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टोल संग्रह में शामिल होंगे ज्यादा बैंक
विजय रॉय / नई दिल्ली September 27, 2015

सरकार रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान उपकरण- 'फास्टैग' के लिए कुछ और बैंकों को पंजीकृत करने की योजना बना रही है। फास्टैग का इस्तेमाल टोल प्लाजा पर नकदी रहित लेनदेन के लिए किया जाता है। इसका मकसद इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग का इस्तेमाल बढ़ाना है। साथ ही सरकार ने मौजूदा दो क्लियरिंग हाउस की जगह एकल क्लियरिंग हाउस बनाने की भी योजना बनाई है। सूत्रों के मुताबिक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय अगले दो महीने में नए सिरे से बोली आमंत्रित करेगा। योजना है कि बैंकों को हल लेन देन इलेक्ट्रॉनिक टोल के माध्यम से करने को प्रोत्साहित किया जाए।

इस समय आईसीआईसीआई बैंक और ऐक्सिस बैंक इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (ईटीसी) करते हैं और दोनों बैंकों के अलग अलग क्लियरिंग हाउस हैं। फास्टैग इस समय दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-चंडीगढ़ और बेंगलूरु-चेन्नई राजमार्गों पर परिचालन में है। इन तीन राजमार्गों पर इसके 35 टोल प्लाजा हैं, जिनका यूजर बेस 2,200 तक सीमित है। सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग विभाग के सचिव विजय छिब्बर ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'इसकी विशेषताओं के बावजूद फास्टैग बहुत लोकप्रिय नहीं है, जैसा कि हम उम्मीद कर रहे थे। बैंक इसका इस्तेमाल करने वालों से लेन देन शुल्क लेते हैं, जो अवरोधक का काम करता है। ऐसे में अलगे 2 महीने में हमने नया टेंडर निकालने का मन बनाया है, जिससे क्लियरिंग हाउस की स्थापना की जा सके और इसमें ज्यादा बैंकों को शामिल किया जा सके, जिससे फास्टैग सड़क का इस्तेमाल करने वालों में लोकप्रिय हो सके।'

उम्मीद की जा रही है कि ईटीसी से बाधारहित और नकदीरहित यात्रा सुनिश्चित हो सकेगी। यह व्यवस्था इस साल दिसंबर तक सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू हो जाएगी। प्रस्ताव के तहत टोल प्लाजा में इसके लिए एक अलग लेन होगी। ईटीसी व्यवस्था में किसी भी टोल संग्रह प्वाइंट पर एकल प्रीपेड खाते के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक टोल भुगतान की सुविधा होती है। एक अधिकारी ने नाम न दिए जाने की शर्त पर बताया, 'टोल प्लाजा पर ईटीसी व्यवस्था लागू करने में एक लेन पर 50 लाख रुपये खर्च आते हैं। हमने देश भर में इस व्यवस्था को लागू करने के लिए 300 टोल प्लाजा चिह्नित किए हैं, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक टोल के लिए अलग एक लेन होगी।'

Keyword: fastag, bank,,
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