बिजनेस स्टैंडर्ड - जारी रहेगा लंबे आलेख और कहानियां पढऩे का चलन
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, September 24, 2020 05:21 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

जारी रहेगा लंबे आलेख और कहानियां पढऩे का चलन
मीडिया मंत्र
वनिता कोहली-खांडेकर /  September 22, 2015

पेशे से वकील माइल्स जैकमैन ब्रिटेन में अश्लीलता निरोधक कानूनों में बदलाव लाने के मिशन पर हैं। करीब 7,000 शब्दों का उनका आलेख द गार्डियन के पूरे तीन पन्नों पर छापा गया और न चाहते हुए भी मेरा ध्यान उनके आलेख पर गया। लंदन मेट्रो की लंबी यात्रा के दौरान मैंने इस आलेख को पहले शब्द से आखिरी शब्द तक पढ़ा। अब कई अखबार, विशेष तौर पर ब्रिटेन और अमेरिका के द अटलांटिक या द न्यू यॉर्कर अब लंबे आलेख छाप रहे हैं। आमतौर पर ये आलेख विचार-संपादकीय आलेखों के ऊपर होते हैं या फिर सप्ताहांत के संस्करण में छपते हैं। भारत में सप्ताहांत को छोड़ दिया जाए तो शायद ही मुख्यधारा के अखबारों में लंबी खबरें, आलेख या फीचर प्रकाशित होते हैं। ज्यादातर पत्रिकाएं (शैक्षिक पत्रिकाएं शामिल नहीं) समाचार आधारित होती हैं। किसी भी पत्रिका में सबसे लंबी कहानी 3,000 से 3,500 शब्दों की होती है।

अखबार में सबसे बड़ा आलेख 1,000 से 2,000 शब्दों तक का हो सकता है। अगर किसी खबर या आलेख को अखबार का पूरा एक पन्ना दिया गया है, तो इसका मतलब है कि उसे बहुत अधिक महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन महत्त्व का किसी आलेख की लंबाई से कुछ भी लेना-देना नहीं है। कोई भी ऐसा आलेख या रिपोर्ताज जिसमें गहन विश्लेषण की जरूरत हो और उसमें काफी समय या संपादन कला लगे तो उसे आमतौर पर छेड़ा नहीं जाता है। ऐसे ही बेसब्र बाजार में 2010 में दिल्ली प्रेस ने द कैरवैन शुरू की गई। इस मासिक पत्रिका में कम से कम तीन ऐसे आलेख प्रकाशित किए जाते, जिनकी शब्द संख्या 7,000 से 14,000 शब्द हो। ये आलेख काफी शोध के बाद बेहतरीन ढंग से लिखे जाते हैं और बिल्कुल अलग नजरिया पेश करते हैं। हैरान करने वाली बात है कि द कैरवैन को भारत में खासी संख्या में पाठक मिले हैं। इस पत्रिका के संपादक अनंत नाथ दावा करते हैं कि उन्हें महीने में ऑनलाइन औसतन 6 लाख पेज व्यू मिलते हैं। हालांकि वह पत्रिका के प्रसार का आंकड़ा साझा करने से इनकार कर देते हैं।

इस मासिक पत्रिका का मूल्य 55 रुपये है और विकिपीडिया के अनुसार इसकी 40,000 प्रतियां प्रकाशित की जाती हैं। ऐसी दुनिया में जहां पूरा मीडिया पारिस्थितिकी भागती-दौड़ती जिंदगी में पढऩे के लिए छोटी कहानियों पर ध्यान दे रहा है, वहां लंबे आलेखों को लोग पसंद करेंगे। इसका बारे में कोई स्पष्टï जवाब नहीं दिया जा सकता है लेकिन इस बारे में मेरे कुछ विचार और किस्से हैं। द गार्डियन वैश्विक स्तर पर उन चुनिंदा मीडिया ब्रांडों में से एक है, जिन्होंने ऑनलाइन को काफी अच्छे तरीके से अपनाया है।

जैसे-जैसे लोग आईपैड और मोबाइल फोन पर पढऩे को तरजीह देने लगे, वैसे ही अखबार ने बड़ी तेजी से छोटे आलेखों को तवज्जो देना शुरू कर दिया। लेकिन द गार्डियन में लॉन्ग रीड्स के संपादक जोनाथन शैनिन कहते हैं, 'ऐसा महसूस किया जा रहा था कि डिजिटल प्लेटफॉर्म आने के बाद द गार्डियन का पूरा मूल स्वरूप ही बदल गया है और तेजी से पढ़ी जाने वाली छोटी खबरों की बढ़त को संतुलित करने के लिए कुछ धीमे और पाठकों की दिलचस्पी बरकरार रखने वाले आलेख जरूरी हैं।' इसलिए पिछले साल से अखबार ने लॉन्ग रीड्स की शुरुआत की, जो सप्ताह में तीन बार छपते हैं।

शैनिन कहते हैं कि यह 'प्रिंट बनाम डिजिटल की बात नहीं है। बड़े आलेख में एक अलग तरह की स्वायत्तता की जरूरत होती है- जिससे उसके अस्तित्व की वजह वही हो।' इससे पहले शैनिन द कैरवैन और द न्यू यॉर्कर के साथ कार्यरत थे। नाथ बताते हैं, 'लंबे प्रारूप वाली पत्रकारिता से किसी भी कहानी में मौजूद कई परतों को समझने में मदद मिलती है। लोगों को टेलीविजन और प्रिंट मीडिया में अमूमन गैर-काल्पनिक कहानियों के मुकाबले काल्पनिक कहानियां बहुत पसंद आती हैं और ऐसा इसलिए कि लोग रंगों और नाटक के साथ अच्छी कहानी सुनना चाहते हैं।

और गैर-काल्पनिक लेखन में रंग और नाटकीयता डालने का मतलब है 'हमें लेखकों को महत्त्वपूर्ण पोजिशन देनी होगी। नहीं तो 10,000 शब्दों की कहानी को बांधना बहुत मुश्किल है।' अन्य मीडिया पर नजर डालें। लाखों लोग गेम ऑफ थ्रोन्स या ब्रेकिंग बैड जैसे शो पैसे देकर देखते हैं। हाउस ऑफ काड्र्स की निर्माता कंपनी नेटफ्लिक्स इसके एक सीजन के सभी 13 एपिसोड एक साथ रिलीज करता है और सबस्क्राइबर भी इन्हें एक ही बार में देखना पसंद करते हैं। लंबा प्रारूप प्रिंट बनाम डिजिटल नहीं बल्कि टीवी और प्रिंट में लंबे प्रारूप के कार्यक्रमों को मिलने वाली दर्शकों की प्रतिक्रिया के बारे में है। लंबा प्रारूप अच्छी गुणवत्ता का पर्यायवाची बन चुका है। भारी मात्रा में अच्छे शो देखने या फिर 5,000 से 10,000 शब्द तक के आलेख पढऩे का मतलब है बेहतरीन जानकारी, खबरें और मनोरंजन तक पहुंच होना। यह मीडिया प्रारूप के बारे में नहीं बल्कि यह उस दुनिया के बारे में है, जहां पाठक या दर्शक जाना या रहना चाहते हैं-  जहां वे वास्तव में प्रबुद्घ, ज्ञानी या मनोरंजन महसूस करें। पाठ्य या दृश्य सामग्री कारोबार की परिस्थिति आंकने का इससे बेहतर कोई अन्य संकेत नहीं हो सकता है। डिजिटल दर्शकों की संख्या बढऩे के साथ उनका राजस्व नहीं बढ़ रहा है।

वर्तमान परिस्थितियों को देखकर तो यही लग रहा है कि टेलीविजन और अखबारों में डिजिटल मीडिया कम से कम 5 से 10 साल तक पारंपरिक मीडिया पर ही निर्भर रहेगा। उदाहरण के लिए बेहद भव्य गेम ऑफ थ्रोन्स का निर्माण इसलिए मुमकिन हो सका क्योंकि एचबीओ अमेरिका में दर्शकों से हर महीने 15 डॉलर या इससे अधिक रकम लेता है। सरस सलिल और सरिता जैसी लोकप्रिय पत्रिकाएं ही द कैरवैन को आर्थिक मदद उपलब्ध कराती हैं, जिससे वह सिर्फ एक खबर पर ही दो से चार महीने का समय दे पाती है। यानी अगर पारंपरिक प्रारूप नहीं भी रहता है तो अच्छी कहानी बांचने और लिखने के प्रशंसक इन्हें पढऩा और देखना बदस्तूर जारी रखेंगे। लंबी अवधि में किसी भी मीडिया कारोबार के लिए यह बहुत अच्छी परिस्थिति होगी।

Keyword: media, books, newspaper,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए एक और प्रोत्साहन की है जरूरत?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.