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वैश्विक होड़ में भारत की रैंक सुधरी
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली September 29, 2015

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की ओर से आज जारी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक में भारत पिछले साल की तुलना में 16 स्थान ऊपर पहुंच गया है। अब 140 देशों में भारत 55वें स्थान पर है, जो 2014-15 मेंं 71वें स्थान पर था। हालांकि 5 साल की लगातार गिरावट के बाद स्तर ऊपर उठने के बावजूद भारत 2007 में जिस स्थान पर था, उसकी तुलना में 7 अंक नीचे है। हाल की रैंकिंग मेंं स्विटजरलैंड पहले स्थान पर है। उसके बाद सिंगापुर, अमेरिका, जर्मनी और नीदरलैंड का स्थान है।

डब्ल्यूईएफ ने इस रिपोर्ट में भारत की रैंक ऊपर आने के बारे में कहा है कि 'नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने के बाद कारोबार के अनुकूल, विकास के अनुकूल और भ्रष्टाचार के विरोध में उठाए गए कदमोंं की वजह से सरकार के प्रति कारोबारी समुदाय के भरोसे मेंं सुधार हुआ है।' बहरहाल रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर 135 देशों के स्थिर नमूने लिए जाएं तो 2014-15 और 2015-16 दोनों ही वर्षों में भारत की रैंकिंग 55 पर बनी रहेगी।

वैश्विक प्रतिस्पर्धात्कमता सूचकांक एक वार्षिक आकलन है, जिसमें 140 देशों में उत्पादकता और समृद्धि को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों के आधार पर आकलन किया जाता है। इसमें देशोंं का प्रदर्शन 12 प्रमुख पहलुओं संस्थाओं, बुनियादी ढांचे, वृहद आर्थिक वातावरण, स्वास्थ्य एवं प्राथमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण, वस्तुओं के बाजार की प्रभावशीलता, श्रम बाजार की कुशलता, वित्तीय बाजार का विकास, तकनीकी तैयारी, बाजार का आकार, कारोबार की कृत्रिमता और नवोन्मेष शामिल हैं।

विश्व बैंक के ईज आफ डूइंग बिजनेस सर्वे में भारत को 142वां स्थान मिला है। सरकार ने बार बार सुधारों को लागू करने का वादा किया है, जिससे भारत की रैंकिंग 50 के भीतर पहुंच सके।  हाल के डब्ल्यूईएफ रैंकिंग से पता चलता है कि भारत के इंस्टीट्यूशंस को ज्यादा अनुकूल तरीके से आंका गया है जिनकी रैंक एक साल पहले के 70वें की तुलना मेंं 60वां हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राजनीतिज्ञों पर भरोसे के मामले में भी 140 देशों में भारत 31वें स्थान पर है। वहीं सरकारी अधिकारियों के अनुकूल फैसले और सरकारी नियमों के बोझ के मामले में भारत को क्रमश: 32वां और 27वां स्थान मिला है।

देश के वृहद आर्थिक स्थिरता के मामले में पिछले साल की तुलना मेंं काफी सुधार हुआ है और भारत का स्थान 91 से 10 पर पहुंच गया है। इसमें अहम भूमिका महंगाई दर में कमी, चालू खाता घाटे में कमी और सरकार द्वारा वित्तीय घाटे को कम करने की दिशा में उठाए गए कदमों की है। बुनियादी ढांचा के मामले में भारत 6 स्थान ऊपर गया है। सड़क बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता में इसका 29वां स्थान है, जबकि प्रति किलोमीटर उपलब्ध एयरलाइंस सीटों के मामले में 11वां स्थान है। कुछ प्रमुख मानदंडों-सड़कों की गुणवत्ता (61वां ), बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता (98वां) उल्लेखनीय हैं।

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