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'प्राकृतिक उर्वरक से घटेगा उर्वरक आयात और सब्सिडी बिल'
दिलीप कुमार झा /  September 17, 2015

कैमसन बायोटेक्नोलॉजिज के प्रबंध निदेशक और मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी धीरेंद्र कुमार ने दिलीप कुमार झा के साथ एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि उनकी कंपनी द्वारा विकसित प्राकृतिक उर्वरक से उर्वरक सब्सिडी बिल घटाया जा सकता है। बातचीत के अंश:

प्राकृतिक उर्वरक ही क्यों?

यह समय की मांग है। विकल्पों की भारी कमी से रसायनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है, जिससे वातावरण तेजी से खराब हो रहा है। माइक्रोबीअल क्षेत्र में शोध पर कैमसन की मेहनत सफल रही है। कैमसन ने पेड़-पौधों के लिए जरूरी तीन पोषक तत्वों नाइट्रोजन (एन), फास्फोरस (पी) और पोटाश (के) के उत्पादन की तकनीक खोजी है। ये प्राकृतिक उर्वरक एनपीके के विभिन्न संयोजन में उपलब्ध हैं।

रासायनिक उर्वरकों की तुलना में प्राकृतिक उर्वरक कितने किफायती हैं?

विनिर्माण प्रक्रिया एक पर्यावरण अनुकूल है, जो किफायती लागत पर इन तत्वों का उत्पादन करती है। रसायन आधारित जल में घुलनशील उर्वरकों के विनिर्माण के लिए मामूली ऊर्जा की जरूरत होती है। बाजार सर्वेक्षणों से पता चलता है कि किसान रासायनिक जल में घुलनशील उर्वरकों (डब्ल्यूएसएफ) के लिए 70 फीसदी प्रीमियम चुकाने को तैयार हैं। हालांकि हमने प्राकृतिक उर्वरक काफी कम कीमत पर पेश करने की योजना बनाई है, क्योंकि इनकी उत्पादन लागत रासायनिक डब्ल्यूएसएफ की तुलना में करीब आधी है।

उपयोग के लिहाज से कितनी संभावनाएं हैं?

भारत में डब्ल्यूएसएफ का बाजार करीब 1.5 लाख टन है और वर्ष 2018 तक दोगुना यानी 3 लाख टन होने का अनुमान है, जिसकी कीमत 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा होगी। यह कृषि इनपुट सेगमेंट में सबसे तेजी से बढ़ता सेगमेंट है।

क्या आप इसके वितरण के लिए उर्वरक कंपनियों के साथ बातचीत कर रहे हैं?
 
बहुत सी कंपनियों ने हमारे प्राकृतिक उर्वरकों का वितरण अपने ब्रांड से करने के लिए साझेदारी करने में रुचि दिखाई है। कैमसन के पास तकनीक होगी, इसलिए हम विनिर्माण और वितरण के विभिन्न विकल्प तलाश रहे हैं। यह हमारे लिए बेहतर होगा क्योंकि इससे बाजार का विस्तार होगा और यह सुनिश्चित होगा कि सभी किसानों को यह अनोखा उत्पाद मिल सके।

क्या इससे उर्वरक आयात बिल में कमी  आएगी?

भारत अपनी डब्ल्यूएसएफ की पूरी मांग का आयात करता है। हम इसका प्राकृतिक विकल्प पेश कर इसमें भारी कमी करने जा रहे हैं। हम बढ़ती मांग पूरी करने के लिए अगले 18 से 24 महीनों में क्षमता बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। इससे आयात बिल को घटाने में मदद मिलेगी।

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