बिजनेस स्टैंडर्ड - मैगी नूडल्स से हट गई रोक
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मैगी नूडल्स से हट गई रोक
बीएस संवाददाता / मुंबई/नई दिल्ली August 13, 2015

विवादों में फंसी नेस्ले इंडिया को आज उस वक्त बड़ी राहत मिली, जब बंबई उच्च न्यायालय ने उसके मशहूर उत्पाद मैगी नूडल्स से प्रतिबंध हटाने का आदेश दिया। इन नूडल्स पर इसी साल 5 जून से प्रतिबंध लगा हुआ था, जिसकी वजह से ये बाजार से गायब थे।
हालांकि प्रतिबंध हटने के बाद भी कम से कम 6 हफ्ते तक ये नूडल्स दुकानों पर नहीं दिखेंंगे क्योंकि अदालत ने कंपनी को 6 हफ्ते में यह साबित करने के लिए कहा है कि मैगी नूडल्स खाने से कोई नुकसान नहीं होता।
न्यायमूर्ति वी एम कनाडे और न्यायमूर्ति बी पी कोलाबावाला के खंडपीठ ने अपने आदेश में नेस्ले को मैगी नूडल्स के प्रत्येक वैरिएंट के पांच-पांच नमूने नए सिरे से जांच के लिए भेजने की अनुमति दे दी। इनकी जांच मोहाली, हैदराबाद और जयपुर में प्रयोगशालाओं में होगी। पीठ ने कहा कि इन प्रयोगशालाओं को एनएबीएल ने प्रमाणित किया है। अगर वहां पता चलता है कि सीसा तय सीमा से कम है तो नेस्ले को मैगी नूडल्स बनाने और बेचने की इजाजत दे दी जाएगी।
इस खबर के बाद नेस्ले इंडिया का शेयर आज बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर 4 फीसदी चढ़ गया। आखिरकार यह 2.78 फीसदी चढ़कर 6,356.70 रुपये पर बंद हुआ। नेस्ले ने आदेश का स्वागत करते हुए कहा, 'मैगी नूडल्स पर भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) और महाराष्टï्र एफडीए ने जो रोक लगाई थी, उसे हटाने के बंबई उच्च न्यायालय के आदेश का हम सम्मान करते हैं। नए सिरे से जांच कराने के अदालत के आदेश का हम पालन करेंगे।'
नेस्ले क्या कहेगी, यह तो सभी को पता था। लेकिन हैरत तो एफएसएसएआई के नरम रुख पर हुई। उसके नव नियुक्त चेयरमैन आशिष बहुगुणा ने नई दिल्ली में कहा, 'मैगी के मुद्दे पर नेस्ले इंडिया के लिए दरवाजे कभी बंद नहीं हुए थे। मैं उच्चतम न्यायालय में तभी जाऊंगा, जब मुझे लगेगा कि अदालत का फैसला ठीक नहीं है और अदालत ने प्राधिकरण के पक्ष पर गौर नहीं किया है।'
स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डïा ने इस मामले में सरकार का रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि बंबई उच्च न्यायालय के आदेश विश्लेषण करने के बाद यह फैसला लिया जाएगा कि सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाए अथवा नहीं। सरकार के कदम पर सभी की नजर रहेगी क्योंकि उसने उपभोक्ता न्यायालय में नेस्ले इंडिया के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। उसने भारतीय उपभोक्ताओं की ओर से नेस्ले इंडिया से 640 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा है। नेस्ले सरकार के इस फैसले पर निराशा जाहिर करते हुए कल ही कह चुकी है कि उसे ऐसी कोई सूचना नहीं मिली है।
दोबारा जांच के लिए मैगी नूडल्स के उन 750 पैकेटों में से नमूने लिए जाएंगे, जिन्हें प्रतिबंध लगने के बाद कंपनी ने संभालकर रखा था। उनके अलावा उसने जून और जुलाई में करबी 30,000 करोड़ टन नूडल्स वापस मंगाकर नष्टï कर दिए थे। उनकी कीमत लगभग 320 करोड़ रुपये थी। प्रतिबंध लगने से मैगी ब्रांड को भी धक्का लगा और उसकी कीमत करीब 20 करोड़ डॉलर कम हो गई। मैगी नूडल्स पर प्रतिबंध और बाजार से इसे हटाने के कारण ही नेस्ले इंडिया को 17 साल में पहली बार किसी तिमाही में घाटा उठाना पड़ा। उसे अप्रैल-जून 2015 तिमाही में घाटा हुआ।
इस आदेश से कंपनी का हौसला बढ़ेगा क्योंकि वह हमेशा कहती रही है कि एफएसएसएआई का फैसला एकतरफा और प्राकृतिक न्याय के सिद्घांत के खिलाफ है। एफएसएसएआई ने जांच के जो नतीजे पेश किए थे, उन्हें कंपनी ने खारिज कर दिया था। उसने कहा था कि जिन प्रयोगशालाओं में ये जांच हुई हैं उन्हें खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत मान्यता प्राप्त नहीं है। विदेशी खाद्य नियामकों से क्लीन चिट मिलने के कारण भी नेस्ले इंडिया का पलड़ा भारी हो गया था।

Keyword: Maggi, noodles, Ban, High court,
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