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फीका कारोबार घटता रोजगार
विमुक्त दवे /  October 28, 2015

रत्न एवं आभूषण क्षेत्र मौजूदा वित्त वर्ष में रोजगार के कोई मौके तैयार नहीं कर पा रहा है और ऐसा लगता है कि यह समृद्धि से जुड़े उत्पाद होने की कीमत चुका रहा है। पिछले वित्त वर्ष में इस क्षेत्र में केवल 4,000 नौकरियों के मौके तैयार हुए थे। उद्योग के सूत्रों के मुताबिक वैश्विक स्तर पर धीमी वृद्धि के कारण घरेलू स्तर पर और विदेश में कारोबार में गिरावट का रुझान है इसकी वजह से ही नई नौकरियों के मौके तैयार नहीं हो पा रहे हैं।

रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद् (जीजेईपीसी) के अध्यक्ष प्रवीण शंकर पंड्या कहते हैं, 'उद्योग बुरे वक्त से गुजर रहा है और भारत को न केवल निर्यात के मोर्चे पर नुकसान हो रहा है बल्कि वैश्विक बाजार में इसकी नेतृत्वकर्ता की भूमिका पर भी असर पड़ रहा है। इसके साथ ही देश में बेरोजगारी दर में भारी गिरावट देखी जा रही है।' श्रम ब्यूरो की जनवरी-मार्च 2015 की ताजा तिमाही की रिपोर्ट के मुताबिक रोजगार क्षेत्र में बदलाव देखा गया और 2014-15 की चौथी तिमाही में सोना, चांदी, हीरा प्लेटिनम उत्पादों से जुड़े क्षेत्र में 6,000 नौकरियां कम हो गईं जबकि दिसंबर 2014 की तिमाही में 5,000 नौकरियों में कमी देखी गई थी।

बात यहीं खत्म नहीं होती है उद्योग सूत्र आभूषण निर्माण क्षेत्र में पिछले एक-डेढ़ सालों में 25 फीसदी नौकरी कटौती की  बात कहते हैं जिनमें से ज्यादातर कारीगर की छंटनी काम के कम मौके की वजह से हुई। उद्योग का यह अनुमान है कि इस क्षेत्र में कुल करीब 30 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है और 2013-14 तक रोजगार के मौके में 6-8 फीसदी तक औसत वृद्धि रही। रत्न एवं आभूषण क्षेत्र में रोजगार पाने वाले 30 लाख लोगों में से हीरा क्षेत्र 11 लाख लोगों को जबकि सोने के गहने तैयार करने वाले क्षेत्र में 10 लाख लोगों को नौकरियां मिली हैं जबकि बाकी को चांदी, प्लेटिनम और अन्य रत्न आभूषण क्षेत्र में नौकरियां मिली हैं।

हाल के वक्त में नौकरियों के मौके में कमी की वजह सिर्फ वैश्विक स्तर के मसले ही नहीं हैं बल्कि इसके लिए घरेलू चुनौतियां भी जिम्मेदार हैं। रोजगार के दूसरे विकल्पों मसलन महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना कानून (मनरेगा) आदि का उभरना भी इसमें शामिल है। पॉलिश किए गए सूरत के हीरे के आपूर्तिकर्ता सवानी ब्रदर्स के माथुर सवानी बताते हैं, 'वैश्विक स्तर पर हीरे की मांग में जबरदस्त कमी आई है जिसकी वजह से काफी बुरा असर पड़ा है। कई हीरा पॉलिशिंग इकाइयां बंद हो गई हैं जिसकी वजह से इस उद्योग में कामगारों की कमी देखी जा रही है।' केवल हीरा क्षेत्र में ही सूरत में करीब 300 इकाइयों ने अपनी दुकानें बंद कर लीं जो देश में हीरा पॉलिशिंग का सबसे बड़ा केंद्र है। इसकी वजह से हजारों लोगों की नौकरियां खत्म हो गईं। हालांकि बाकी 3,500 इकाइयां काम कर रही हैं लेकिन उनमें कामगारों के वेतन में कटौती की जा रही है। हालात और गंभीर इस वजह से हो रहा है क्योंकि त्योहारी मौसम शुरू हो गया है जब हीरा क्षेत्र में सबसे ज्यादा कारोबार होता है। हाल के वर्षों में सूरत में अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के तीन त्योहारी महीने में करीब 35,000-40,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है।

जीजेईपीसी के मुताबिक चीन और यूरो क्षेत्र में छाई मंदी का असर मांग के साथ-साथ पॉलिश किए गए हीरे और तैयार आभूषणों की कीमतों पर भी पड़ा। इस क्षेत्र को सरकार की मदद के साथ-साथ यह भी उम्मीद है कि इस साल निर्यात में 13 फीसदी की गिरावट होगी। उद्योग सूत्रों के मुताबिक फिलहाल अमेरिका दुनिया में एकमात्र गहने की मांग बढ़ाने वाला देश है। घरेलू बाजार में भी मंदी है। विभिन्न उद्योगों में मंदी की वजह से भी लोगों की खरीद क्षमता में भी कमी आई है।

उद्योग में लोग दीवाली के दौरान त्योहारी मौसम की मांग को लेकर ज्यादा आशान्वित नहीं है। इसकी वजह यह भी है कि इस साल शादी के सीजन के दौरान पर्याप्त शुभ मुहूर्त वाली तिथियां नहीं हैं। रोजगार के नए मौके तैयार होना एक बड़ी समस्या है और मौजूदा मानव संसाधन को रोजगार देना भी एक बड़ी चुनौती है क्योंकि कई कामगार दूसरे क्षेत्रों में रोजगार के मौके तलाश रहे हैं।

एशियन स्टार कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) विपुल शाह का कहना है, 'उत्पादन में कटौती के लिए बाध्य होने की वजह से रत्न एवं आभूषण उद्योग में रोजगार के अवसरों पर भी असर पड़ा है। उद्योग अब मौजूदा कार्यबल का प्रबंधन करने और उन्हें बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।' मनरेगा की सफलता की वजह से कई कामगार अपने गृहनगर में वापस लौट गए क्योंकि उन्हें इस योजना के तहत अपने गांवों में ही रोजगार मिलने लगा। इस बीच आभूषण निर्माण क्षेत्र में तकनीक को अपनाने और संगठित क्षेत्र में सुधार की वजह से भी असंगठित क्षेत्र में लोगों की तादाद कम हुई है। ऑल इंडिया जेम्स ऐंड ज्वैलरी ट्रेड फेडरेशन के अध्यक्ष हरीश सोनी बताते हैं, 'आभूषण निर्माण क्षेत्र के कई कुशल कामगार अब आधुनिक उत्पादन इकाइयों में चले गए हैं क्योंकि उन्हें परंपरागत निर्माण इकाइयों के बजाय ज्यादा वेतन मिल रहा है।'

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