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मुंबई मेट्रो का नेटवर्क बढ़ाने की तैैयारी
संजय जोग / मुंबई August 27, 2015

रिलायंस इन्फ्रा की सहायक इकाई मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड (एममएओपीएल) के साथ कानूनी विवादों में उलझने के बावजूद मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने उसे 118 किलोमीटर मेट्रो नेटवर्क बिछाने की मंजूरी दी। इसकी  लागत करीब 35,400 करोड़ रुपये आएगी। हालांकि राज्य सरकार के कुछ अधिकारियों और ढांचागत क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि प्रस्तावित मेट्रो गलियारा शुरू करने से पहले राज्य सरकार को किराया, प्रस्तावित मेट्रो मार्ग के साथ रियल एस्टेट का दोहन आदि जैसे मुद्दों को सुलझाने की जरूरत है। इनका कहना है कि इन मुद्दों के समाधान के बाद ही सरकार को प्रस्तावित परियोजना पर आगे बढऩा चाहिए। 118 किलोमीटर लंबे मेट्रो तंत्र में 40 किलोमीटर लंबा दहीसर-चारकोप-बांद्रा-मनखुर्द मेट्रो-2 गलियारा (लागत 12,000 करोड़ रुपये), 40 किलोमीटर लंबा वडाला-घाटकोपर-ठाणे-कसरवदावली मेट्रो-4 गलियारा (लागत 12,000 करोड़ रुपये), 27 किलोमीटर के दहीसर पूर्व- अंधेरी पूर्व -बांद्रा पूर्व तक मेट्रो-5 गलियारा (8,100 करोड़ रुपये) और 11 किलोमीटर लंबा जोगेश्वरी-विखरोली लिंक रोड मेट्रो-6 गलियारा (लागत 3,300 करोड़ रुपये) शामिल है।

एक सरकारी अधिकारी ने बताया, 'राज्य सरकार और एमएमआरडीए को 11.4 किलोमीटर मेट्रो गलियारे से जुड़े मुद्दों के जल्द समाधान की उम्मीद है। मुंबई में मेट्रो एक जरूरत है, इसलिए 118 किलोमीटर लंबे नेटवर्क को मंजूरी दी गई है। ये गलियारे नकद समझौते के आधार पर बनेंगे। इसके तहत प्रस्तावित मेट्रो गलियारे का वित्त पोषण पूर्ण रूप से एमएमआरडीए करेगा।'

पीडब्ल्यूसी पार्टनर और लीडर (इन्फ्रास्ट्रक्चर) मनीष अग्रवाल ने कहा कि मेट्रो परियोजनाएं किराया राजस्व आधार पर तार्किक नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि 40 प्रतिशत तक अनुदान पूंजी भी काफी नहीं होगी। अग्रवाल ने कहा, 'मेट्रो परियोजनाओं के सफल होने के लिए संस्थागत एकीकरण, भूमि के सही इस्तेमाल एवं मेट्रो नियोजन एकीकरण, परिवहन एकीकरण और परिचालन एवं तकनीकी एकीकरण प्रमुख कारक होंगे।'

एमएमआरडीए के पूर्व आयुक्त राहुल अस्थाना ने सुझावा दिया कि किराया राजस्व ऐसा होना चाहिए कि इसमें ऋण खर्च का प्रावधान हो। अगर राज्य इकाइयों को लगता है कि उनके निवेश पर प्रतिफल नहीं के बराबर होगा और लोक हित में वे इसे स्वीकार करते हैं तो किराया तार्किक स्तर पर रखा जा सकता है। अस्थाना ने कहा, 'किराया तार्किक स्तर पर रखने के लिए सरकार को पूंजी निवेश को शून्य प्रतिफल की तरह देखना चाहिए और ऋण भुगतान किराया राजस्व  के आधार पर करना चाहिए।

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