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पेंशन के बाद जीएसटी का टेंशन
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली September 06, 2015

एक रैंक एक पेंशन मुद्दे पर मिली सफलता के बाद उत्साहित सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)सरकार वस्तु एवं सेवा कर को लेकर एक बार फिर जोर-आजमाइश करने जा रही है। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्षी दलों से नए सिरे से जीएसटी विधेयक को संसद केविस्तारित मॉनसून सत्र में पारित करने की अपील की है। हालांकि इस मुद्दे पर सोमवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली के तुर्की से वापस आने केबाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। दरअसल केंद्र सरकार ने अब तक राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को मॉनसून सत्र की समाप्ति को लेकर किसी तरह की सूचना नहीं दी और जब तक सत्रावसान नहीं किया जाता है तब तक सरकार के पास जीएसटी पारित कराने के लिए छोटा सत्र बुलाने का मौका मौजूद है। जीएसटी विधेयक को लोकसभा द्वारा पारित किया जा चुका है लेकिन राज्यसभा में अब भी इसके भविष्य को लेकर सवाल खड़े हैं। राज्यसभा में सरकार अल्पमत में है इसके साथ ही क्षेत्रीय दल अन्नाद्रमुक और वाम दल विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं।

उधर जनता परिवार केगठबंधन से अलग हुई मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी का रुख थोड़ा नरम है। समाजवादी पार्टी का कहना है कि वह जीएसटी केविरोध में नहीं है।  मायावती की अध्यक्षता वाली बहुजन समाज पार्टी ने कहा है कि वह विधेयक के विरोध में नहींं है लेकिन इतने शोर-शराबे के बीच विधेयक को पारित होते देखना उन्हें पसंद नहीं आएगा। तृणमूल कांग्रेस और बीजू जनता दल (बीजद) ने साफ कर दिया है कि वह विधेयक को पारित किए जाने के पक्ष में है। हालांकि ये चारों राजनीतिक दल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की राजनीति का विरोध करते हैं लेकिन जीएसटी पर सरकार केसाथ  हैं।

दरअसल ने सरकार ने वन रैंक वन पेंशन के लिए रास्ता साफ कर लिया है और राजनीतिक रूप से परिस्थितियां सरकार के पक्ष में नजर आ रही है इसलिए नए सिरे से जीएसटी विधेयक पर जोर दिया जा रहा है। कांग्रेस की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक जेटली और संसदीय मामलों के मंत्री वैंकैया नायडू ने लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े और गुलाम नबी आजाद से बातचीत की है। इसके साथ ही सरकार के अन्य मंत्री अन्य राजनीतिक दलों से भी संपर्क साधने के प्रयास में लगे हुए हैं।

राज्यसभा में जीएसटी पर सहयोग देने के लिए नायडू ने कांग्रेस से गुहार लगाई है। राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता आंनद शर्मा ने कहा कि संसद को दोबारा बुलाया जाना सरकार का विशेषाधिकार है लेकिन सरकार जीएसटी को लेकर  हमारी चिंताओं का कैसे समाधान करती है, इस पर निश्चित रूप से विचार-विमर्श किया जाएगा। कांग्रेस के एक वरिष्ठï नेता ने बताया कि जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक है और कांग्रेस ने तमाम मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज किया है ऐसे में विधेयक के हर प्रावधान पर मतदान होगा। किसी भी प्रावधान पर अगर मतभेद होते हैं तो उसे हटाना भी पड़ सकता है। इसे पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी।

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