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एक रैंक एक पेंशन पर भारी खर्च
अजय शुक्ला / नई दिल्ली August 17, 2015

राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया की उत्सुकता से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण पर नजर थी। सेवानिवृत्त सैनिकों, नौसैनिकों और वायुसैनिकों के लिए एक रैंक एक पेंशन (ओआरओपी) पर प्रधानमंत्री के वक्तव्य के इंतजार में थे। रक्षा मंत्रालय के भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग के मुताबिक भारत में 22.5 लाख सेना के पेंशनधारक या पूर्व सैनिक हैं और इसके अलावा पूर्व सैनिकों की करीब 6,00,000 विधवा हैं जिन्हें आजीवन पेंशन दी जानी है। अगर यह मानें कि हर पेंशनधारक के परिवार में 4 सदस्य हैं तो 1 करोड़ मतदाताओं को सीधे ओआरओपी का फायदा होगा। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ चुनाव क्षेत्रों में इनकी भूमिका अहम है। इसमें शामिल धन भी अहम है।

रक्षा से जुड़े पेंशनधारकों के लिए इस साल बजट में 54,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। अगर पूर्व सैनिकों की मांग स्वीकार की जाती है तो और 18-20,000 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। भारत में सेना की पेंशन की गणना रक्षा बजट में नहीं की जाती है। हालांकि पेंशन भी वेतन की तरह से ही व्यक्तिगत लागत का हिस्सा है। अगर ओआरओपी लागू किया जाता है तो सेना के  पेंशन का सालाना बजट 75,000 करोड़ रुपये होगा, जो वेतन के सालाना बजट 93,216 करोड़ रुपये से मामूली कम है।

ओआरओपी क्या है?

मुख्य बात यह है कि सैनिक, जो एक ही रैंक में सेवानिवृत्त हुए हैं, उन्हें बराबर पेंशन मिलनी चाहिए और यह नहीं देखा जाना चाहिए कि वे कब सेवानिवृत्त हुए हैं। इसके पीछे तर्क है कि सभी ने सेवा के दौरान एकसमान काम किया है और आज उन्हें एकसमान आर्थिक स्थिति से जूझना पड़ रहा है। इस समय सेवानिवृत्त सैनिक को उनके उस वेतन का आधा पेंशन के रूप में दिया जाता है, जो वेतन उन्होंने सेवानिवृत्त होने के पहले आखिरी बार लिया है। सरकार द्वारा लागू एक के बाद एक छठे वेतन आयोग के बाद सैनिकों का वेतन तेजी से बढ़ा है और सातवें पर चर्चा चल रही है। ऐसे में जो सैनिक पहले सेवानिवृत्त हुए हैं, उन्हें पहले सेवानिवृत्त सैनिकों की तुलना में कम पेंशन मिलती है।

ओआरओपी की मांग 1973 में तीसरा वेतन आयोग लागू होने के बाद हुई थी। बहरहाल यह पहला मौका है जब भूतपूर्व सैनिक ने इस तरह से खुद को सार्वजनिक रूप से संगठित किय है। इस अप्रत्याशित विरोध की जड़ 2013 तक जाती है, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्य चुनावी रणनीतिकार अमित शाह ने पूर्व सैनिक समुदाय को वोट बैंक के रूप में लक्षित किया। सितंबर 2013 में पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए रेवाड़ी में मोदी ने कहा कि उनकी सरकार बनने पर ओआरओपी लागू किया जाएगा। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने भी ओआरओपी शीघ्र लागू करने का वादा किया था, यहां तक कि फरवरी 2014 के लेखानुदान में इस मद में 500 करोड़ रुपये भी आवंटित किए थे, वहीं राजग सरकार ने जुलाई 2014 में अपने पहले बजट में इस मद में 1000 करोड़ रुपये टोकन राशि आवंटित किया।

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