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मैगी के नमूनों और जांच पर नेस्ले और सरकार में जारी है तकरार
अर्णव दत्ता / नई दिल्ली September 30, 2015

नेस्ले इंडिया के लिए एक बड़ी राहत यह हो सकती है कि राष्टï्रीय उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग (एनसीडीआरसी) ने उस याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है जिसमें कहा गया है कि विभिन्न राज्यों के एफडीए ने नमूना संग्रह और परीक्षण के लिए अनुचित तरीके अपनाए। अधिकारियों द्वारा बाजार से पहले जुटाए गए नमूनों की जांच नए सिरे से न कराए जाने के मामले में नेस्ले की याचिका को स्वीकार करते हुए आयोग ने सरकार और कंपनी को 8 अक्टूबर को तलब किया है। आज का यह आदेश काफी मायने रखता है क्योंकि बंबई उच्च न्यायालय में नमूनों की गुणवत्ता और परीक्षण को लेकर कंपनी की दलीलें निर्णायक रहीं और इसलिए फैसला उसके पक्ष में रहा।

भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा मान्यताप्राप्त विभिन्न प्रयोगशालाओं में मैगी नूडल्स के नमूनों की जांच करने पर उसमें सीसे की मात्रा तय सीमा (2.5 पाट्ïर्स प्रति मिलियन) से अधिक पाई गई और मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी) की मौजूदगी दिखी। इस पर देशभर के बाजारों से मैगी इंस्टैंट नूडल्स की वापसी के बीच 5 जून को नेस्ले ने बंबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। हालांकि एफएसएसएआई अपने दावे पर अडिग रहा कि यह उत्पाद खाने के लिहाज से खतरनाक है और इसलिए उसने जल्द से जल्द उस पर प्रतिबंध लगा दिया जो बिल्कुल सही दिशा में उठाया गया कदम है।

नमूना संग्रह और प्रयोगशालाओं की हालात के बारे में नेस्ले इंडिया की दलीलें उसके पक्ष में रहीं। न्यायालय ने पहले कराई गई जांच पर सवाल उठाते हुए नमूनों का परीक्षण नए सिरे से कराने का आदेश दिया। इसके साथ ही न्यायालय ने देश में मैगी नूडल्स पर लगे प्रतिबंध को भी खत्म कर दिया। इस बीच, उपभोक्ता मामलों के मंत्री ने राष्ट्रीय फोरम में नेस्ले इंडिया के खिलाफ क्लास एक्शन सूट दायर की और 640 करोड़ रुपये के हर्जाने का दावा किया। किसी उपभोक्ता आयोग में सरकार द्वारा दायर यह अपने आप में पहला मामला है।

नेस्ले इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, 'हम स्वतंत्र एवं खुद की मान्यताप्राप्त प्रयोगशालाओं में मैगी नूडल्स का 3,500 से अधिक परीक्षण पहले ही कर चुके हैं। इन सभी परीक्षण में मैगी नूडल्स को खाने लायक पाया गया। संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के खाद्य मानक प्राधिकरणों ने जांच के पास नेस्ले इंडिया द्वारा विनिर्मित मैगी नूडल्स को सुरक्षित पाया। नेस्ले इंडिया दुकानों में मैगी नूडल्स की वापसी के लिए सभी हितधारकों के साथ काम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमारे उपभोक्ताओं का विश्वास और हमारे उत्पादों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिता है।' नेस्ले इंडिया ने आज की सुनवाई के दौरान अपनी दलील में कहा कि एनसीडीआरसी में उसके खिलाफ की गई शिकायत को खारिज किया जाना चाहिए क्योंकि बंबई उच्च न्यायालय के फैसले के बाद अब उसका कोई औचित्य नहीं रह गया है।

नेस्ले इंडिया ने पक्षपात का आरोप लगाते हुए शीर्ष उपभोक्ता आयोग के समक्ष कहा कि मैगी नूडल्स प्रतिबंध मामले में सरकार उसके साथ भेदभाव कर रही है क्योंकि इसी प्रकार के उत्पादों के लिए अन्य विनिर्माताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। मैगी पर देश भर में प्रतिबंध को खारिज करने के बंबई उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कंपनी ने राष्ट्रीय फोरम से अपने पूर्व के उस आदेश को वापस लिए जाने का अनुरोध किया जिसके तहत उसने कंपनी के खिलाफ सरकार के 640 करोड़ रुपये के दावे को सुनवाई के लिए स्वीकार किया है। यह दावा कारोबार में अनुचित व्यापार व्यवहार और अन्य आरोपों को लेकर दर्ज कराया गया है। न्यायाधीश वीके जैन की अध्यक्षता वाले आयोग के पीठ ने कंपनी के आवेदन पर सरकार को नोटिस जारी किया और 8 अक्टूबर तक इस पर जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही सरकार की एक अन्य याचिका पर नेस्ले को भी नोटिस दिया जिसमें मैगी नूडल्स के के फिर से परीक्षण की अनुमति देने का अनुरोध किया गया है।

कंपनी की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद निगम ने सरकार द्वारा दायर मुकदमे का विरोध करते हुए कहा कि इस प्रतिबंध के कारण करीब 9,000 विक्रेता और 10,000 आपूर्तिकर्ता बेरोजगार हुए हैं और उसे करीब 250 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा, 'इससे कंपनी की साख को काफी नुकसान पहुंचा है। एक तरफ जहां उसके उत्पाद पर प्रतिबंध है, वहीं सरकार इसी प्रकार के उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही। मेरे साथ भेदभाव किया जा रहा है।' सरकार के दावे पर राष्टï्रीय फोरम ने 17 अगस्त को कंपनी को नोटिस जारी किया था। कंपनी को उसका जवाब आज देना था। हालांकि कंपनी नोटिस का जवाब नहीं दे पाई।

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