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लाभांश देखकर न चुनें म्युचुअल फंड
प्रिया नायर /  August 30, 2015

पिछले दिनों कई इक्विटी म्युचुअल फंडों ने लाभांश देने का ऐलान किया है। लेकिन क्या निवेशकों को निवेश से पहले यह देखना चाहिए कि म्युचुअल फंड ने कितना लाभांश दिया है? विशेषज्ञों का जवाब 'न' है। इसकी वजह यह है कि इक्विटी फंड के मामले में लाभांश मिलने का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) में उतनी कमी आएगी।डेट फंड में निवेशकों को 28.84 फीसदी तक का ऊंचा लाभांश वितरण कर (डीडीटी) देना पड़ेगा। वैल्यू रिसर्च की वेबसाइट के मुताबिक बिड़ला सनलाइफ, बीएनपी पारिबा, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, केनरा रोबेको और आईडीएफसी जैसे फंड हाउस अपनी इक्विटी योजनाओं में लाभांश दे रहे हैं। 

वित्तीय योजना एवं सलाहकार कंपनी फिनकार्ट के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक तनवीर आलम कहते हैं, 'आमतौर पर लाभांश की घोषणा बाजार में तेजी के समय की जाती है, जब फंड प्रबंधकों को लगता है कि शेयर महंगे होने की वजह से वे ग्राहकों से मिली रकम उनमें लगा नहीं सकते। लेकिन वाजिब कीमत के इंतजार में वे रकम अपने पास रख भी नहीं सकते। इसलिए वे मुनाफा कमाते हैं और भारी लाभांश की घोषणा करते हैं।'

म्युचुअल फंड अनुसंधान कंपनी फंड्स इंडिया डॉट कॉम की प्रमुख विद्या बाला कहती हैं कि एक फंड के दृष्टिकोण से एक इक्विटी फंड की काबिलियत मुनाफे को नए इक्विटी अवसरों में ठीक ढंग से निवेश में है न कि इसे केवल वितरण करने में। यही वजह है कि लाभांश पर कर नहीं होने के बावजूद लाभांश भुगतान का ट्रैक रिकॉर्ड विशेष रूप से इक्विटी फंडों में ज्यादा प्रचलित नहीं है। वह कहती हैं, 'इक्विटी फंड लंबी अवधि के लिए होते हैं। निवेशक के दृष्टिकोण से इक्विटी फंड मोटी संपत्ति बनाने के लिए होते हैं और यह लाभांश वितरण से संभव नहीं है। धन का फिर निवेश करने पर ही निवेश में कई गुना बढ़ोतरी होगी।'

यही वजह है कि इक्विटी फंडों में ग्रोथ ऑप्शन को चुनना बेहतर माना जाता है। इसी तरह डेट फंड में भी अगर निवेशक नियमित आय की योजना नहीं बना रहा है तो लाभांश भुगतान पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है। आलम कहते हैं, 'निवेशकों के लिए लाभांश बड़ा फायदा नहीं है क्योंकि यह उनकी रकम में से ही दिया जा रहा है। यही वजह है कि लाभांश की घोषणा के बाद फंड की नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) घटती है।'

आर्बिट्राज, इनकम या लिक्विड फंडों में ही लाभांश की सुनिश्चितता अहमियत रखती है। बाला कहती हैं, 'आर्बिट्राज फंड्स और हाल में आए इक्विटी सेविंग फंड्स के मामले में ही लाभांश तर्कसंगत हैं क्योंकि इनमें लाभांश पर कर नहीं लगता है। इसके साथ ही सेक्टर फंड्स (जहां निवेशकों को बाजार समय का जोखिम होता है) में समय-समय पर कुछ लाभ निकाल लेना अच्छा है।'

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मुख्य निवेश अधिकारी शंकरन नरेन का मानना है कि लाभांश निवेशकों को मुनाफा लौटाने का अच्छा तरीका है और इसलिए ये आकर्षक हैं। वह कहते हैं, 'इक्विटी अस्थिर संपत्ति वर्ग में आती हैं। इसलिए लाभांश कुछ मनाफा लेने और उसे निवेशकों को लौटाने का अच्छा तरीका है। डेट फंडों में कर ज्यादा है, इसलिए अगर आप 10 से 20 फीसदी कर वर्ग में आते हैं तो इतना ऊंचा डीडीटी चुकाने की कोई तुक नहीं है।' बाला कहते हैं, 'अगर आप नियमित आय की योजना बना रहे हैं तो ग्रोथ ऑप्शन का इस्तेमाल करते हुए सिस्टेमेटिक विदड्रॉअल प्लान (एसडब्ल्यूपी) अपनाना बेहतर है। तीन साल से ज्यादा समय के लिए एसडब्ल्यूपी बेहतर विकल्प है क्योंकि इसमें आप पूंजीगत लाभ के इंडेक्सेशन का फायदा ले सकते हैं।'

Keyword: mutual funds, income, equity schemes, net profit,
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