत बहुत भव्य नजर आती है। इसके रंग भी सुकून देने वाले हैं, परिसर में हरियाली की बहार है और खास तरह के फूल वहां की चमक और बढ़ाते हैं। साफ सफाई ऐसी है कि मानो ढूंढने से भी गंदगी न मिले। यहां एक अस्पताल, दवाखाना और पतंजलि के तमाम ट्रस्ट हैं। गुलाबी रंग की दीवारों और लकड़ी के फर्श वाले वातानुकूलित प्रतीक्षालय में बैठे दो लोग मरीजों से जुड़ी जानकारियों को टैबलेट पर अपलोड करने के फायदों पर बहस कर रहे हैं कि क्या मरीजों की फाइल, रेडियोलॉजी रिपोर्ट और उनके लिए लिखी दवाओं को टैबलेट पर अपलोड करने का कोई लाभ है। एक अन्य व्यक्ति उन्हें अपने मैकबुक प्रो पर एक नया सॉफ्टवेयर दिखा रहा है। यहां कोई कट्टïर या पुरातनपंथी हिंदू नहीं है।

बालकृष्ण का कार्यालय किसी कैबिनेट मंत्री के दफ्तर सरीखा नजर आता है, जहां एक कुर्सी पर अंगोछा रखा हुआ है और पूरी तरह शांति छाई हुई है। उनकी मेज, पतंजलि में उनके रुतबे का एहसास करा देती है, जहां कागजों का ढेर लगा है, जो शायद उनके दस्तखत का इंतजार कर रहे हैं। पीछे रामदेव की कलाकृतियां नजर आती हैं। उनकी मेज से लगी दीवार पर किताबों की बड़ी अलमारी है, जिसमें वे तमाम तमगे और स्मृति चिह्न सजे हुए हैं, जो इतने वर्षों में रामकृष्ण ने हासिल किए।

जहां बालकृष्ण कहते हैं कि वह पतंजलि के प्रबंध निदेशक हैं, वहीं कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक वह उसके चेयरमैन हैं। बहरहाल रामदेव के भाई राम भरत के साथ मिलकर बालकृष्ण एमएमसीजी उद्यम का दारोमदार संभालते हैं। बालकृष्ण कहते हैं कि पतंजलि किफायती दरों पर उच्च गुणवत्ता वाले बेहतरीन उत्पाद बनाती है, जो बड़े पैमाने पर विज्ञापनों के बिना ही अच्छी खासी तादाद में बिकने का दम रखते हैं। वह कहते हैं, 'कोई आपको यह कभी नहीं कहेगा कि उस साबुन का इस्तेमाल करो, जिसका उपयोग वे कर रहे हैं। मगर यह बदलाव तब नजर आएगा, जब वे पतंजलि के उत्पाद इस्तेमाल करना शुरू करते हैं। हमारे उत्पाद ही हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं।'

वह याद करते हैं कि कैसे पतंजलि योग और आयुर्वेद से जूस के कारोबार में दाखिल हुई। जब आंवला किसानों ने रामदेव से कहा कि उनके उत्पाद का बाजार में कोई खरीदार नहीं तो पतंजलि के इस कदम की शुरुआत हुई। बालकृष्ण ने बताया, 'उनकी बात सुनकर स्वामीजी (रामदेव) ने कहा कि हम हम आंवला जूस बना सकते हैं, जिस रूप में आंवला का कभी परंपरागत रूप में इस्तेमाल नहीं हुआ।' हालाकि इस बीच उनके मुंह से निकल ही जाता है कि रामदेव ने यह सोचा कि वह अपने योग शिविरों के जरिये अपने उत्पादों को लोकप्रिय बना सकते हैं, खासतौर से तब जब उनके अनुयायी आंख मूंद कर उन पर भरोसा करते हैं।

इंस्टेंट नूडल्स के बाजार में प्रवेश की पतंजलि की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। बालकृष्ण के मुताबिक पतंजलि ने कभी नूडल्स बनाने के बारे में नहीं सोचा, यहां तक कि मैगी विवाद सामने आने के बाद भी इस पर विचार नहीं किया गया। वह बताते हैं, 'मगर सोशल मीडिया पर हमारे बारे में उड़ी अफवाह फैलने के बाद हमें इस बारे में सोचना पड़ा।' हालांकि इस पेशकश पर अभी भी बहुत संभलकर कदम बढ़ाए जा रहे हैं लेकिन बालकृष्ण उस लम्हे को याद करते हैं, जब पहली दफा नूडल्स का परीक्षण किया गया था। उन्होंने बताया, 'हमारी अनुसंधान टीम ने इस उत्पाद को लेकर तमाम प्रयोग किए। स्वामीजी ने जीवन में कभी नूडल्स नहीं खाए थे लेकिन फिर कई दिनों तक नूडल्स खाए।'

बहुराष्टï्रीय कंपनियां गुणवत्ता को लेकर बालकृष्ण के दावों पर संदेह जाहिर करती हैं और उसे लेकर उपहास उड़ाती हैं। कुछ साल पहले वामपंथी नेता वृंदा करात ने पतंजलि की दवाओं में हड्डिïयों का चूरा मिला होने का आरोप लगाया था। प्रयोगशालाओं में हुए परीक्षणों में उस आरोप की पुष्टिï नहीं हो पाई। उसके बाद से पतंजलि के उत्पादों की लोकप्रियता और बढ़ती ही गई।

कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि पतंजलि ने एक ब्रांड के तौर पर बहुत मजबूत पहचान बनाई है, जो खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों के साथ बहुत मुश्किल से बन पाती। पतंजलि ने इस साल टीआरए की सालाना ब्रांड ट्रस्ट रिपोर्ट में पहली बार जगह बनाई है, जिसमें उसे देश में सात सबसे भरोसेमंद आयुर्वेदिक ब्रांडों में से एक बताया गया है। टीआरए के मुख्य कार्याधिकारी एन चंद्रमौलि कहते हैं कि इसमें काफी हद तक कारोबारी और राजनीतिक हलकों में खुद रामदेव की अपनी ऊंची शख्सियत की अहम भूमिका है। चंद्रमालि कहते हैं, 'इस साल 21 ऊंची शख्सियतों की सूची में जगह बनाने वाले रामदेव आध्यात्मिक जगत की इकलौती हस्ती हैं। इस फेहरिस्त में वह 16वें पायदान पर हैं। हमने चार साल पहले इसे तैयार करना शुरू किया था और तब से इसमें बॉलीवुड और क्रिकेट जगत की हस्तियों का ही बोलबाला रहा है और पहली बार आध्यात्मिक जगत की कोई हस्ती इसमें शुमार हुई।'

15 फीसदी के अपने तगड़े मार्जिन के पीछे बालकृष्ण यही वजह बताते हैं कि पतंजलि की प्रशासनिक लागत बहुत कम है। उनके मुताबिक पतंजलि के कुल राजस्व का केवल 2.5 फीसदी तक ही उसकी प्रशासनिक लागत आती है, जबकि बड़ी कंपनियों के मामले में यह 10 से 15 फीसदी तक होती है। वह कहते हैं, 'हमारा शीर्ष प्रबंधन कोई पैसा नहीं लेता, जिससे हमें अपनी लागत कम रखते हुए अपने परिचालन का दायरा बढ़ाने में मदद मिलती है।'

जब बालकृष्ण से हम पूछते हैं कि क्या उनकी कंपनी के किसी अन्य शीर्ष अधिकारी से हमारी बात हो सकती है, तो उनका उत्साह कुछ काफूर होता नजर आता है। सुनहरे रंग के अपने आईफोन 6प्लस पर कुछ हिचक के साथ वह दीपक सिंघल का नंबर डायल करते हैं ताकि उनके साथ मुलाकात का वक्त मुकर्रर हो सके। सिंघल पतंजलि में मुख्य रणनीतिक अधिकारी हैं।

फूड पार्क बालकृष्ण के कार्यालय से 25 किलोमीटर दूर है। तकरीबन 150 एकड़ में फैले इस परिसर में ही पतंजलि के एफएमसीजी उत्पाद बनाने वाली फैक्टरियां हैं। यहां काम करने वाले लोग इसे दुनिया का सबसे बड़ा फूड पार्क होने का दावा करते हैं। प्रशासनिक खंड के भीतर बने अपने साधारण से कार्यालय में बैठे सिंघल कंपनी का सौम्य चेहरा मालूम पड़ते हैं। सफेद कुर्ता-पाजामा पहले सिंघल बातचीत में अपनी सहूलियत के हिसाब से हिंदी और अंग्रेजी का इस्तेमाल करते हैं।

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के स्नातक और 10 वर्ष के पेशेवर अनुभव वाले 36 वर्षीय सिंघल तकरीबन दो साल पहले रामदेव के साथ दो घंटे चली बैठक के बाद पतंजलि से जुड़े। किसी भी प्रमुख कर्मचारी को चुनने से पहले प्रमुख सिद्घांतों पर उसके विचार और सहमति बेहद जरूरी होती है। संगठन के मौजूदा ढांचे में बालकृष्ण शीर्ष पर हैं और स्वामी मुक्तानंद और भरत बोर्ड प्रतिनिधि हैं, खाद्य, टॉयलटरीज और आयर्वेद श्रेणियों के लिए एक-एक प्रमुख हैं, जिनके बाद निर्यात, विपणन और शोध एवं विकास के लिए उपाध्यक्ष हैं। इसमें महाप्रबंधक और उससे ऊपर की श्रेणियों में तकरीबन 200 लोग हैं। कुल मिलाकर अनुबंधित कर्मियों सहित कंपनी के लिए लगभग 10,000 लोग काम करते हैं। अमूमन जॉब पोर्टल और संपर्कों के आधार पर लोगों को काम पर रखा जाता है। सिंघल कहते हैं, 'भर्तियों के लिए इस साल हम कुछ शीर्ष संस्थानों का दौरा करने पर विचार कर रहे हैं। मगर कुछ भौगोलिक बाधाओं को लेकर हम इनकार नहीं कर सकते।'

उत्पादों की योजना के बारे में उनका कहना है इसके लिए बाजार में उत्पादों की पहचान कर यह तय किया जाता है कि क्या पतंजलि में उसे कम कीमत पर बनाया जा सकता है। अनुसंधान विभाग में कार्यरत 50 से अधिक वैज्ञानिक ऐसे उत्पादों को विकसित करने पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं। क्या ये उत्पाद स्वास्थ्यवर्धक हैं? शायद ऐसा हो, हालांकि फूड पार्क में एक कैंडी संयंत्र भी है, जिसमें रोजाना 1.5 ट्रक चीनी की खपत होती है।

सिंघल पतंजलि के जनसंपर्क प्रमुख कृष्ण कुमार मिश्रा के साथ फूड पार्क का दौरा कराने का इंतजाम करते हैं। जूस पैकेजिंग संयंत्र में दाखिल होने से पहले मिश्रा शू कवर पहनने के साथ ही अपने सर पर एक डिस्पोजेबल कैप लगा लेते हैं। भीतर का माहौल आंवला सांद्रण की खुशबू से सराबोर है, जहां रोजाना प्रत्येक घंटे तकरीबन 6,000 लीटर जूस तैयार होता है।
इतने बड़े उत्पादन के लिए फूड पार्क में 1,00,000 वर्ग फीट का गोदाम है, जिसमें 11,500 टन सामान रखा जा सकता है। यह ऐसा संयंत्र है, जहां कुछ भी बरबाद होने के लिए नहीं छोड़ा जाता। मिश्रा बताते हैं कि पतंजलि में एक समर्पित जैव-अनुसंधान संस्थान कार्यरत है जो इस दिशा में काम कर रहा है कि जैविक कचरे को कैसे ईंधन, उर्वरक और मवेशियों के लिए चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

जहां संयंत्र के प्रमुख और मिश्रा जैसे अधिकांश वरिष्ठï अधिकारी सफेद कमीज और ट्राइजर में नजर आते हैं, वहीं फैक्टरी में काम करने वाले मजदूरों ने अपने कपड़ों के ऊपर एक लबादा भी पहना हुआ है। उत्पादन इकाइयां स्वचालित हैं और उनकी तुलना देश में उपलब्ध बेहतरीन तकनीक से की जा सकती है। विशालकाय च्यवनप्राश इकाई हमारा अगला पड़ाव बनने जा रही है, जिसके साथ ही एक नारियल तेल बॉटलिंग संयंत्र भी है। पतंजलि सूत्रों का दावा है कि इसे दक्षिण भारत से मंगाया जाता है और अपना ब्रांड नाम चस्पां कर बेचा जाता है।

महिलाएं प्लास्टिक की बोतलों को कपड़े से साफ करके उन पर कंपनी का लेबल चिपका रही हैं ताकि उन्हें स्वचालित पैकिंग के लिए कतार में रखा जा सके। फैक्टरी में काम करने वाले तमाम मजदूर और सयंत्र के प्रमुख गुड्डïू सिंह मिश्रा का अभिवादन करने के लिए आगे आते हैं। परंपराओं के अनुसार अभिवादन की शुरुआत ओम के साथ और अंत प्रणाम के साथ होता है। कुल मिलाकर परंपरा और आधुनिकता के इस अद्भुत समागम में अलग-अलग चीजों के उत्पाद के बीच एक बात साझा नजर आती है कि अधिकांश कार्यालयों और उत्पादन इकाइयों में रामदेव और बालकृष्ण के चित्र नजर आते हैं।

Keyword: patanjali, ramdev, noodles, FMCG,,
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Comments
 
amit
19-Sep-17
 
ओक
  आपका मत
 क्या बाजार में उतार-चढ़ाव को थामने के लिए बजट में होंगे उपाय?
हां नहीं  
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