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यूनियन के जरिये हक के लिए लड़ेंगे सहारा के कर्मचारी
बीएस संवाददाता / मुंबई August 30, 2015

सहारा इंडिया में लंबे समय से वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों के सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने पहली बार कर्मचारी यूनियन का गठन किया है। इसका नाम सहारा इंडिया कामगार संगठन है। इसके पहले सहारा में कभी भी कोई यूनियन नहीं थी। सहारा इंडिया कामगार संगठन के सचिव वेद प्रकाश मिश्र ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि यह संगठन चतुर्थ श्रेणी के उन कर्मचारियों ने मिलकर बनाया है जिनका औसत वेतन 15 हजार रुपये मासिक है। प्रबंधन कर्मचारियों को चार महीने से सात हजार रुपये तनख्वाह दे रहा है जिससे उनके सामने भुखमरी की स्थिति हो गई है। इस विषय पर प्रबंधन से जुड़े सभी अधिकारियों को पत्र लिखे गए और बात की लेकिन कुछ हुआ नहीं। उन्होंने कहा कि संगठन बनाने पर उनको एचआर की तरफ से धमकियां भी मिली हैं। इस बारे में गोरेगांव पुलिस स्टेशन को सूचित भी किया गया है।

संगठन के अध्यक्ष विशाल मोरे कहते हैं कि हमने श्रम आयुक्त कार्यालय के निर्देशों के अनुसार संगठन बनाया है। श्रम आयुक्तालय में प्रबंधन ने बकाया वेतन और हर महीने कम से कम 80 फीसदी तनख्वाह देने को कहा था लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है। अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी जहां कंपनी को जवाब देना होगा। सहारा इंडिया के प्रवक्ता अभिजीत सरकार से जब इस बारे में पूछा गए तो उनका कहना था कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि उनके संगठन को श्रम आयुक्त कार्यालय से मान्यता मिल गई है। इस समय संगठन में 180 सदस्य हैं जो सहारा वन और सहारा मीडिया से जुड़े है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि अब वे अपने संगठन का विस्तार करने के साथ कंपनी के खिलाफ हर तरह की लड़ाई लडऩे को तैयार हैं। साथ ही कर्मचारियों के हक की लड़ाई लडऩे वाले दूसरे संगठनों से संपर्क किया जा रहा है।

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Comments
 
arti
18-Mar-18
 
ग़ूदलआक एम्प्लोयीस
 
pramod
18-Mar-18
 
वेल्ल दोने
 
armaan
19-Sep-17
 
विशाल बहुत अचा
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