बिजनेस स?टैंडर?ड - 'निर्माता नहीं अदाकार और एंकर बनकर हूं संतुष्ट'
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'निर्माता नहीं अदाकार और एंकर बनकर हूं संतुष्ट'
उर्वी मलवाणिया /  October 11, 2015

बॉलीवुड में महानायक के रूप में मशहूर, अभिनेता अमिताभ बच्चन अब 73 साल के हो चुके हैं। इन दिनों वह देश के एक प्रमुख हिंदी मनोरंजन चैनल स्टार प्लस के एक नए शो की तैयारी में जुटे हुए हैं। बिग बी के नाम से भी मशहूर अमिताभ स्टार प्लस पर एक नए शो 'आज की रात है जिंदगी' के एंकर के रूप में नजर आएंगे। वर्ष 1969 में बॉलीवुड में अपनी पारी की शुरुआत करने के बाद से वह बड़े पर्दे पर अभिनेता, निर्माता, टीवी एंकर और एक कॉमिक बुक के हीरो के रूप में नजर आ चुके ऌहैं। उर्वी मलवाणिया ने बिग बी से उनके नए शो के बारे में बात की कि आखिर टेलीविजन के प्रति उनका आकर्षण क्यों हैं और वह निर्माता बनने के बजाय कैमरे के सामने ही खुश क्यों होते हैं। पेश है बातचीत के अंश

 
'आज की रात है जिंदगी' का एंकर बनना अब तक के टीवी के सफर से अलग कैसे है?
 
यह शो काफी अलग है और इसका प्रारूप भी अलग है। इसी वजह से इसमें भूमिका भी अलग होगी। स्टार का शो कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) दरअसल एक गेम शो था जिसका एक खास तरह का फॉर्मेट था जिसका अनुसरण करने की जरूरत थी। ऐसे फॉर्मेट में कोई बदलाव नहीं आ सकता है। यह एक गेम शो है जो लगभग 80 देशों में चल रहा है और किसी भी जगह इसके फॉर्मेट में बदलाव नहीं लाया जा सकता है। यह कानूनी और अनुबंध से जुड़ी बाध्यता होती है जिसका अनुसरण करना होगा। इसमें बस प्रतिस्पद्र्धियों के जीवन की कहानियों और सफर से जुड़े बदलाव ही दिख सकते हैं। लेकिन 'आज की रात है जिंदगी' शो दरअसल लोगों की निजी उपलब्धियों की सराहना से जुड़ा है जो रोजमर्रा की नकारात्मकता के बीच भी अपना मुकाम पा लेती है। हमारे समाज कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अच्छा काम कर रहे हैं और उन्हें लोगों के बीच लाना और लोगों को उनके प्रति जागरूक करना भी अच्छी बात होगी। समाज को इन कार्यों के प्रति जागरूक बनाना और उन्हें प्रेरित करना भी एक महत्त्वपूर्ण मौका है। 
 
आपको इस शो में यही अपील वाली बात लगी?
 
हां, मुझे लगता है कि आप जो कुछ भी कर रहे हैं उसके पीछे एक सोच और नजरिया जरूर होना चाहिए। यह भी कुछ वैसा ही है कि एक फिल्म बनाना या कहानी कहने की प्रक्रिया होती है। कुछ ऐसे मानक भी होते हैं जिनसे हम दूर नहीं होना चाहते। निश्चित तौर पर हम जो पेश करते हैं उसमें कुछ नैतिक संदेश जरूर होना चाहिए। ये कुछ ऐसी बातें हैं जो फिल्म और टेलीविजन देखने की प्रक्रिया को सार्थक बनाते हैं। अगर आप कोई मनोरंजन वाला शो भी देख रहे हैं तो आपको प्रतिस्पद्र्धा देखने में मजा आएगा क्योंकि आपको एक प्रतिस्पद्र्धी की तुलना दूसरे प्रतिस्पद्र्धी से करने का मौका मिलता है। इसी तरह मुझे ऐसा लगता है कि जो लोग ऐसे शो देखते हैं उनमें एक तरह की जागरूकता आती है और मुमकिन है कि वे बाहर निकले और कुछ ऐसी चीजें करें जिसकी लोग सराहना करें। 
 
क्या आपको भी ऐसा लगता है कि टीवी एक ऐसा मंच है जिसके जरिये फिल्म और टीवी बिरादरी के सेलिब्रिटी लोगों से इतर 'आम जनता' से बात करने का मौका मिलता है?
 
मैं आपकी बात से इत्तफाक रखता हूं। मैं इसके जरिये जिन लोगों से मिल पाता हूं उनसे अपनी सेलिब्रिटी वाली जिंदगी में नहींं मिल सकता था। इससे आपको न केवल ऐसे लोगों से मिलने का मौका मिलता है जिनसे आप पहले कभी नहीं मिले बल्कि उनकी जिंदगी और उसकी परिस्थितियों से भी रूबरू होने का मौका मिलता है जिनसे वे गुजरे हैं। हम उनके बारे में प्रिंट मीडिया में पढ़ सकते हैं या उनकी कहानी टेलीविजन पर देख सकते हैं। मुझे लगता है कि ऐसे लोगों के साथ बैठना, उनके हाथों को पकडऩा और उनके करीब होने की वजह से उनकी भावनाओं को पढ़ पाना और उनकी खुशी तथा उपलब्धियों को समझना अलग चीज होती है। निजी तौर पर मेरे लिए यह अनुभव बेहद अमूल्य है।
 
आप टीवी से करीब एक दशक से जुड़े हैं, ऐसे में पिछले 15 सालों से टीवी माध्यम में आने वाले बदलावों को आप कैसे देखते हैं?
 
मेरे ख्याल से टीवी माध्यम बेहद व्यापक और बड़ा हो चुका है। यह हमेशा से बेहद शक्तिशाली माध्यम रहा है। इससे विचार बनते हैं, आपको सूचनाएं मिलती हैं। इसके जरिये आप उन जगहों पर जाते हैं जहां आप पहले कभी नहीं गए या आपने पहले कभी नहीं देखा। इस माध्यम के जरिये विचार-विमर्श और चर्चा शुरू होती है। इसके जरिये आपको दूसरे लोगों की बातों और उन विचारों को सुनने का मौका मिलता है जिन विचारों के अस्तित्व की आपने कल्पना तक नहीं की होगी। प्रिंट मीडिया में संपादकीय का चलन है जो एक तरह का सार होता है जिसके बारे में मैं बात कर रहा हूं लेकिन सभी के पास संपादकीय पन्ना पढऩे का वक्त नहीं होता। ऐसे में अगर कोई चर्चा चल रही है तो इससे आपको सूचनाएं ही मिलती हैं। मुमकिन है कि आपने कुछ से किसी चीज के बारे में अपनी कोई राय बना ली होगी और आपको कभी किसी दूसरे पक्ष के बारे में सुनने का मौका नहीं मिला हो जो आपकी राय से अलग भी  हो सकता है। उसे देखने के बाद भी आप अपना कोई विचार तैयार करने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन आपको कम से कम उस मसले पर गंभीरता से सोचने के लिए मजबूर जरूर होना होगा। 
 
टीवी पर एंकर या अभिनेता से इतर किसी और भूमिका में आने की आपकी कोई योजना है? कभी आप निर्माण क्षेत्र में भी कदम रख सकते हैं?
 
नहीं मुझे नहीं लगता कि मैं निर्माण क्षेत्र के लिए सक्षम हूं। कार्यक्रम निर्माण वास्तव में व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक नहीं होता है। इसमें काफी खर्चे होते हैं और मेरे पास इस तरह की फंडिंग का कोई विकल्प नहीं है। 
Keyword: bollywood, amitabh bachchan,,
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