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संकट से उबरे, अब तारणहार बनेंगे
मनोजित साहा और नूपुर आनंद /  September 25, 2015

माइक्रोफाइनैंस समूहों को पांच साल पहले संकट के दौर से गुजरना पड़ा लेकिन अब उनमें आत्मविश्वास आ रहा है। आरबीआई ने नौ एमएफआई को बैंक लाइसेंस देकर यह जताया है कि उनका कारोबारी मॉडल मजबूत है

वर्ष 2010 में आंध्र प्रदेश के उस संकट के बाद सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) ने काफी लंबा रास्ता तय किया है जिसकी वजह से अस्थायी तौर पर ही सही उस वक्त की प्रमुख एमएफआई कंपनी एसकेएस माइक्रोफाइनैंस को बड़ा झटका लगा जो शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने वाली एकमात्र कंपनी थी। पिछले 18 महीने में खुद को रूढि़वादी नियामक मानने वाले भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नौ एमएफआई को बैंक लाइसेंस दिया जबकि बंधन को अप्रैल 2014 में यूनिवर्सल बैंक का लाइसेंस दिया गया। इस महीने आठ एमएफआई को लघु वित्त बैंक चलाने की  की मंजूरी मिली है।
 साफतौर पर नियामक ने एमएफआई के उस काम को अहमियत दी है जिसके तहत उन्होंने देश के सुदूर इलाकों के गरीब लोगों को कर्ज देने की रवायत शुरू की जहां कई स्थापित बैंक भी पहुंचने में असफल रहे। इसके बावजूद आंध्र प्रदेश में एमएफआई के कर्ज के दबाव की वजह से कई लोगों ने आत्महत्या कर ली। एमएफआई ने कई राज्यों में तरक्की करते हुए सफल कारोबारी मॉडल दर्शाया है। इसी वजह से निवेशकों का आकर्षण इन एमएफआई में बढ़ा और वे इनमें अच्छी भागीदारी हासिल कर रहे हैं। मिसाल के तौर पर विश्व बैंक की निजी कर्जदाता इकाई, इंटरनैशनल फाइनैंस कॉरपोरेशन ने बंधन के अलावा इन छोटे वित्त बैंकों में भी निवेश किया है जिन्हें नियामक की मंजूरी मिली। दिशा ग्रुप के निदेशक राजीव यादव कहते हैं, 'कुछ सालों में सूक्ष्म वित्त उद्योग औपचारिक कर्जदाता के तौर पर परिपक्व हो चुका है क्योंकि इनका कारोबारी मॉडल उन क्षेत्रों पर जोर देता है जहां बैंकिंग सेवाएं मौजूद नहीं हैं और दरें तय हो चुकी हैं। इसके अलावा एक आचार संहिता भी है जिसका अनुसरण करना होगा। इसके अलावा सूक्ष्म वित्त कंपनियां सुदूर इलाकों तक वित्तीय सेवा मुहैया कराने पर ध्यान दे रही हैं, ऐसे में यह जाहिर है कि इस पर आरबीआई की नजर होगी।'
दिशा माइक्रोफाइनैंस अहमदाबाद की एक सूक्ष्म कर्जदाता कंपनी है जिसे आरबीआई ने एक लघु वित्त बैंक शुरू करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसकी प्रबंधनाधीन संपत्ति 200 करोड़ रुपये है और इसका परिचालन चार राज्यों, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में है। आंध्र प्रदेश संकट की वजह से एमएफआई ने अपनी कार्यप्रणाली और कॉरपोरेट प्रशासन में कई सुधार किए जिसकी वजह से ही उन्होंने प्रवर्तकों की हिस्सेदारी कम करने का फैसला किया और कई एमएफआई ने तो यह हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी तक रखी है। उज्जीवन के मुख्य कार्याधिकारी और प्रबंध निदेशक समित घोष का कहना है, 'आरबीआई वर्ष 2010 से ही उद्योग के साथ बातचीत कर रहा है ताकि ग्राहकों की सुरक्षा के लिए कई नियमन लाए जाएं।' उज्जीवन दूसरा ऐसा एमएफआई है जिसे लघु वित्त बैंक का लाइसेंस मिला है।

मददगार उपाय
सूर्योदय माइक्रोफाइनैंस के मुख्य कार्याधिकारी आर भास्कर बाबू कहते हैं, 'तेजी से वृद्धि कर रहे किसी भी उद्योग में सार्थक नियमन की जरूरत होती है ताकि वृद्धि बरकरार रहे और संकट के बाद वर्ष 2011 में हमने ऐसा ही होते देखा। कीमत और कारोबार की गुंजाइश से जुड़े स्पष्ट दिशानिर्देश भी थे और इसकी वजह से माइक्रोफाइनैंस उद्योग में अच्छी वृद्धि हुई।' सूर्योदय माइक्रोफाइनैंस को भी एक लघु वित्त बैंक शुरू करने के लिए लाइसेंस मिला है। उनका कहना है, 'ज्यादातर एमएफआई खासतौर पर ऐसे एमएफआई जिन्हें लाइसेंस मिला है वे पेशेवरों द्वारा चलाए जाते हैं।' सूक्ष्म वित्त संस्थान फिलहाल सात राज्यों में मौजूद हैं जिनका परिचालन 164 शाखाओं के जरिये हो रहा है और वे 600,000 ग्राहकों को सेवाएं दे रहे हैं। इनके बड़े निवेशकों में डीडब्ल्यूएम, आविष्कार गुडवेल, आईएफसी, लोक कैपिटल, एचडीएफसी और एचडीएफसी लाइफ शामिल हैं।
आंध्र प्रदेश संकट के बाद एसकेएस माइक्रोफाइनैंस पर नियामक ने सतर्क निगाह बनाए रखी है। उम्मीदों के बावजूद एसकेएस माइक्रोफाइनैंस को बैंक का लाइसेंस नहीं मिला। 18 सितंबर को जारी हुई लाइसेंस वाली सूची में कंपनी का नाम न होने के बाद इसके शेयरों में 15.5 फीसदी की गिरावट आई। विश्लेषकों का कहना है कि लघु वित्त बैंक का लाइसेंस नहीं मिलने का मतलब यह नहीं है कि एसकेएस माइक्रोफाइनैंस के लिए रास्ता खत्म हो चुका है। क्रेडिट स्विस ने अपने क्लाइंट के लिए तैयार किए गए एक नोट में कहा, 'लघु वित्त बैंक का लाइसेंस हासिल करने वाले छोटे एमएफआई के मुकाबले एसकेएस माइक्रोफाइनैंस को संभवत: 300-400 आधार अंकों की फंडिंग लागत का फायदा मिलता है। किसी एमएफआई के बैंक के तौर पर काम करने का फायदा तुरंत नहीं लेकिन लंबी अवधि यानी पांच साल से अधिक समय के दौरान मिलता है। हमें ऐसा नहीं लगता है कि एसकेएस माइक्रोफाइनैंस की प्रतिस्पद्र्धी स्थिति पर भविष्य में कोई भी नकारात्मक असर पडऩे वाला है।'

कारोबारी मसले
हालांकि विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि एमएफआई का बैंक में तब्दील होना ही एकमात्र ऐसा तरीका है जिसकी वजह से गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी (एमएफआई भी एनबीएफसी की श्रेणी में हैं) अपना अस्तित्व बनाए रख सकते हैं क्योंकि यह उन्हें कम लागत वाली बचत और चालू खाता जमाएं दे सकता है। अमूमन बैंक बचत बैंक जमाओं पर 4 फीसदी ब्याज देते हैं। कुछ निजी क्षेत्र के बैंक 6-7 फीसदी तक ब्याज देते हैं। एमएफआई अपने संसाधनों के लिए ज्यादातर बैंक पर निर्भर होते हैं जिसकी वजह से फंड की लागत 12 फीसदी तक बढ़ जाती है।
यहां तक कि अगर लघु वित्त बैंकों को एनबीएफसी के मुकाबले वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर), नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) रखना पड़े तब भी फंड की कुल लागत एक एमएफआई के मुकाबले कम होगी। रेलिगेयर सिक्योरिटीज ने एक रिपोर्ट में कहा, 'हमारी गणना यह बताती है कि एसएलआर और सीआरआर बनाए रखने के बावजूद लघु वित्त बैंकों के लिए फंड की लागत एनबीएफसी और एमएफआई से कम 100-150 आधार अंक होगी। हमारा यह मानना है कि देनदारियों के मुकाबले बचत खाता का अनुपात 5 फीसदी, 15 फीसदी खुदरा जमा और बाकी थोक जमा और उधारी है, इस तरह यह 10.1 फीसदी फंड लागत में तब्दील हो जाता है।'
लघु वित्त बैंक की प्राथमिक जिम्मेदारी छोटे किसानों और कारोबारियों को कर्ज की सुविधा मुहैया कराना है और यह मॉडल तब सफल हो सकता है कि अगर वे तीन मानकों, मसलन जोखिम प्रबंधन, लागत प्रबंधन (परंपरागत रूप से एमएफआई की परिचालन लागत ज्यादा होती है) और तकनीक के जरिये गुणवत्ता वाली ग्राहक सेवाएं, का बेहतर प्रबंधन करें। एमएफआई के लिए आगे चीजों में सुधार होगा जिन्हें लघु वित्त बैंकों के लिए लाइसेंस मिला है लेकिन अगर वे यूनिवर्सल बैंक में तब्दील हो जाएं तो काफी सुधार की गुंजाइश है। हालांकि यह तब्दीली स्वत: नहीं हो सकती है और इसके लिए आरबीआई की मंजूरी की जरूरत होगी जो उनके ट्रैक रिकॉर्ड पर निर्भर होगा। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज ने एक रिपोर्ट में कहा, 'हमारे विचार से यह वित्तीय समावेशन की राह में एक बड़ा कदम होगा क्योंकि ये लघु बैंक स्थिर नियामकीय प्रारूप के दायरे में काम करेंगे। अगर ये लाभदायक कारोबारी मॉडल तैयार करने में सफल रहे तो यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस के लिए इनके आवेदनों पर विचार किया जा सकता है।

Keyword: micro finance, RBI, MFI,
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