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बीईपीएस के लिए भारत तैयार?
सुदीप्त दे /  October 18, 2015

जी 20 का हिस्सा होने के नाते भारत बेस इरोजन ऐंड प्रॉफिट शिफ्टिंग (बीईपीएस) परियोजना में काफी सक्रिय भूमिका निभा रहा है और भारत ऑर्गनाइजेशन फॉर इकनॉमिक कोऑपरेशन ऐंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) के अधिकारियों के साथ मिलकर नियम बनाने में और सम्मेलनों के आयोजन में बढ़चढ़कर हिस्सेदारी कर रहा है। वित्त मंत्रालय के संयुक्त सचिव अखिलेश रंजन ने कहा, 'बीईपीएस एक वास्तविकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जी20 देशों के बीच एक सर्वसहमति है।' रंजन ने कहा, 'हम अब रिपोर्ट की समीक्षा करना शुरू करेंगे और देखेंगे कि कब और किस तरह हम सुधारों की शुरुआत कर सकते हैं।'

ओईसीडी के अनुमानों के मुताबिक बीईपीएस के सुधारों से दुनिया भर में करीब 9,000 कंपनियां प्रभावित होंगी। सेंटर फॉर टैक्स पॉलिसी ऐंड एडमिनिस्ट्रेशन के उप निदेशक ग्रेस पेरेज नवारो का कहना है, 'भारत में सभी कंपनियां इन सुधारों से प्रभावित नहीं होंगी, इसका असर सिर्फ बड़ी कंपनियों पर पड़ेगा।' टैक्स सूत्र डॉट कॉम के समूह संपादक अरुण गिरि का अनुमान है कि बीईपीएस के तहत किए जाने वाले बदलावों का सीधा असर 155 भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा जो हर एक देश के हिसाब से जानकारी देने योग्य होंगी।

इसके अलावा ये नए बदलाव भारत में कारोबार कर रही बहुराष्टï्रीय कंपनियों की सहायक कंपनियों पर भी लागू होंगे। दुनिया भर में 6,000 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार करने वाली कंपनियों को प्रत्येक देश के आधार पर राजस्व, मुनाफे और भुगतान किए गए कर की जानकारी संबंधित कर प्रशासकों को देनी होगी। कर विशेषों के बीच चिंता की सबसे बड़ी वजह बीईपीएस सुधारों को लेकर भारतीय कंपनियों के बीच जागरूकता की कमी है। उन्हें इस बारे में पता नहीं है कि इससे उनके कारोबारी परिचालन पर कितना असर पड़ेगा। डेलॉयट हैसकिंस ऐंड सेल्स की साझेदार नीरु आहूजा का कहना है, 'अगर ये नियम वित्त वर्ष 2017 से लागू हो जाते हैं तो कंपनियों को इन्हें लागू करने के हिसाब से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।'

भारतीय कंपनियों को सलाह देते हुए रंजन ने कहा, 'उन्हें इस वास्तविकता को स्वीकार करना चाहिए कि इससे उनके कारोबार करने का तरीका बदल जाएगा। उन्हें इस बात पर जोर देना होगा कि उनके अपने ढांचे में किस तरह के बदलावों की जरूरत है, उन्हें इस बात पर भी गौर करना होगा कि उनकी लेखा प्रणाली, लागू करने के तंत्र और आंकड़ों को प्रस्तुत करने के तरीके में किस तरह के बदलाव होंगे।' कर विशेषज्ञों का कहना है कि बीईपीएस की सिफारिशें लागू होने के बाद कंपनियों को अधिक से अधिक सूचनाएं साझा करने की जरूरत होगी जिससे दुनिया भर में उनके कारोबार में पारदर्शिता बढ़ जाएगी। कंपनियों को यह भी देखना होगा कि प्रत्येक देश में जानकारियां देने के लिए उन्हें किन संसाधनों की जरूरत होगी और उन्हें बेहतर ट्रांसफर प्राइसिंग नियमों को लागू करना होगा। ईवाई अमेरिकाज में कर सेवाओं की वाइस चेयरपर्सन केट बार्टन का कहना है, 'कंपनियों को अब और अधिक विवादों का सामना करना पड़ेगा। अब देशों के बीच कर हासिल करने को लेकर तर्क-वितर्क बढ़ जाएंगे।'

कई कर विशेषज्ञों को ट्रांसफर प्राइसिंग से संबंधित विवादों में तेजी आने की उम्मीद है क्योंकि सरकारें कंपनियों से अन्य अधिकार क्षेत्रों में उनके द्वारा दिए गए कर और मार्जिन के बारे में दी गई जानकारी के आधार पर सवाल पूछ सकती हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था को कर के दायरे में लाने के लिए उठाए जाने वाले कदम भारत में तेजी से उभर रहे स्टार्ट-अप्स और ई-कॉमर्स उद्योग के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। बार्टन का कहना है, 'स्टार्ट-अप्स को पहले ही दिन से कराधान के बारे में सोचना चाहिए। अगर वे शुरुआत से ही अपने ढांचे के बारे में तय करें तो वे अपने लिए अवसर बढ़ा सकते हैं।' कर विशेषज्ञों का कहना है कि बीईपीएस के तहत उठाए जाने वाले कदमों की सफलता उन्हें लागू करने के तरीके पर निर्भर करता है। रंजन का कहना है, 'प्रतिस्पर्धा और लागू करने के बीच एक संतुलन होना चाहिए। इस संतुलन को कायम रखना कर प्रशासन के लिए एक चुनौती है।' उन्होंने कहा, 'अगर हम उसे उचित ढंग से लागू करते हैं तो इससे निवेश के माहौल पर प्रभाव नहीं पडऩा चाहिए।' विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए कर प्रशासन को बीईपीएस परियोजना के विभिन्न पहलुओं को लागू करने के लिए अपने कर्मचारियों को तैयार करने की जरूरत है।

Keyword: BEPS, OECD,,
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